ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री से जयशंकर ने की बात, मिडिल ईस्ट संकट पर हुई चर्चा

मिडिल ईस्ट की जंग को 20 दिन हो गए हैं और अब भारत की गैस सप्लाई पर खतरा मंडराने लगा है. इसी टेंशन में विदेश मंत्री जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया से फोन पर लंबी बात की है. मुसीबत ये है कि इजरायल-ईरान अब एक-दूसरे के गैस ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. भारत अपनी 40% गैस कतर से मंगाता है, अगर वहां हमले बढ़ें तो हमारे यहां गैस की भारी किल्लत हो सकती है.

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ईरान-इजरायल की जंग में फंसा गैस सप्लाई का पेंच ( File Photo: PTI) ईरान-इजरायल की जंग में फंसा गैस सप्लाई का पेंच ( File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:05 PM IST

मिडिल ईस्ट की जंग को आज 20 दिन पूरे हो गए हैं और हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते ही जा रहे हैं. इस लड़ाई का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है. हालात को इतना बिगड़ता देख शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग को फोन मिलाया और उनसे काफी देर तक चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के इस संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर काफी अहम चर्चा हुई है.

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दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी देशों के गैस केंद्रों पर हुए हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. जयशंकर ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बताया कि सीनेटर वोंग से बात करके उन्हें खुशी हुई और दोनों ने इस झगड़े पर अपने-अपने विचार साझा किए.

गैस सप्लाई पर फंसा पेंच

असली मुसीबत तो बुधवार के हमलों के बाद शुरू हुई. इजरायल ने ईरान के खास साउथ पार्स गैस इलाकों पर निशाना साधा, तो जवाब में ईरान ने भी कतर के रास लाफान गैस सेंटर सहित कई बड़े ऊर्जा ठिकानों पर जोरदार हमला बोल दिया. अब समस्या यह है कि भारत अपनी जरूरत की लगभग 40 प्रतिशत गैस (LNG) अकेले कतर से ही मंगवाता है. अगर कतर जैसे इलाकों में भी हमले होते हैं, तो भारत के लिए गैस का संकट खड़ा होना तय है.

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यही वजह है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी एक्टिव हो गया है. जयशंकर और पेनी वोंग की इस चर्चा का बड़ा मकसद यही था कि कैसे इस क्षेत्र में शांति बनाई रखी जाए और गैस की सप्लाई को रुकने से बचाया जाए. मिडिल ईस्ट की ये आग अगर और फैली, तो कतर से आने वाली गैस की कमी भारत के कारखानों और हमारे घरों के चूल्हों तक पहुंच सकती है. फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव कम होता है या और भयानक रूप ले लेता है.
 

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