'आज आपको घंटी नहीं बजाने दूंगा', राज्यसभा में जब सभापति से बोले मनोज झा

आरजेडी सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने राज्यसभा में सीएपीएफ रेगुलेटरी बिल का विरोध किया. उन्होंने सीएपीएफ के अधिकारियों, जवानों का दर्द भी बयान किया और कहा कि हम आज श्रद्धांजलि के देश में तब्दील हो गए हैं.

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आरजेडी सांसद ने सीएपीएफ बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की (Photo: Screengrab) आरजेडी सांसद ने सीएपीएफ बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:53 PM IST

राज्यसभा में सोमवार सीएपीएफ रेगुलेटरी बिल पर चर्चा के दौरान बिहार से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद प्रोफेसर मनोज कुमार झा जब बोल रहे थे, चेयर पर डिप्टी चेयरमैन पैनल के डॉक्टर दिनेश शर्मा थे. डॉक्टर दिनेश शर्मा प्रोफेसर झा को बोलने के लिए तय समय पूरा होने पर बेल बजाने जा रहे थे. तभी प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि सभापति जी, बेल मत बजाइएगा. उन्होंने कहा कि आपके बेल बजाने से पहले ही बैठ जाऊंगा. आज आपको बेल नहीं बजाने दूंगा.

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इससे पहले, चेयर से अगले वक्ता के रूप में प्रोफेसर मनोज कुमार झा का नाम लेते हुए डॉक्टर दिनेश शर्मा ने चार मिनट समय का जिक्र किया. इस पर प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि सभापति जी, मैं जानता था कि आप वक्त का जिक्र जरूर करेंगे. वक्त रहता नहीं कहीं ठहरकर, इसकी भी आदत आदमी सी है. उन्होंने कहा कि एकाध मिनट ज्यादा ले लूंगा, इससे ज्यादा मैं रिपीट नहीं करना चाहता. मैं विश्वविद्यालय में शिक्षक हूं.

प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने सीएपीएफ बिल का विरोध करते हुए कहा कि हो सकता है कि मैं वाइस चांसलर ना बनूं. लेकिन कानूनी तौर पर मेरी बाध्यता ऐसी मत करिए कि तू वाइस चांसलर नहीं बन सकता. उन्होंने कहा कि मेरा इस बिल से मूल प्रतिरोध इसलिए है कि हाइएस्ट पोजिशन पर संगठन से कोई व्यक्ति नहीं पहुंच सकता. प्रोफेसर मनोज झा ने कहा कि फोर्स को एक-दूसरे के खिलाफ मत करिए. ये हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.

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उन्होंने कहा कि आज जब हम लोग यहां बात कर रहे हैं, हमारे उस सदन (लोकसभा) में संभवतः लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म पर बात हो रही है. अच्छी बातचीत हो रही है, मैंने लॉबी में बैठकर देखा. प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि लेकिन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका किसने निभाई. अनसंग हीरो सीएपीएफ. अनसंग इसलिए न सर, क्योंकि श्रद्धांजलि के देश में हम तब्दील हो गए हैं. उन्होंने कहा कि पार्थिव शरीर आया, श्रद्धांजलि हुई, तस्वीरें खींची गईं और हमारे कर्तव्यों की इतिश्री हो गई.

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आरजेडी सांसद प्रोफेसर झा ने कहा कि हमें चिंता नहीं, कि उनका प्रमोशन क्या हो रहा. वो किस हालात में जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्टेकहोल्डर से तो बात हो. तमाम बिल में देख रहा हूं, स्टेकहोल्डर की पृष्ठभूमि नहीं है. ये परिस्थितियां विचित्र हैं. उन्होंने कहा कि अगर सेकेंड लेफ्टिनेंट आर्मी चीफ बन सकता है, कोस्टगार्ड को उसी संगठन का कोई हेड कर सकता है, तो क्या गुनाह किया है सीएपीएफ के हमारे अधिकारियों ने. प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि आज जब इस सदन में बोल रहा हूं, मेरी दोनों ग्रुप से कंसल्टेशन हुई है.

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उन्होंने कहा कि इस सदन में मैं उन कुछ सदस्यों में से होउंगा, जिन्होंने वह परीक्षा दी और असफल हो गए. सिविल सर्विसेज का भी असफल विद्यार्थी हूं. प्रोफेसर झा ने कहा कि हर फोर्स का एक डोमेन है. ये डोमेन क्लैश पासिंग उचित नहीं है. एक सेकेंड क्लास सिटीजनशिप वाली फीलिंग आए, वह भी तब, जब न्यायालय के फैसले के बाद उनके अंदर यह भरोसा जगा था कि हमारी पेंडिंग डिमांड्स पूरी हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन से मुझे एक बात समझ नहीं आती. हर स्टेट के होम सेक्रेटरी का डोमेन पुलिसिंग होता है.

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प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने कहा कि कितने स्टेट में ऐसा है. जो डेप्युटेशन पर दो साल के लिए आते हैं, वह उसके मर्म को उस तरीके से नहीं समझ पाएंगे जैसा उस कैडर के लोग. उन्होंने कहा कि एक बेहतरीन खूबसूरत बिल लाइए, पर स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के बाद. जिससे जवानों को भी लगे कि यह देश केवल श्रद्धांजलि का देश नहीं है. प्रोफेसर मनोज कुमार झा ने यह बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की.

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