असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जितने भी विधायक इस बार जीते हैं, उनमें से सिर्फ एक ही हिंदू उम्मीदवार है और बाकी सभी का धर्म इस्लाम है. सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले करीब सभी विधायक मुस्लिम भाई-बहन हैं और केवल एक ही हिंदू प्रत्याशी को जीत हासिल हुई है.
मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य में कांग्रेस के घटते जनाधार और उसके वोट बैंक के ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है. उनके मुताबिक, कांग्रेस अब असम में एक व्यापक प्रतिनिधित्व वाली पार्टी के बजाय केवल एक विशेष समुदाय की पार्टी बनकर रह गई है.
दूसरी ओर, एआईयूडीएफ के चीफ बदरुद्दीन अजमल ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है. अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से करते हुए कहा कि कांग्रेस दूसरों के लिए कुआं खोद रही थी, लेकिन अब वह खुद उसी कुएं में गिर गई है.
'हमको दुख है...'
AIUDF के चीफ बदरुद्दीन अजमल ने कहा, "दूसरे के लिए जो कुआं खोदता है, उसके सामने कुआं आता है. कांग्रेस ने AIUDF के लिए कुआं खोदा और उसी में खुद गिर गई और कांग्रेस खत्म हो गई. कांग्रेस मुस्लिम लीग हो गई, इसका हमको दुख है. सब हार गए, बहुत-बहुत मुबारक हो."
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असम की सियासत में नया मोड़
चुनाव नतीजों के बाद आए इन बयानों ने असम की भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर दी है. एक तरफ जहां सत्ता पक्ष कांग्रेस को सांप्रदायिक आधार पर घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके पुराने सहयोगी भी साथ छोड़कर तीखे हमले कर रहे हैं. कांग्रेस के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि उस पर सिर्फ एक धर्म विशेष के उम्मीदवारों को जिताने का ठप्पा लग रहा है. सियासी जानकारों का मानना है कि इन बयानों से राज्य में आने वाले वक्त में राजनीतिक ध्रुवीकरण और गहरा सकता है, जिससे मुख्यधारा की विपक्षी पार्टी के रूप में कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ेंगी.
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