नोएडा प्रोटेस्ट केस पहुंचा NHRC और NCPCR, नाबालिगों को अवैध हिरासत में रखने का आरोप

नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस पर नाबालिगों सहित सैकड़ों लोगों को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगा है. NHRC-NCPCR में शिकायत दायर की गई है.

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नोएडा प्रोटेस्ट मामले में एक वकील ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. (File Photo: PTI) नोएडा प्रोटेस्ट मामले में एक वकील ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. (File Photo: PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:36 PM IST

नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई अब मानवाधिकारों और बाल अधिकार आयोग की दहलीज पर पहुंच गई है. एडवोकेट सुभाष चंद्रन ने याचिका दायर कर सैकड़ों लोगों और नाबालिग बच्चों को गैर-कानूनी तरीके से पुलिस कस्टडी में रखने का गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है.

एडवोकेट सुभाष चंद्रन के.आर. ने नोएडा के फैक्ट्री मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के मामले में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) और नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) में याचिका दाखिल की है. यह शिकायत उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नाबालिगों और युवकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ की गई है.

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याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने सैकड़ों लोगों और बच्चों को अवैध कस्टडी में रखा है. शिकायतकर्ता ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों की तुरंत रिहाई और मानवाधिकारों के उल्लंघन की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है. इसके साथ ही, नोएडा घटना के पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी गुजारिश की गई है.

संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

शिकायत में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि नाबालिगों को कस्टडी में रखना कानून का उल्लंघन है. आयोग से अपील की गई है कि इस तरह के मानवाधिकारों के हनन को दोबारा होने से रोकने के लिए तुरंत और असरदार कदम उठाए जाएं. प्रशासन से इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने को कहा गया है.

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याचिका में सिर्फ रिहाई ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए न्याय और हर्जाने की बात भी कही गई है, जिन्हें कथित तौर पर गलत तरीके से निशाना बनाया गया है. निष्पक्ष जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पुलिस ने किस आधार पर नाबालिगों को हिरासत में लिया. अब सबकी नजरें आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं.

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