3 लाख में बच्चा खरीदा, फिर दिखावा करने लगी कि प्रेग्नेंट हूं... चौंका देगी चाइल्ड ट्रैफिकिंग गैंग की कहानी

संतान पाने की चाह में एक कपल ने हैरान कर देने वाला कदम उठा लिया. आईवीएफ यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन के बाद भी जब बच्चा नहीं हुआ तो उन्होंने 3 लाख में एक नवजात बच्ची को खरीद लिया. इसके बाद महिला खुद को प्रेग्नेंट दिखाने का नाटक करने लगी. मामला तब खुला, जब पुलिस ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया.

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नवजात को खरीदा, फिर किया प्रेग्नेंट होने का नाटक. (Photo: Representational) नवजात को खरीदा, फिर किया प्रेग्नेंट होने का नाटक. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • एलुरु,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

संतान की चाह में एक कपल ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. कई बार कोशिश और IVF प्रक्रिया के बाद भी जब बच्चा नहीं हुआ तो कपल ने 3 लाख में एक नवजात बच्ची को खरीद लिया. इसके बाद महिला ने खुद को प्रेग्नेंट दिखाने का नाटक किया, ताकि नवजात को अपना जैविक बच्चा साबित किया जा सके.

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एजेंसी के अनुसार, यह मामला तब सामने आया, जब आंध्र प्रदेश के एलुरु में पुलिस ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले चाइल्ड ट्रैफिकिंग गैंग का भंडाफोड़ किया. जांच में सामने आया कि यह गैंग नवजातों को पैसे लेकर बेचता था और बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी.

एलुरु में संदिग्ध जन्म पंजीकरण रिकॉर्ड की जांच के दौरान पुलिस को इस पूरे मामले की भनक लगी. रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद जब गहराई से जांच की गई तो नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ. एलुरु के सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) डी. श्रवण कुमार ने बताया कि जांच के दौरान दो ऐसे मामलों का पता चला, जिनमें नवजात शिशुओं को अवैध तरीके से बेचा गया था.

3 लाख रुपये में नवजात बच्ची का सौदा

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पहला मामला मुदिनेपल्ली मंडल के एक कपल से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार, यह कपल लंबे समय से संतान प्राप्ति के लिए प्रयास कर रहा था और कई बार आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया भी करवा चुका था, लेकिन सफलता नहीं मिली.

इसी दौरान कपल ने 1 दिसंबर 2024 को करीब 3 लाख रुपये देकर एक नवजात बच्ची को ले लिया. इसके बाद महिला ने खुद को प्रेग्नेंट दिखाने का नाटक किया और बच्ची को अपना जैविक बच्चा बताने की प्लानिंग की.

यह भी पढ़ें: 6 लाख में बेबी... 36 घंटे के नवजात को बेचने की तैयारी, CBI ने बेनकाब कर दिया दिल्ली में बच्चों के खरीद-फरोख्त का नेटवर्क!

इस काम में दलालों और अन्य लोगों की मदद ली गई. बच्ची को वैध दिखाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया और बाद में आधार कार्ड भी बनवा दिया गया.

पंचायत कार्यालय से बनवाए गए फर्जी दस्तावेज

जांच में सामने आया कि आरोपी कपल ने यह कहानी गढ़ी कि ट्रेन यात्रा के दौरान उनके बच्चे के दस्तावेज चोरी हो गए. इसके बाद उन्होंने कुछ मध्यस्थों से संपर्क किया, जिन्होंने पंचायत कार्यालय के जरिए बिना सही सत्यापन के नया जन्म प्रमाण पत्र बनवा दिया. इसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर बच्ची का आधार कार्ड भी बनवा लिया गया.

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निजी अस्पताल में 30 हजार में बेचा गया नवजात

जांच के दौरान पुलिस को एक और मामला मिला, जिसमें 29 सितंबर 2024 को एलुरु के एक निजी अस्पताल में एक नवजात बच्चे को करीब 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था. पुलिस के अनुसार, इस मामले में अस्पताल की एक नर्स की भूमिका भी सामने आई है.

पुलिस ने इस मामले में अब तक छह लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें बच्चा खरीदने वाला कपल, दलाल और अन्य शामिल हैं. सभी के खिलाफ मानव तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 और 87 के तहत बच्चों की खरीद-फरोख्त के आरोप भी लगाए गए हैं.

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) सीएच. सूर्य चक्रवेणी ने बताया कि रिकॉर्ड की जांच के दौरान कुछ संदिग्ध चीजें मिली थीं. इनमें ऐसे बच्चों का जिक्र था, जिनका जन्म 24 सितंबर को एक निजी अस्पताल में दर्ज किया गया था. उन्होंने बताया कि जांच में एक महिला का नाम सामने आया है, जो पहले भी विजयवाड़ा समेत कई जिलों में शिशु तस्करी के मामलों में आरोपी रह चुकी है. फिलहाल वह राजमहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में बंद है.

बड़े नेटवर्क की आशंका

अधिकारियों का कहना है कि अभी तक दो बच्चों की अवैध बिक्री का पता चला है, लेकिन आशंका है कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 1 दिसंबर को बेची गई बच्ची को आखिर कहां से लाया गया था, इस पूरे गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं? अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गहन जांच जारी है.

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