ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में बने युद्ध जैसे हालात का सीधा असर हवाई सेवाओं पर पड़ा है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने शनिवार को भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को 11 देशों के एयरस्पेस में उड़ान भरने से बचने की सलाह दी, जबकि एअर इंडिया, इंडिगो, एअर इंडिया एक्सप्रेस, आकासा एयर और स्पाइसजेट ने मिडिल ईस्ट के लिए अपनी उड़ानें रद्द या निलंबित कर दीं.
एयरस्पेस के अचानक बंद होने से सैकड़ों उड़ानों पर असर पड़ा. फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के अनुसार, कई विमान अलग-अलग एयरस्पेस में मंडराते देखे गए और कई उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा. एअर इंडिया की दिल्ली-तेल अवीव उड़ान को बीच रास्ते से ही मुंबई लौटना पड़ा. मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार शाम 5:45 बजे तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मिलाकर 57 उड़ानें रद्द की गईं. अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने भी यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की.
DGCA ने 11 देशों के एयरस्पेस को बताया खतरनाक
डीजीसीए ने एयरलाइंस कंपनियों से जिन 11 देशों के एयरस्पेस से बचने को कहा है, उनमें ईरान, इजरायल, लेबनान, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, कुवैत और कतर शामिल हैं. यह एडवाइजरी 2 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी, जब तक कि हालात की समीक्षा कर कोई नया आदेश जारी न किया जाए. डीजीसीए ने कहा कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और यूरोपीय संघ की एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) के कॉन्फ्लिक्ट जोन बुलेटिन के अनुरूप लिया गया है.
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स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने एयरलाइंस, एयरपोर्ट्स और अन्य हितधारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में यात्रियों की सुरक्षा और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन पर जोर दिया गया. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि एयरलाइंस को जरूरत पड़ने पर उड़ानों का रीरूटिंग या डायवर्जन वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकारी और निजी एयरपोर्ट को अलर्ट पर रखा गया
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि संभावित डायवर्जन, अनिर्धारित लैंडिंग और यात्रियों की सुविधा से जुड़े इंतजाम किए जा सकें. प्रभावित यात्रियों के लिए एयरलाइंस ने रीशेड्यूलिंग और कैंसिलेशन पर चार्ज में छूट देने की घोषणा की है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि वह विदेश मंत्रालय के साथ भी लगातार संपर्क में है, ताकि विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों और भारतीय एयरलाइंस से जुड़े किसी भी आपातकालीन स्थिति में समन्वय सुनिश्चित किया जा सके.
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