LPG के बाद अब फार्मा इंडस्ट्री पर युद्ध का असर! महंगी हो सकती हैं ये जरूरी दवाइयां

ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की आंच अब भारत के मेडिकल सेक्टर तक पहुंच गई है. कच्चे माल की कमी और पैकेजिंग लागत बढ़ने से पैरासिटामोल और शुगर जैसी आम दवाओं के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने के आसार हैं.

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दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर. (Photo: ITG) दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर. (Photo: ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

LPG संकट के बाद अब इजरायल-ईरान संघर्ष का असर अब भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर भी दिखाई दे रहा है. दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कच्चे माल (API) की सप्लाई प्रभावित होने, शिपिंग लागत बढ़ने और पैकेजिंग लागत बढ़ने से दवाओं की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है.

दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, शिपिंग और पैकेजिंग लागत में वृद्धि ने दवाओं की कीमतों को प्रभावित किया है. बुखार, डायबिटीज, इन्फेक्शन और सांस की बीमारियों की दवाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. फार्मा संगठनों ने सरकार को इमरजेंसी रिपोर्ट सौंपी है, ताकि कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और दवाओं की कीमतों में आंशिक वृद्धि की अनुमति दी जा सके. इसी को लेकर हमारे संवाददाता ने दिल्ली के सबसे बड़े दवा बाजार भागीरथी पैलेस से जमीनी हालातों को जानने की कोशिश की है.

ग्राउंड रिपोर्ट में दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर ने बताया, 'देखिए, जिस तरह से एपीआई महंगा होता जा रहा है. दवा निर्माताओं के पास नए रेट की लिस्ट आ चुकी है और अगर कच्चे माल के रेट बढ़ेंगे तो स्वाभाविक बात है कि दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे, क्योंकि दवाइयों का कच्चा माल बाहर से आता है.'

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पैकिंग मैटेरियल की बढ़ी कॉस्ट

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ कच्चे माल के रेट बढ़ रहे हैं. दवाइयों की पैकिंग में पैकिंग मैटेरियल कॉस्ट आती है. दवा की पैकिंग के लिए एल्यूमिनियम और प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, जिन पर पहले ही 30-40% रेट बढ़ चुके हैं. इस वजह से दवा की पैकिंग भी महंगी पड़ रही है. ओवरऑल दवाई भी महंगी हो जाएगी.

उन्होंने दवाओं के रेट बढ़ने के पीछे की वजह के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस युद्ध की वजह से कार्गो शिप देरी से आ रहे हैं. अगर शिप देरी से यहां पहुंचेंगे तो सप्लाई चेन प्रभावित होगी, इससे मार्केट में दवाओं की कमी हो जाएगी और इससे दवाओं के दाम भी बढ़ जाएंगे.

ये दवाएं हो सकती हैं महंगी

आशीष ग्रोवर ने चेतावनी दी कि बुखार, डायबिटीज, इन्फेक्शन और सांस की बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. ये वे दवाएं हैं जो रोज लाखों मरीज लेते हैं.अभी बाजार में स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन आने वाले दिनों में फर्क ज्यादा दिखने लगेगा. अगर युद्ध लंबा खिंचा तो दवा की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है.

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सरकार को सौंपी इमरजेंसी रिपोर्ट

इसी बीच भारत में दवाओं के कच्चे माल की सप्लाई पर संकट गहराने के बाद फार्मा संगठनों ने सरकार को इमरजेंसी रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट में कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और दवाओं की कीमतों में आंशिक वृद्धि की अनुमति देने की अपील की गई है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग बंद न हो.

उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और शिपिंग रूट बदलने से कंटेनरों की कमी हो गई है. उद्योगों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति 10-15 दिनों में नहीं सुधरी तो दवाओं का वर्तमान स्टॉक खत्म हो सकता है और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा भी बढ़ जाएगा.

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