ईरान पर इजरायली और अमेरिकी मिसाइलें बरस रही हैं. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान जवाबी हमले कर रहा है. ईरान में अब तक इस हमले में 80 से ज्यादा स्कूली छात्राओं की मौत हो चुकी है. रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के हमले में ईरान के रक्षा मंत्री आमिर नासिरजादेह और IRGC के दो-तीन कमांडरों की मौत हुई है. वहीं, ईरानी मीडिया ने रेड क्रिसेंट के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिकी-इजरायली हमलों ने 24 प्रांतों को प्रभावित किया है. इस हमले में 201 लोग मारे गए हैं और 747 लोग घायल हुए हैं.
28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमले ने मध्य पूर्व में अभूतपूर्व तनाव पैदा कर दिया है. इजरायल ने इस हमले को 'शेर की दहाड़' का नाम दिया है. जबकि अमेरिका ने इस ऑपरेशन को 'Operation Epic Fury' यानी कि जबर्दस्त गुस्सा नाम दिया है. ईरान पर इस इजरायली हमले का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता, न्यूक्लियर प्रोग्राम, मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर और लीडरशिप को निशाना बनाना था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन' बताया और ईरानी लोगों से अपील की कि वे अपनी सरकार बदल लें. ईरान ने अप्रत्याशित और अभूतपूर्व ताकत का प्रदर्शन करते हुए पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के 7 देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों से हमला कर दुनिया को चौंका दिया.
भारत में 11 बज रहे थे, ईरान में 9
भारत में सुबह के लगभग 11 बज रहे थे. लेकिन ईरान में 9 बजे का वक्त था. ईरान की राजधानी तेहरान में अचानक इजरायल और अमेरिका ने मिसाइल और बम गिराना शुरु कर दिया.
इजरायल और अमेरिका ने ईरान के तेहरान, कॉम, तबरेज, करमनशाह, कराज, इस्फहान पर हमला किया. ईरान के मिनाब शहर में हुआ हमला काफी दुखद रहा. ईरान का दावा है कि इस हमले की चपेट में लड़कियों का एक पूरा स्कूल ही आ गया. इस हमले में 85 बच्चियों की मौत हो गई है. अमेरिकी इजरायली हमले के बाद ईरान के कई शहरों में अफरातफरी का माहौल रहा और लोग सुरक्षित स्थानों पर भागते दिखाई दिए.
राजधानी तेहरान का आसमान हमले के बाद धुएं के गुबार से भरा रहा.
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर के कैंपस के पास धमाका हुआ. यहां 7 मिसाइलें गिरीं. अबतक की जानकारी के अनुसार अली खामेनेई कुशल हैं. इसके अलावा अमेरिका और इजरायल ने ईरान के राष्ट्रपति भवन, रक्षा मंत्रालय, खुफिया विभाग के मुख्यालय और एटॉमिक एनर्जी ऑफ ईरान के ऑफिस पर हमला किया है.
इस बीच ईरानी संसद राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी के चेयरमैन ने इजरायल-अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि ये लड़ाई तुमने शुरू की है, लेकिन इसे खत्म हम करेंगे. ईरान ने कहा है कि इस हमले के जवाब में इजरायल को कुचल दिया जाएगा.
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ईरान ने हमले के बाद अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है. वहां से कोई भी विमान उड़ान नहीं भर रहा है.
टेररिस्ट रिजीम के पास परमाणु हथियार नहीं रहेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की जानकारी देते हुए कहा कि कुछ समय पहले यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री ने ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू किए. हमारा मकसद ईरानी सरकार से आने वाले खतरों को खत्म करके अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है.
ट्रंप ने ईरान सरकार को बहुत सख्त, भयानक लोगों का एक खतरनाक ग्रुप बताया. उन्होंने कहा कि 47 सालों से, ईरानी सरकार अमेरिका को मौत का नारा लगा रही है और यूनाइटेड स्टेट्स, हमारे सैनिकों और कई, कई देशों में बेगुनाह लोगों को निशाना बनाकर खून-खराबे और बड़े पैमाने पर हत्या का एक कभी न खत्म होने वाला कैंपेन चला रही है.
ट्रंप ने साफ कहा कि आतंकी ईरानी सरकार के पास परमाणु हथियार नहीं रहेगा. उन्होंने साफ कहा कि ईरान का सत्ता प्रतिष्ठान सरेंडर करे अन्यथा उनकी मौत निश्चित है.
दोस्त प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद
इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कमोबेश ट्रंप की बातें ही कही. उन्होंने कहा कि "हमारा जॉइंट ऑपरेशन बहादुर ईरानी लोगों के लिए अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने के लिए हालात बनाएगा."
इजरायली पीएम ने कहा, "मेरे भाइयों और बहनों इजरायल के नागरिकों, बस एक घंटा पहले इज़रायल और USA ने ईरान में आतंकी शासन से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को दूर करने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया है."
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"मैं अपने महान दोस्त प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को उनके ऐतिहासिक नेतृत्व के लिए धन्यवाद देता हूं."
"47 सालों से अयातुल्ला शासन 'इज़राइल की मौत', 'अमेरिका की मौत' चिल्ला रहा है. इसने हमारा खून बहाया है, कई अमेरिकियों को मारा है, और अपने ही लोगों का कत्लेआम किया है."
इजरायल-अमेरिका ने क्यों किया हमला
इस हमले का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कगार पर है जो अमेरिका और इजरायल के लिए अस्तित्व का खतरा है. ट्रंप ने ईरान को 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था कि वह यूरेनियम संवर्धन रोकें, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सीमित करें और हमास, हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स का समर्थन बंद करें. इन देशों के बीच जिनेवा में हाल ही में हुई शांति वार्ता फेल रही. इसके बाद ईरान पर अटैक करने का फैसला किया गया.
ईरान में सत्ता परिवर्तन असंभव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का ट्रंप का सपना असंभव मिशन है. उन्होंने कहा कि ईरान आत्मरक्षा में पश्चिम एशिया में अमेरिकी बेस पर हमले कर रहा है.
भारत में ईरान के एम्बेसडर मोहम्मद फतहली ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान पर एक बार फिर US और ज़ायोनी शासन ने हमला किया है. उन्होंने ईरान की सॉवरेनिटी और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन किया है. उन्होंने कई शहरों में टारगेट पर हमला किया, जिसमें डिफेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर और सिविलियन इलाके शामिल हैं."
ईरान ने पश्चिम एशिया में सनसनी मचा दी
इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान लगभग एक घंटे तक तो सहमा रहा. लेकिन इसके बाद ईरान की सेना ने जब जवाब में पश्चिम एशिया के 7 देशों पर हमला किया तो दुनिया सहम उठी. ईरान ने ये हमला इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर किया.
ईरान ने एक साथ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और इराक पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया.
ईरान ने इन देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों की कई लहरें दागीं.
बहरीन: US Fifth Fleet मुख्यालय पर मिसाइल हिट, मनामा में धुआं और विस्फोट.
UAE: अबू धाबी और अल धाफ्रा बेस पर हमले
कतर: अल उदैद एयर बेस पर टारगेट
कुवैत: अली अल सलेम बेस पर मिसाइल हमला
जॉर्डन: दो मिसाइल इंटरसेप्ट
सऊदी अरब: रियाद में धमाके रिपोर्ट
ईरान ने दर्जनों बैलिस्टिक, सुपरसोनिक और क्रूज मिसाइलें दागीं. जो इजरायल, UAE के अबू धाबी और दुबई, सऊदी अरब की राजधानी रियाद, कतर की राजधानी दोहा और बहरीन की राजधानी मनामा , कुवैत, जॉर्डन और इराक के अमेरिकी सैन्य अड्डों पर टारगेटेड रहीं.
इस हमले का UAE पर व्यापक असर रहा. दुबई में लगातार धमाके की खबरें दिन भर आती रहीं. अबू धाबी में एक पाकिस्तानी की मौत मलबे के चपेट में आने से हो गई. UAE ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया. वहीं सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी लगातार धमाके हुए.
सबसे ज्यादा प्रभावित बहरीन में मौजूद अमेरिकी आर्मी का फिफ्थ फ्लीट रहा. यहां हमले के बाद भयानक आग लग गई. कतर में भी धमाके हुए ईरान के IRGC ने इसे "ताकतवर प्रहार" बताया.
मिडिल ईस्ट में पूरी तरह से चल रहे युद्ध के बीच भारत ने इज़राइल और ईरान में अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे "बहुत ज़्यादा सावधानी" बरतें और तय शेल्टर के पास रहें. लगभग 9.7 मिलियन भारतीय नागरिक मिडिल ईस्ट में रहते और काम करते हैं.
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