सोशल मीडिया पर इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) की चर्चा है, जिसका नारा है 'सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी'. कोई इसे नया राजनीतिक संगठन बता रहा है तो कोई एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक प्रयोग मान रहा है. लेकिन CJP ने खुद को 'युवाओं का, युवाओं के लिए और युवाओं द्वारा बनाया गया राजनीतिक मंच' बताया है. पार्टी ने ऑनलाइन सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया है और खुद को
महज दो दिन पुरानी इस पार्टी ने दावा किया है कि उसके 40,000 से ज्यादा सदस्य बन चुके हैं. सोशल मीडिया पर हजारों लोग इसे फॉलो कर रहे हैं. इतना ही नहीं, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने भी मजाकिया अंदाज में इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है. CJP खुद को 'मौजूदा व्यवस्था से निराश लोगों की आवाज' बता रही है.कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान AAP की सोशल मीडिया कैंपेनिंग में काम किया था. महुआ मोइत्रा ने CJP की पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि वह भी 'एंटी-नेशनल पार्टी' की कार्ड होल्डर सदस्य होने के साथ इस पार्टी में शामिल होना चाहती हैं. इसके जवाब में CJP ने लिखा, 'लोकतंत्र को आप जैसे फाइटर की जरूरत है, महुआ मोइत्रा, आपका स्वागत है.' वहीं कीर्ति आजाद ने पूछा कि पार्टी में शामिल होने के लिए क्या योग्यता चाहिए. इस पर CJP ने जवाब दिया, '1983 वर्ल्ड कप जीतना ही काफी है.'
पार्टी के नाम 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर भी चर्चा है. माना जा रहा है कि यह नाम हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी पर आधारित है, जिसमें उन्होंने कहा था, 'कुछ युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और वे मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं.' हालांकि बाद में सीजेआई ने सफाई भी दी थी और कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया.
इस पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कॉकरोच जनता पार्टी का संस्थापक होने के नाते मैं इस स्पष्टीकरण की निंदा करता हूं.' पार्टी ने अपना AI-जनरेटेड एंथम भी जारी किया है, जिसकी लाइन है- 'We are Cockroach Party, we are children of a burning city'. CJP ने अब अपना पहला वर्चुअल 'Gen-Z Convention' आयोजित करने की योजना बनाई है. पार्टी ने युवाओं से इसे आयोजित करने में मदद करने की अपील की है.
पार्टी ने मजाकिया अंदाज में सदस्यता की योग्यता भी बताई है- 'बेरोजगार होना, लेज़ी होना, हमेशा ऑनलाइन रहना और प्रोफेशनल तरीके से शिकायत करने की क्षमता होना.' हालांकि व्यंग्य के साथ-साथ पार्टी कुछ गंभीर राजनीतिक मुद्दे भी उठा रही है. उसने NEET और CBSE जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई है. पार्टी ने मांग की है कि CBSE रीचेकिंग फीस खत्म करे और कहा कि छात्रों से बोर्ड की गलती के लिए पैसे लेना भ्रष्टाचार है.
कॉकरोच जनता पार्टी के पांच सूत्रीय घोषणापत्र में कई बड़े राजनीतिक सुझाव भी शामिल हैं. पार्टी ने मांग की है कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी मुख्य न्यायाधीश को राज्यसभा सीट न दी जाए. इसके अलावा यदि किसी वैध वोटर का वोट हटाया जाता है तो मुख्य चुनाव आयुक्त पर यूएपीए के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. पार्टी ने संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने, मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और दल बदलने वाले सांसदों-विधायकों पर 20 साल का चुनावी प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है.
सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने CJP को सुझाव दिया कि वह खुद को आरटीआई के अंडर लाए, गुप्त चंदा न ले और कभी 'Cockroach CARES Fund' न बनाए. पार्टी ने उनके सभी सुझाव स्वीकार करने की बात कही है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि कॉकरोच जनता पार्टी वास्तव में राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्टर होगी या सिर्फ सोशल मीडिया पर एक सैटेरिकल मूवमेंट बनकर रह जाएगी. लेकिन इतना जरूर है कि भारतीय राजनीति के गंभीर माहौल के बीच CJP ने सोशल मीडिया पर नई बहस और दिलचस्प चर्चा जरूर छेड़ दी है.
सुशीम मुकुल