लॉटरी से तय होंगी सीटें! महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार का नया फॉर्मूला

केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाने पर विचार कर रही है. इसके तहत महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. विपक्षी दलों के साथ बातचीत जारी है और संशोधन विधेयक संसद में जल्द पेश किया जाएगा.

Advertisement
बिल को बजट सत्र के दौरान ही पास कराया जा सकता है. (File Photo: ITG) बिल को बजट सत्र के दौरान ही पास कराया जा सकता है. (File Photo: ITG)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:24 AM IST

केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तेजी से लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार इस कानून की राह में आ रही सबसे बड़ी बाधाओं जैसे नई जनगणना और परिसीमन की शर्त को हटाने पर विचार कर रही है. इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनाने के लिए बातचीत शुरू हो चुकी है.

Advertisement

अब तक महिला आरक्षण तभी लागू हो सकता है जब नई जनगणना और उसके बाद सीटों का परिसीमन पूरा हो जाए. लेकिन अगली डिजिटल जनगणना 2026-27 तक खिंच सकती है और इस प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं. ऐसे में सरकार अब इसी 'बॉटलनेक' यानी देरी की वजह को खत्म करना चाहती है.

प्रस्तावित बदलाव के तहत भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का अब तक का सबसे बड़ा स्वरूप देखने को मिल सकता है. लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में महिलाओं की मौजूदगी बढ़ सकती है. लोकसभा और विधानसभा की आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर 816273 (एक तिहाई) हो सकती है, जो महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.

परिसीमन का इंतजार करने के बजाय, सरकार सीटों के आवंटन के लिए लॉटरी बेस्ड सिस्टम के बारे में सोच रही है. इसका मकसद प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखना है. फिलहाल इसमें जातिगत जनगणना के डेटा को शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण जारी रहेगा.

Advertisement

विपक्ष का रुख और राजनीतिक हलचल

गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कई क्षेत्रीय और विपक्षी दलों के साथ चर्चा की है. कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसे दल लंबे समय से जनगणना की शर्त हटाने की मांग कर रहे थे. राहुल गांधी ने भी पहले सरकार पर इस कानून को लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया था. अब विपक्ष चाहता है कि 2029 के चुनावों से पहले इसे पूरी तरह लागू किया जाए.

28-29 मार्च को संसद में इसे लेकर संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है. 2 अप्रैल को बजट सत्र खत्म होगा और इससे पहले इसे पास कराने की कोशिश होगी. अगर ये बिल पास हो जाता है, तो 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से पहले इसका रोलआउट शुरू हो सकता है.

यह भी पढ़ें: महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा-कब लागू होगा 33% आरक्षण? सरकार से टाइमलाइन भी मांगी

2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को ऐतिहासिक माना गया था, लेकिन प्रक्रिया में हो रही देरी की वजह से ये अटका हुआ है. अब सरकार इस वादे को हकीकत में बदलना चाहती है और भारत के चुनावी परिदृश्य हमेशा के लिए बदलना चाहती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement