लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आज आ गया है. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है. इस प्रस्ताव पर बीजेपी की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले वक्ता थे. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह सबसे अंत में बोलेंगे. यह प्रस्ताव सदन में एक दिन पहले ही आना था, लेकिन हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही चल ही नहीं सकी थी.
दूसरे हाफ के दूसरे दिन भी कार्यवाही की हंगामेदार शुरुआत हुई है. लोकसभा में प्रश्नकाल चल रहा है और विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारेबाजी कर रहे हैं. नारेबाजी के बीच ही शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित सवालों के जवाब दे रहे हैं. विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहा है.
लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने दिखे. विपक्षी नेताओं ने कहा कि ओम बिरला सज्जन व्यक्ति हैं, लेकिन उन पर सरकार का दबाव है और उन्हें निष्पक्ष तरीके से सदन चलाना चाहिए. वहीं सत्ता पक्ष ने उनका बचाव करते हुए कहा कि वे पूरी तरह निष्पक्ष हैं. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने आरोप लगाया कि यह प्रस्ताव केवल अध्यक्ष पर दबाव बनाने और सुर्खियां बटोरने के लिए लाया गया है.
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लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित हो गई है. पीठासीन दिलीप सैकिया ने 7.30 बजे सदन की कार्यवाही का समय सदन की सहमति से कांग्रेस सांसद एस जोतमणि की स्पीच पूरी होने तक के लिए बढ़ा दी थी. कांग्रेस सांसद की स्पीच पूरी होने के बाद पीठासीन ने कार्यवाही 11 मार्च, बुधवार को 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि इस अविश्वास प्रस्ताव का एक लाइन में सार यही है कि यह सदन जितना सरकार का है, उतना ही विपक्ष का भी है. संविधान के निर्माताओं ने बहुत ध्यान से शब्द का उपयोग करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन की बात की है, चुनाव की नहीं. रूल सात और आठ के तहत हमने उसे चुनाव में परिवर्तित कर दिया. संविधान निर्माताओं की मंशा थी कि स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चयनित किए जाएं. सभी को एक ही तरीके से देखना, ये भी उसमें था. धारा 94 पर संविधान में बहस हुई, इस बात पर थी कि अगर किसी कारणवश से स्पीकर को अपना इस्तीफा देना पड़ा तो वह किसे देना चाहिए. कामत साहब एक प्रस्ताव लेकर आए थे कि राष्ट्रपति को देना चाहिए. उसे खारिज कर दिया गया. आपने छह वर्षों से डिप्टी स्पीकर का चयन ही नहीं किया है. संविधान के साथ खिलवाड़ होगा, तो इसका नकारात्मक असर संवैधानिक संस्थाओं पर पड़ेगा. संविधान ने स्पीकर-डिप्टी स्पीकर को कोई विशेष दर्जा नहीं दिया है. उसके विपरीत जो सांसद हैं, उन्हें धारा 105 के तहत संविधान ने बहुत विशेष दर्जा दिया है. अगर सांसदों को संविधान सभा विशेष दर्जा नहीं देना चाहती थी, तो धारा 105 लाने की क्या जरूरत थी. रूल्स ऑफ प्रॉसीजर फ्रीडम ऑफ स्पीच को कम नहीं कर सकते. नियमों का इस्तेमाल संविधान की ओर से सांसदों को मिली आजादी को कुचलने में आप नहीं कर सकते. धारा 102 में है कि सांसद जो भी अपने मत का उपयोग करते हैं, उसकी कोई अदालत समीक्षा नहीं कर सकती. जो पत्रकार रिपोर्ट करते हैं कार्यवाही की, उसके खिलाफ कोई मानहानि का दावा नहीं हो सकता. सांसदों को जो जरूरी लगता है देश के सामने रखना, उसे प्रमाणित करने की जरूरत नहीं है.
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट चल रही है. लोकसभा की कार्यवाही का समय सात बजे तक बढ़ा दिया गया है. पीठासीन संध्या राय ने सदन की सहमति लेकर समय बढ़ाने का ऐलान किया.
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम है सरकार को घेरना. इनको कोई मुद्दा नहीं मिला सरकार के कामकाज में, तो ये स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गए. संविधान की बात वह कह रहे, जिन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहब का अनेकों बार अपमान किया. इस सदन में बाबा साहब की एक तस्वीर तक नहीं लगी थी. इमरजेंसी लगाकर संविधान की हत्या करने का काम किया. हम उस बिहार से आते हैं, जहां से संपूर्ण क्रांति शुरू हुई थी और जयप्रकाश नारायण ने इसी कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए नारा दिया था- सिंहासन खाली करो कि जनता आ रही है. उन्होंने कहा कि हमारी ही पार्टी में तीन फर्स्ट टाइमर सांसद हैं. अन्य दलों में भी कई होंगे. उनको बोलने का मौका मिलना चाहिए. आरोप-प्रत्यारोप के कई मौके मिलेंगे. चुनाव हम लड़कर आ गए और जब तक वन नेशन वन इलेक्शन नहीं हो जाता, हर दो-तीन महीने पर हमें मौका मिलेगा. हमें राष्ट्रहित में एकजुट होकर काम करना चाहिए. ये ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए हैं. हम सब जानते हैं कि वे कितनी समावेशी सोच वाले हैं. उनका अपना अनुभव है. किसी से भी पूछिएगा, हर कोई मानेगा कि उनके आचरण व्यवहार में किसी बात की तकलीफ हो. इनको दिक्कत यही है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति राष्ट्रहित में फैसले ले रहा है. अगर किसी को शिकायत है, तो यह मंच उसी के लिए है. आइए हम सब मिलकर यहां काम होने दें. जिस तरह के आचरण हम यहां देख रहे हैं, यह याद रखने की जरूरत है कि कोई भी यहां अजर-अमर नहीं है. आज यहां कोई और है, कल कोई और होगा. हम खूबसूरत परंपराएं छोड़कर जाएं.
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने किरेन रिजिजू को टार्गेट किया. उन्होंने सरकार को खुली चुनौती भी दे दी.
किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रोटेस्ट के दौरान गलती से हम लोग ट्रेजरी बेंच की ओर चले गए. इस पर तब के विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने हमें इतना डांटा, इतना डांटा. उन्होंने कहा कि आडवाणी ने तब ये हिदायत दी कि वह ट्रेजरी बेंच की जगह है. गलती से भी उधर मत जाना. हमने कभी वेल में डांस नहीं किया, स्पीकर पर कागज नहीं फेंका. किरेन रिजिजू ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी कोट किया और विपक्ष को चुनौती दी कि बीजेपी सांसदों का आचरण उठाकर देख लें.
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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर बोल रहे थे. इसी दौरान एक मौका ऐसा भी आया, जब टीएमसी के सांसद सौगत रॉय रूल बुक लेकर खड़े हो गए और पीठासीन से उन्हें रोकने की अपील की.
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जेडीयू के सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने स्पीकर को पद से हटाने के लिए आए संकल्प को तुष्टिकरण बताया. उन्होंने कहा कि यह संकल्प अर्थहीन है. यह संकल्प एक नेता का तुष्टिकरण है. एक नेता को खुश करने के लिए यह संकल्प लाया गया है, जिनकी विरासत चली आ रही है. लोकतंत्र का यह मंदिर चर्चा का मंच है. यहां हम चर्चा करते हैं. किसी भी विषय पर जब हम चर्चा करते हैं, तब पक्ष और विपक्ष की राय आती है और उससे जो निष्कर्ष निकलता है, वह देश की 140 करोड़ जनता के हक में होता है. जब उस पूरी प्रक्रिया को ध्वस्त करने का प्रयास कोई करता हो, संसद की गरिमा को तार-तार करने का कोई प्रयास करता हो, तो यह सिर्फ लोकतंत्र के इस मंदिर का अपमान नहीं है, वह 140 करोड़ जनता की भावना पर कुठाराघात है. ऐसी स्थिति लगातार होती है, परंपरा बन जाती है, तब इस मंदिर का कस्टोडियन असहज होता है. अंदर से कष्ट में जाता है. ऐसा जब होता है तो उनको कभी कभी रोकना टोकना पड़ता है. हमने इस सदन में देखा है कि माननीय अध्यक्ष ने आसन से कई मंत्रियों को भी टोकने का काम किया है. सबने सहजता से स्वीकार किया है. अध्यक्ष सभी को समान रूप से देखने का काम करते हैं. विपक्ष के नेता पद का जब प्रावधान किया गया था, तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि इतना उच्छृंखल व्यक्ति एक दिन नेता प्रतिपक्ष बनेगा. मैं तो समझता हूं कि एक प्रस्ताव इनको नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने के लिए आना चाहिए.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष में भी अच्छे लोग हैं, नेता प्रतिपक्ष उनको ही बनाया. इसमें मैं क्या कर सकता हूं. प्रियंका वाड्रा गांधी पीछे बैठकर मुस्करा रही हैं. इनको भी नेता प्रतिपक्ष बनाते तो परफॉर्मेंस अच्छा होता. रिजिजू ने कहा कि ये कम से कम सुनती तो हैं. कोई अच्छा व्यवहार करे, तो सराहना करना मेरा दायित्व है. इस पर प्रियंका गांधी अपनी सीट पर खड़ी हो गईं और कहा कि मेरा नाम लिया गया है, मुझे बोलने दिया जाए. इस पर पीठासीन ने कहा कि आपको मौका दिया जाएगा.
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किरेन रिजिजू ने कहा कि मुझे मालूम है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भी कई सांसद दुखी हैं और 50 से ज्यादा सांसदों ने कहा है कि हम लोग दुखी हैं. कांग्रेस ने जो जिद्द पकड़ी है, उससे हम मजबूर हैं. ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर आपने कितना गलत काम किया है, यह आपको भी पता चल जाएगा. स्पीकर ने इनकी नोटिस में फॉल्ट था, करेक्शन कराया और तब आज हम लोग चर्चा कर रहे हैं. बहुत भारी मन से कह रहा हूं, कई स्पीकर देखे हैं. सबका योगदान है. गौरव गोगोई ने जो बोला, वह भी सोचेंगे रात को कि ऐसे शब्दों का उपयोग क्यों किया है. भारत की आजादी के बाद एक स्पीकर का नाम बताइए जो सरकार के खिलाफ बयान देते हों और सरकार के बिजनेस के खिलाफ काम करते हैं. व्यवस्था बनाई हुई है. स्पीकर सबका है. वह बस संचालन करते हैं. आप कहते हैं कि स्पीकर सरकारी भाषा बोलते हैं. ज्यादातर स्पीकर आपकी ही पार्टी से रहे हैं. 2008 में जब कैश फॉर वोट का हंगामा हुआ था, सीपीएम के सोमनाथ चटर्जी का सर्वसम्मति से चुनाव हुआ. सरकार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग में 21 ज्यादा वोट मिले. पत्रकार के हाथ में करोड़ों देकर खरीदने का वीडियो था. आडवाणी जी ने कहा कि मैनेज हो गया. लाइव टेलिकास्ट नहीं होगा. आडवाणी जी ने कहा कि पैसे लेकर सदन के पटल पर रख दो. जिन्होंने पैसे लिए, वो हीरो हो गए और हमारे तीन एमपी को जेल में डाल दिया. स्पीकर से टेलीकास्ट कराने का निवेदन किया, वीडियो टेप दिया, कि बस प्ले करना है. तब भी हम लोग अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए. 40 साल बाद आप लोग यह लेकर आए हैं. जो रिफॉर्म बिरला जी के समय में हुआ है, कोई उसे नहीं नकार सकता है.
किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी थे. हम लोग अफजल गुरु को फांसी दो की मांग को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे. गलती से ट्रेजरी बेंच की ओर चले गए. इस पर आडवाणी ने इतना डांटा. इतना डांटा. कहा कि वह ट्रेजरी बेंच की जगह है. गलती से भी उधर मत जाना. हमने कभी वेल में डांस नहीं किया, स्पीकर पर कागज नहीं फेंका. राजीव गांधी ने कहा था कि इस सभा की महान परंपरा रही है कि हम अध्यक्ष की सदाशयता पर उंगली नहीं उठा सकते. भले ही हम उनसे सहमत हों या असहमत. हम उन पर उंगली उठाते हैं, तब हम अपनी संस्था के आधार को ही नष्ट कर रहे होते हैं. उन्होंने 1954 में जीबी मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर पंडित नेहरू के ओपनिंग रिमार्क को भी कोट किया. पंडित नेहरू ने कहा था कि यह किसी दल का नहीं, सभा का मामला है. चाहता हूं कि सदस्यों को इसका पता लग जाए. हम अध्यक्ष को वर्षों से जानते हैं, काम करते देखे हैं. हो सकता है कि उनके निर्णय को पसंद न किया हो, यह एक चीज हो सकता है. नाराज हुआ जा सकता है, लेकिन उनके सद्भाव को चुनौती नहीं दिया जाना चाहिए. हम दुनिया को यह बता रहे हैं कि हम तुच्छ और झगड़ालू व्यक्ति हैं.
किरेन रिजिजू ने स्पीकर को मिले अधिकारों का उल्लेख किया और कानूनी पहलुओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पीकर के किसी भी निर्णय को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता. स्पीकर निष्पक्ष होते हैं, लेकिन एक पार्टी खासकर रूलिंग पार्टी से आते हैं. यह भी सभी जानते हैं. हमारी व्यवस्था थोड़ी हटकर हो, ये संविधान निर्माताओं ने सोचा. संविधान निर्माताओं ने सोचा कि स्पीकर को रिजाइन करने की जरूरत नहीं है. चुनाव में उसे भी किसी पार्टी से जाना होता है. 2005 में सोमनाथ चटर्जी ने मुझे भी मौका दिया, मैंने यूके में ये कहा कि हमारी व्यवस्था अलग है. चेयर पर बैठने पर स्पीकर का रोल भेदभाव रहित होना चाहिए, इसमें दो मत नहीं है. स्पीकर के किसी भी निर्णय को किसी ने चैलेंज नहीं किया है. नेता प्रतिपक्ष ने खड़े होकर कहा कि मुझे यहां बोलने के लिए किसी से परमिशन नहीं चाहिए. सदन में बोलना मेरा अधिकार है. मुझे दुख हुआ. कांग्रेस में कई वरिष्ठ लोग भी हैं. नेता प्रतिपक्ष को क्यों नहीं समझाया कि प्रधानमंत्री, मंत्री कोई भी हो, सदन में बोलने के लिए स्पीकर की परमिशन जरूरी है.
सौगत रॉय ने फिर से पीठासीन के चयन पर सवाल उठा दिया है. सौगत रॉय ने कहा कि किसने आपको अपॉइंट किया है कार्यवाही के संचालन के लिए. इस पर पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि इस पर रूलिंग आ चुकी है.
गौरव गोगोई ने लोकसभा में सुषमा स्वराज को कोट करते हुए कहा कि हम एक-दूसरे के विरोधी जरूर हैं, लेकिन शत्रु नहीं हैं. यह है हमारे लोकतंत्र का मूलभाव. लेकिन जब भी विपक्षी दलों के नेता सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता. बोलने की अभिव्यक्ति कहां है. विपक्ष के नेता कहते हैं कि किस दबाव पर भारत ने अमेरिका से डील किया, जिससे हमारे किसानों को क्षति हुई. क्या ये दबाव था कि एक उद्योगपति का नाम आया, एक दूसरी जांच में एक मंत्री का नाम आया. आज ऐसे माहौल में हम हैं, देश के राजनीतिक नेतृत्व को सवाल पसंद नहीं. बस अपने मन की बात करते हैं. कल का उदाहरण ले लीजिए. कल हमने बार-बार ये मांग की थी कि एक जंग चल रही है और कहा गया कि हमने भारत को अनुमति दी है कि 30 दिन के लिए इन देशों से तेल खरीद सकते हो. कहां गए विश्व गुरु. आज एक विदेशी देश हमें अनुमति देता है कि किससे तेल लें, किससे ना लें. महिला सांसदों के उद्देश्यों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ओम बिरला ने क्या कहा. उन्होंने प्रधानमंत्री के अपनी बात नहीं रखने को लेकर कहा कि मैंने पीएम मोदी से धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब नहीं देने का आग्रह किया. स्पीकर ने महिला सांसदों की मंशा पर सवाल उठाए थे. यह दुर्भाग्य की बात है. पहले भी था कि प्रधानमंत्री सदन में आए और उनको बोलने का अवसर नहीं मिला. जून 2004 में मनमोहन सिंह नहीं बोल पाए, लेकिन वो सदन में मौजूद थे. बार-बार यह हो रहा है कि विपक्ष के नेता के भाषण एक्सपंज किए जा रहे और सत्ता पक्ष के सदस्य कुछ भी बोलते हैं, उनके भाषण जस के तस रह रहे. यह लोकतंत्रक्ष के हित में नहीं है.
लोकसभा और राज्यसभा में भोजनावकाश के बाद कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है. लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट चल रही है. गौरव गोगोई ने अपनी बात जारी रखी है. उन्होंने कहा कि स्पीकर ने बार-बार वेरिफाई करने के लिए कहा. विपक्ष के नेता ने जारी जांच का उल्लेख किया. मंत्री का नाम आया है जिसका, कई देशों में उनके इस्तीफे हुए हैं. केवल भारत में ऐसा है कि मंत्री का नाम आया और सरकार उसे वेरिफाई करना भी नहीं चाहती.
लोकसभा और राज्यसभा, संसद के दोनों सदनों में लंच ब्रेक हो गया है. दोनों सदनों की कार्यवाही अब दो बजे फिर से शुरू होगी. लोकसभा में गौरव गोगोई ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट की शुरुआत की है. पीठासीन जगदंबिका पाल ने लंच ब्रेक के लिए कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि गौरव गोगोई, आपका भाषण कॉन्टिन्यू रहेगा.
गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष के नेता ने अमेरिका से ट्रेड डील का मुद्दा भी उठाया, उन्हें बोलने नहीं दिया गया. आलू की खेती यूपी के किसानों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, हमारे प्रधानमंत्री ने ऐसी डील का समर्थन किया जो आलू उत्पादकों के हितों के खिलाफ है. इसके पीछे क्या दबाव था. डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की जारी जांच का दबाव है या एपस्टीन फाइल्स में और भी नाम हैं. इस पर पीठासीन ने कहा कि आप प्रस्ताव लाए हैं स्पीकर के खिलाफ और यह सब बोल रहे हैं. विषय पर बोलिए. गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष के नेता ने कहा कि हम ऑथेंटिकेट करेंगे. जैसे ही वे आगे बढ़े, सारे मंत्री खड़े हो गए. ट्रेजरी बेंच को इतनी आपत्ति. क्यों वे चाह रहे हैं कि सेना की बात रिकॉर्ड में न जाए. क्या पूर्व सेना प्रमुख की बातें मूल्यहीन हो जाती हैं, क्या वे झूठ बोल रहे हैं. सरकार यह कहना चाह रही है कि नरवणे जी झूठ बोल रहे हैं. पीठासीन ने फिर से उन्हें टोकते हुए कहा कि आप विषय पर बोलिए. आप सरकार पर बोले जा रहे हैं. गौरव गोगोई ने कहा कि जब एलओपी यह बात उठा रहे थे, सत्ता पक्ष से रोका जा रहा था., इस पर जगदंबिका पाल ने कहा कि वह तो यहां मौजूद भी नहीं हैं. गौरव गोगोई ने कहा कि आप मुस्कराते रहिए. जब टोकाटाकी चल रही थी, तब सदन का संचालन स्पीकर और पैनल के लोग कर रहे थे. जगदंबिका पाल ने कहा कि आपने जो खुद कहा कि पब्लिश हो या न हो. अगर पब्लिश नहीं है तो वह पब्लिक डोमेन में नहीं है. पब्लिक डोमेन में नहीं है तो उस बात को हम सदन में कैसे रख सकते हैं.
गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर के लिए पक्ष-विपक्ष का सम्मान होना चाहिए. विपक्ष के नेता जब बोल रहे थे, तब 20 बार रोकटोक हुई. और यह कहां से हुई, स्पीकर या चेयर पर जो पीठासीन थे, उनकी ओर से हुई, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री की ओर से हुई. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री को जब एक्टिव होकर कदम उठाने थे, तब तो वे कुछ किए नहीं. यही जब विपक्ष के नेता बोल रहे थे, उन्हें बोलने नहीं दिया गया. नेतृत्व की यह भाषा होती है कि जो करना है, कर लो. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अब यह डिबेट स्पीकर से ऊपर चली गई है. जवाब जब होगा, तब ये सुनेंगे और जो असंसदीय शब्द यूज हुए हैं, उनको हटाया जाना चाहिए. इस पर गौरव गोगोई ने कहा कि जब शोध होगा भविष्य में, आंकड़े बताएंगे कि सबसे ज्यादा टोकाटाकी करने वाले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू हैं. इस पर अमित शाह ने कहा कि हां, सहमत हूं. लेकिन संसदीय कार्य मंत्री को तब बोलना पड़ता है, जब संसद नियमों से परे जा रही होती है डिबेट. यह विपक्ष ऐसा ही है. गौरव गोगोई ने कहा कि इस सदन में उस पर चर्चा नहीं होती, जब एक मंत्री और एक उद्योगपति का नाम आता है एक फाइल में.
गौरव गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है. यह प्रस्ताव लाते हुए हमें कोई खुशी, उमंग नहीं है. ओम बिरला के संबंध व्यक्तिगत रूप से हर सदस्य के साथ अच्छे हैं, लेकिन हम मजबूर हैं कि अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ रहा है. ओम बिरला पर हम व्यक्तिगत आक्रमण नहीं करना चाहते. संविधान को बचाने के लिए, सदन की मर्यादा बचाने के लिए हम मजबूर हैं यह प्रस्ताव लाने के लिए. बहुत दुखी मन से हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ा है.
गौरव गोगोई ने पीठासीन पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेंडिंग हैं. स्पीकर के पास पीठासीन तय करने का अधिकार नहीं है. स्पीकर के पैनल में कई लोग हैं. यह कैसे तय किया गया कि जगदंबिका पाल चेयर पर रहेंगे. स्पीकर के तय किए नाम कैसे तय करेंगे कि कौन संचालन करेगा. इस पर गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए और कहा कि चुनाव की स्थिति में भी स्पीकर का दफ्तर एक्टिव होता है. गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर के पास पावर नहीं होती और यही हम देख रहे हैं कि संविधान का उल्लंघन हो रहा है. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में पावर डिप्टी स्पीकर के पास होती है. लेकिन यह सदन बगैर डिप्टी स्पीकर के चल रहा है. देश को यह पता चलना चाहिए. यह माइक भी अस्त्र बन गया है. जब माइक ही नहीं आता है, किस प्रकार से सदन की मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है. देश को पता चलना चाहिए.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट शुरू हो गई है. कांग्रेस की ओर से विपक्ष के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की है. गौरव गोगोई विपक्ष के पहले वक्ता हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि स्पीकर होते हैं या स्पीकर की चेयर पर जो बैठते हैं, उनसे यह उम्मीद होती है कि भेदभाव नहीं करेंगे.
किशनगंज से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने स्पीकर ओम बिरला के आचरण पर सवाल उठाया और कहा कि विपक्ष के नेता को नहीं बोलने दिया गया. विपक्ष के कई नेताओं को नहीं बोलने दिया गया. महिला सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाए गए. सभी कंट्रोवर्शियल मैटर पर सत्ताधारी दल का पक्ष लिया. उन्हें उनके ऑफिस से हटाया जाना चाहिए. इस प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा होगी.
लोकसभा में पीठासीन की पावर को लेकर डिबेट छिड़ गई है. असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का उल्लेख कर पीठासीन की शक्तियों पर सवाल उठाए, जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेंडिंग हो. बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने भी नियमों का उल्लेख कर पीठासीन की पावर बताई. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इन सबकी बजाय अब डिबेट शुरू होनी चाहिए. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी नियम पढ़ा. उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद स्पीकर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं कर सकते. आप भी उनकी ओर से ही चुने गए हैं. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोई भी रूल पूरा पढ़ा जाना चाहिए. स्पीकर को यह अधिकार है कि वह वहां बैठे, बोले और वोट भी कर सकता है.
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ गया है. बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. मोहम्मद जावेद की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रूल बुक से रूल पढ़कर पीठासीन पर ही आपत्ति कर दी.
लोकसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है. लोकसभा में चेयर पर जगदंबिका पाल आए हैं. पीठासीन ने सदस्यों की ओर से स्थगन प्रस्ताव का नोटिस मिलने की जानकारी दी और कहा कि इनमें से किसी भी नोटिस को अनुमति नहीं दी गई है. इस पर विपक्ष की ओर से किसी सदस्य ने कुछ कहा. पीठासीन ने इस पर रूल 10 पढ़कर सुनाया और कहा कि जो व्यक्ति चेयर पर है, उसे वही शक्तियां होती हैं जो स्पीकर को होती हैं. लोकसभा में लिस्टेड बिजनेस लिए जा रहे हैं. वहीं, राज्यसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही चल रही है.
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा हुआ. विपक्षी दलों ने वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करते हुए जमकर नारेबाजी की. विपक्ष की नारेबाजी और हंगामे के बीच ही पीठासीन संध्या राय ने सदन की कार्यवाही जारी रखी. हंगामा बढ़ा और अंत में पीठासीन को कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करनी पड़ी. लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित हो गई है.
राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही चल रही है. शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करते हुए वॉकआउट कर दिया. विपक्ष के वॉकआउट पर नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि ये चुनाव सुधार पर चर्चा की डिमांड कर रहे थे. चर्चा हुई. जब जवाब सुनने की बारी आई, ये वॉकआउट कर गए. वॉकआउट कर जाना इनकी आदत है. देश की जनता सब देख रही है.
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आज आएगा. इस अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट 12 बजे से शुरू हो सकती है. इस प्रस्ताव पर बीजेपी की ओर से पहले वक्ता संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू होंगे. बीजेपी के वक्ताओं की लिस्ट में पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे, तेजस्वी सूर्या, जगदंबिका पाल, अनुराग ठाकुर और भर्तृहरि महताब के नाम भी हैं. गृह मंत्री अमित शाह बीजेपी की ओर से सबसे आखिर में बोलेंगे.
लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही चल रही है. प्रश्नकाल के दौरान शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित प्रश्नों के जवाब दे रहे हैं. विपक्षी सदस्य वेल में आ गए हैं और जोरदार हंगामा कर रहे हैं. विपक्षी सदस्य चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. विपक्षी दलों के सदस्य वोट चोरी और इलेक्शन कमीशन शेम शेम के नारे लगा रहे हैं. विपक्ष के हंगामे पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार ने किसानों के कल्याण की योजनाएं रोक रखी हैं और यहां ये घटिया राजनीति कर रहे हैं. देश देख रहा है. पश्चिम बंगाल की जनता इन्हें माफ नहीं करेगी.
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आज आएगा. अविश्वास प्रस्ताव पर डिबेट आज 12 बजे से शुरू हो सकती है. यह प्रस्ताव बजट सत्र के दूसरे हाफ के पहले दिन ही एजेंडा में शामिल था, लेकिन सदन नहीं चल सका था. विपक्षी दलों ने ईरान जंग पर संक्षिप्त चर्चा की मांग करते हुए जोरदार हंगामा किया था.