लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के साइन क्यों नहीं? कांग्रेस ने बताई वजह

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा, जिस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. राहुल गांधी ने साइन नहीं किया है. नोटिस के बाद बिरला ने सदन की कार्यवाही नहीं चलाई.

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विपक्षी दलों ने ओम बिरला पर कई आरोप लगाए हैं. (Photo: PTI) विपक्षी दलों ने ओम बिरला पर कई आरोप लगाए हैं. (Photo: PTI)

अशोक सिंघल / मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:30 PM IST

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. अब विपक्षी ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंप दिया है. इसमें कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के करीब 118 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर साइन किए हैं.

लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है और मंगलवार को वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर नहीं आए.

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अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किया है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को देखते हुए विपक्ष के नेता के द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करना ठीक नहीं है.

विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. विपक्ष ने नोटिस में कहा है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सदस्यों पर साफ़ तौर पर झूठे आरोप लगे.

The opposition on Tuesday submitted a notice for moving a resolution to remove Lok Sabha Speaker Om Birla from office for disallowing Rahul Gandhi and other opposition leaders from speaking in the House on the Motion of Thanks to the President's address, as well as for the… pic.twitter.com/GqIMJCjhMX

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— Press Trust of India (@PTI_News) February 10, 2026

 

कांग्रेस पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के नेता के लिए स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन के नोटिस पर साइन करना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला इंस्टीट्यूशनल प्रोप्राइटी और पार्लियामेंट्री परंपराओं के सम्मान को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विपक्ष ने सदन के कामकाज पर चिंता जताते हुए नोटिस दिया था. यह कदम बजट सेशन के दौरान विपक्ष और ट्रेजरी बेंच के बीच चल रहे टकराव में एक बड़ी बढ़त दिखाता है.

यह भी पढ़ें: ओम बिरला से पहले तीन स्पीकर के खिलाफ आ चुका है अविश्वास प्रस्ताव, लेकिन किसी की नहीं गई कुर्सी

'बहुत ही जरूरी कदम...'

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा रखा है. माननीय स्पीकर का पर्सनल सम्मान करते हुए भी, हम विपक्षी MPs को पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे उठाने का मौका लगातार न देने से दुखी और परेशान हैं. कई सालों के बाद, स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है. यह एक बहुत ही जरूरी कदम है."

The Opposition has placed its faith in constitutional propriety.
While holding the Hon’ble Speaker in personal regard, we are pained and anguished by the consistent denial of opportunities to Opposition MPs to raise issues of public importance.
After many years, a no-confidence… pic.twitter.com/DwGElhoZYM

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— Manickam Tagore .B🇮🇳மாணிக்கம் தாகூர்.ப (@manickamtagore) February 10, 2026

इसके बाद, बीजेपी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ पेश किए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन नोटिस में एक फैक्टुअल एरर को तुरंत उठाया और बताया कि डॉक्यूमेंट में गलत साल लिखा था.

बीजेपी नेताओं के मुताबिक, पत्र में मौजूदा साल के बजाय साल 2025 लिखा गया है, जिससे सबमिशन की सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि नोटिस पर मोशन को सपोर्ट करने वाले 118 MPs के साइन हैं.

इससे पहले, बीजेपी की महिला MPs ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर 4 फरवरी, 2026 को सदन में हुए हंगामे को लेकर विपक्षी MPs के खिलाफ 'नियमों के तहत सबसे सख्त कार्रवाई' की मांग की थी. लेटर में विपक्षी सदस्यों पर वेल में घुसने, स्पीकर की टेबल पर चढ़ने और कार्यवाही में रुकावट डालने का आरोप लगाया गया है.

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