गैस संकट के बावजूद भारत ने रूस की LNG खरीदने से किया इनकार

भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों वाली रूसी LNG खरीदने से इनकार किया. गैस संकट के बीच यह फैसला एनर्जी सिक्योरिटी और ग्लोबल रूल्स के संतुलन से जुड़ा है.

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रूसी LNG पर भारत ने लिया बड़ा फैसला (File Photo: ITG) रूसी LNG पर भारत ने लिया बड़ा फैसला (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

भारत ने रूस के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें वह अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) बेचना चाहता था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है. यह फैसला तब लिया गया है, जब मिडिली-ईस्ट में तनाव की वजह से गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इस स्थिति के चलते भारत आ रहा एक टैंकर अधर में लटक गया है, जबकि किन कार्गो (माल) को अनुमति दी जा सकती है, इस पर बातचीत अभी भी जारी है.

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यह रुख इस बात को उजागर करता है कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और उन LNG कार्गो से बचने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जिन पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं. 

ऐसे कार्गो की पहचान छिपाना मुश्किल होता है और इनमें नियमों के पालन से जुड़ा रिस्क भी ज्यादा होता है. यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि रूस के लिए अपने LNG निर्यात को नए बाजारों की ओर मोड़ने की क्षमता की भी कुछ सीमाएं हैं.

सूत्रों में से एक ने बताया कि भारत की इस इनकार की वजह से बाल्टिक सागर में स्थित रूस के 'पोर्टोवाया' संयंत्र से आया एक LNG कार्गो (जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं) अभी तक अनलोड नहीं हो पाया है. हालांकि, अप्रैल के मध्य में इस कार्गो ने भारत को अपना गंतव्य बताया था. सूत्र ने आगे कहा कि जहाज के डॉक्यूमेंट्स में यह दर्शाया गया था कि यह कार्गो रूसी मूल का नहीं है, इसके बावजूद इस जहाज पर नजर रखी गई.

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रॉयटर्स ने अप्रैल के मध्य में LSEG के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए बताया था कि 138,200 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला टैंकर 'कुनपेंग' पश्चिमी भारत में स्थित 'Dahej LNG इंपोर्ट टर्मिनल' की ओर बढ़ रहा था. LSEG के मुताबिक, यह जहाज अब सिंगापुर के जलक्षेत्र के पास है और इसने अपने गंतव्य के बारे में कोई जानकारी प्रसारित नहीं की है.

सूत्रों में से एक ने बताया कि रूस से समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार होने के बावजूद, भारत ने 30 अप्रैल को रूस के उप-ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन के भारत दौरे के दौरान उन्हें यह बता दिया था कि वह प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली LNG नहीं खरीदेगा. इस दौरे के दौरान सोरोकिन ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की थी. सूत्र ने बताया कि एक महीने के अंदर यह उनकी दूसरी मुलाकात थी और सोरोकिन जून में आगे की बातचीत के लिए दोबारा भारत आ सकते हैं.

भारत के तेल और गैस मंत्रालय और दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोधों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया.

'रूस बेचने को उत्सुक, भारतीय कंपनियां सतर्क'

रूस से कच्चे तेल की भारत की खरीद बिना किसी रुकावट के जारी रही है. इसमें अमेरिका के उन प्रतिबंधों से मिली अस्थायी छूट से मदद मिली है, जिन्हें 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए ऊर्जा संकट से निपटने में देशों की मदद करने के लिए लागू किया गया था.

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'आर्कटिक LNG 2' रूस का एक और एक्सपोर्ट प्लांट है, जो अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में आता है. वॉशिंगटन ने 2025 की शुरुआत में यूक्रेन पर रूस के युद्ध को लेकर इन LNG संयंत्रों पर प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया था. एक सूत्र ने बताया कि जहां समुद्र में एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में तेल ट्रांसफर करके कच्चे तेल की खेप को छिपाया जा सकता है, वहीं LNG की खेप को सैटेलाइट ट्रैकिंग से छिपाना कहीं ज्यादा मुश्किल होता है.

यह भी पढ़ें: LNG टैंकर धड़ाधड़ पहुंच रहे पाकिस्तान! ईरान ने क्यों दी होर्मुज में 'स्पेशल एंट्री'

सूत्र ने बताया कि भारत रूस से अप्रूव्ड LNG खरीदने को तैयार है, लेकिन इसकी ज़्यादातर मात्रा यूरोप के लिए पहले से ही तय है. सूत्र ने यह भी बताया कि चीन रूस से अप्रूव्ड और बिना मंजूरी वाली, दोनों तरह की LNG का एक बड़ा खरीदार बना हुआ है. सूत्र ने आगे बताया कि मॉस्को भारत को LNG और पोटाश, फ़ॉस्फ़ोरस और यूरिया जैसे उर्वरकों की आपूर्ति के लिए लंबी अवधि के सौदे करने की भी कोशिश कर रहा है.

ईरान विवाद की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही में रुकावट आने से पहले, भारत अपनी गैस की खपत का आधा हिस्सा आयात से पूरा करता था, जिसमें से करीब 60 फीसदी इसी जलमार्ग से आता था. उसके कच्चे तेल की आपूर्ति का आधे से ज्यादा हिस्सा भी इसी रास्ते से आता था.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे घर से काम करके, विदेश यात्राएं कम करके और सोने तथा खाने के तेल का आयात घटाकर ईंधन और विदेशी मुद्रा की बचत करें.

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