अगली $1 ट्रिलियन कंपनी में होंगे सिर्फ 5 कर्मचारी, सलीम इस्माइल का बड़ा दावा

इस्माइल का तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकें नई खोजों के पूरे अर्थशास्त्र को बदल रही हैं, जिससे छोटी टीमें भी न्यूनतम संसाधनों के साथ वैश्विक स्तर के उत्पाद तैयार कर पा रही हैं.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सलीम इस्माइल ( Arun Kumar/India Today) इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सलीम इस्माइल ( Arun Kumar/India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

Singularity University के संस्थापक कार्यकारी निदेशक और OpenExO के संस्थापक सलीम इस्माइल ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के बनने और चलने के तरीके को नाटकीय रूप से बदल सकता है, जिससे अगली 1 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी संभवतः केवल पांच कर्मचारियों के साथ काम कर सकती है.

इस्माइल ने बताया कि एआई (AI) जैसी तकनीकों के तेजी से बढ़ने के कारण नई खोजों और बदलाव का पूरा तरीका ही बदल रहा है. अब छोटी-छोटी टीमें भी इतनी ताकतवर हो गई हैं कि वे दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को टक्कर दे सकती हैं और उन्हें पीछे छोड़ सकती हैं. 

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सलीम इस्माइल ने भविष्य की कॉरपोरेट दुनिया का एक क्रांतिकारी चित्र पेश करते हुए कहा कि अगली 1 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी संभवतः मात्र पांच कर्मचारियों के साथ संचालित होगी. उन्होंने रेखांकित किया कि एक बिलियन डॉलर की कंपनी खड़ी करने के लिए आवश्यक जनशक्ति में ऐतिहासिक गिरावट आई है. जहां एक सदी पहले इसके लिए 1 लाख कर्मचारियों की जरूरत होती थी, वहीं बाद के दशकों में यह संख्या घटकर 10,000 रह गई. तकनीक के इस दौर में Google ने यह मुकाम लगभग 1,000 और OpenAI ने केवल कुछ सौ कर्मचारियों के साथ हासिल कर दिखाया है.

उनके अनुसार, एआई अब केवल एक सहायक उपकरण नहीं, बल्कि संगठनों का मूल ऑपरेटिंग ढांचा बनता जा रहा है. भविष्य में कंपनियां अपने कार्यप्रवाह को इस तरह तैयार करेंगी कि एआई सिस्टम सीधे दूसरे एआई सिस्टम से संवाद करेंगे, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी. 

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भविष्य की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए सलीम इस्माइल ने कहा कि हम जल्द ही अधिकांश वर्कफ़्लो को एआई के माध्यम से संचालित करेंगे, जहां इंसानों की भूमिका मुख्य रूप से डैशबोर्ड की निगरानी, सिस्टम की देखरेख और केवल अपवादों को संभालने तक सीमित रह जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े और स्थापित संगठन अक्सर नवाचार करने में संघर्ष करते हैं, क्योंकि उनका ढांचा बदलाव को रोकने के लिए बना होता है. 

उन्होंने इस प्रतिरोध को कंपनियों के भीतर एक 'इम्यून सिस्टम' के रूप में वर्णित किया, जो मौजूदा प्रक्रियाओं की रक्षा तो करता है, लेकिन विघटनकारी नवाचार को कठिन बना देता है. उनका कहना है कि यदि आप किसी पुरानी विरासत वाले वातावरण में कुछ भी क्रांतिकारी करने की कोशिश करते हैं, तो कंपनी की 'एंटीबॉडीज' आप पर हमला कर देती हैं.

यही कारण है कि आज बड़े तकनीकी बदलाव विशाल निगमों के बजाय छोटी और फुर्तीली टीमों से आ रहे हैं. इस्माइल के अनुसार, यह स्थिति स्पष्ट करती है कि क्यों स्थापित फर्में खुद तकनीक बनाने के बजाय अक्सर विघटनकारी स्टार्टअप्स का अधिग्रहण करती हैं. साथ ही, उन्नत तकनीकों की गिरती लागत 'अनुमति-मुक्त विघटनकारी नवाचार' को सक्षम बना रही है. एआई, सेंसर और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर जैसे उपकरण अब इतने सुलभ हो गए हैं कि व्यक्ति और छोटी टीमें भी वे तकनीकें बना सकती हैं, जिनके लिए कभी बड़ी रिसर्च लैब या कॉर्पोरेट फंडिंग की आवश्यकता होती थी. उन्होंने चेतावनी देते हुए निष्कर्ष निकाला कि अब इनोवेशन अप्रत्याशित स्थानों से विस्फोट की तरह निकलेगा और 'सबसे खतरनाक कंपनी वह स्टार्टअप है जिसके बारे में आपने कभी सुना भी नहीं है.

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