संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पंडित नेहरू को भी कोट किया. उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के विपक्ष का नेता रहते हुए एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए भी विपक्ष के आचरण को कठघरे में खड़ा किया. किरेन रिजिजू ने कहा कि स्पीकर जब चेयर पर बैठते हैं, तब उनका रोल भेदभाव रहित होना चाहिए, इसमें दो मत नहीं है. स्पीकर के किसी भी निर्णय को आज तक किसी ने भी चैलेंज नहीं किया है.
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने खड़े होकर कहा कि मुझे यहां बोलने के लिए किसी से परमिशन नहीं चाहिए. सदन में बोलना मेरा अधिकार है. मुझे दुख हुआ. किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस में कई वरिष्ठ लोग भी हैं. नेता प्रतिपक्ष को क्यों नहीं समझाया कि प्रधानमंत्री, मंत्री कोई भी हो, सदन में बोलने के लिए स्पीकर की परमिशन जरूरी है. उन्होंने एक पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी थे. हम लोग अफजल गुरु को फांसी दो की मांग को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे.
किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रोटेस्ट के दौरान गलती से हम लोग ट्रेजरी बेंच की ओर चले गए. इस पर तब के विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने हमें इतना डांटा, इतना डांटा. उन्होंने कहा कि आडवाणी ने तब ये हिदायत दी कि वह ट्रेजरी बेंच की जगह है. गलती से भी उधर मत जाना. हमने कभी वेल में डांस नहीं किया, स्पीकर पर कागज नहीं फेंका. किरेन रिजिजू ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी कोट किया और विपक्ष को चुनौती दी कि बीजेपी सांसदों का आचरण उठाकर देख लें.
उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने कहा था कि इस सभा की महान परंपरा रही है कि हम अध्यक्ष की सदाशयता पर उंगली नहीं उठा सकते. भले ही हम उनसे सहमत हों या असहमत. हम उन पर उंगली उठाते हैं, तब हम अपनी संस्था के आधार को ही नष्ट कर रहे होते हैं. किरेन रिजिजू ने कहा कि आज विपक्ष यही कर रहा है. उन्होंने 1954 में जीबी मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर पंडित नेहरू के ओपनिंग रिमार्क को भी कोट किया और कहा कि पंडित नेहरू ने कहा था यह किसी दल का नहीं, सभा का मामला है. चाहता हूं कि सदस्यों को इसका पता लग जाए.
पंडित नेहरू को किया कोट
किरेन रिजिजू ने कहा कि पंडित नेहरू ने कहा था, हो सकता है कि उनके निर्णय को पसंद न किया हो, यह एक चीज हो सकता है. नाराज हुआ जा सकता है, लेकिन उनके सद्भाव को चुनौती नहीं दिया जाना चाहिए. हम दुनिया को यह बता रहे हैं कि हम तुच्छ और झगड़ालू व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा कि मुझे मालूम है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भी कई सांसद दुखी हैं और 50 से ज्यादा सांसदों ने कहा है कि हम लोग दुखी हैं. कांग्रेस ने जो जिद्द पकड़ी है, उससे हम मजबूर हैं. रिजिजू ने कहा कि ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर आपने कितना गलत काम किया है, यह आपको भी पता चल जाएगा.
यह भी पढ़ें: 'कैश फॉर वोट में भी हम नहीं लाए अविश्वास प्रस्ताव', लोकसभा में रिजिजू का विपक्ष पर वार
उन्होंने कहा कि स्पीकर ने इनकी नोटिस में फॉल्ट था, करेक्शन कराया और तब आज हम लोग चर्चा कर रहे हैं. बहुत भारी मन से कह रहा हूं, कई स्पीकर देखे हैं. सबका योगदान है. गौरव गोगोई ने जो बोला, वह भी सोचेंगे रात को कि ऐसे शब्दों का उपयोग क्यों किया है. किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत की आजादी के बाद एक स्पीकर का नाम बताइए जो सरकार के खिलाफ बयान देते हों और सरकार के बिजनेस के खिलाफ काम करते हैं. व्यवस्था बनाई हुई है. उन्होंने कहा कि स्पीकर सबका है. वह बस संचालन करते हैं. आप कहते हैं कि स्पीकर सरकारी भाषा बोलते हैं. ज्यादातर स्पीकर आपकी ही पार्टी से रहे हैं.
यह भी पढ़ें: 'रोकिए इनको बोलने से...', किरेन रिजिजू की स्पीच के दौरान जब चेयर से बोले सौगत रॉय
कैश फॉर वोट में भी नहीं लाए अविश्वास- रिजिजू
किरेन रिजिजू ने कहा कि साल 2008 में जब कैश फॉर वोट का हंगामा हुआ था, सीपीएम के सोमनाथ चटर्जी का सर्वसम्मति से चुनाव हुआ. सरकार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग में 21 ज्यादा वोट मिले. जिन्होंने पैसे लिए, वो हीरो हो गए और हमारे तीन एमपी को जेल में डाल दिया गया. उन्होंने कहा कि स्पीकर से टेलीकास्ट कराने का निवेदन किया, वीडियो टेप दिया, कि बस प्ले करना है. तब भी हम लोग अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए.
यह भी पढ़ें: 'प्रियंका गांधी नेता प्रतिपक्ष होतीं तो...', संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने लोकसभा में की कांग्रेस MP की तारीफ
किरेन रिजिजू ने कहा कि 40 साल बाद आप लोग यह लेकर आए हैं. जो रिफॉर्म बिरला जी के समय में हुआ है, कोई उसे नहीं नकार सकता है. किरेन रिजिजू ने जीरो ऑवर से लेकर प्रश्नकाल तक, आंकड़े गिनाए और कहा कि सवाल पूछने के लिए स्पीकर ज्यादा मौके आपको देते हैं और आप कहते हैं कि स्पीकर पक्षपात करते हैं.
aajtak.in