'बांग्लादेश में दलितों पर हो रहा अत्याचार', मायावती ने कांग्रेस पर 'मुस्लिम वोट' के लिए चुप्पी के लगाए आरोप

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता जताई है, कांग्रेस पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया. बीजेपी विधायक नितेश राणे ने हिंदू रैली की योजना बनाई, जो बांग्लादेशी हिंदुओं को समर्थन का संदेश देगी. यह मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए भी चुनौती बन गया है.

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बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो) बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने एक बयान में बांग्लादेशी हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में बड़ी संख्या में हिंदू, विशेषकर दलित और कमजोर वर्ग के लोग, अपराधों के शिकार हो रहे हैं. मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर चुप है और वह केवल मुस्लिम वोटों के लिए ध्यान आकर्षित कर रही है.

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मायावती ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और उनके समर्थकों को एक ही सिक्के के दो पहलू करार दिया. उन्होंने कहा कि इन दलों ने देश के सामाजिक-राजनीतिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया है. इस स्थिति में, उन्होंने बीजेपी-नीत केंद्र सरकार से अपने कर्तव्य का पालन करने की अपील की ताकि बांग्लादेशी दलितों को और नुकसान न उठाना पड़े. उन्होंने मांग की कि इन लोगों को उचित बातचीत के माध्यम से भारत वापस लाया जाना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस की गलतियों के कारण ये लोग पीड़ित हो रहे हैं.

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10 दिसंबर को महाराष्ट्र में निकाली जाएगी रैली

इस बीच, महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक नितेश राणे ने एक हिंदू रैली की योजना की घोषणा की है. उन्होंने कहा, "10 दिसंबर को हम पूरे महाराष्ट्र में रैली निकालेंगे. हम हिंदू बनकर सड़कों पर उतरेंगे और अपनी ताकत दिखाएंगे. यह रैली बांग्लादेशी हिंदुओं को यह संदेश देने के लिए है कि वे अकेले नहीं हैं. हिंदू अब अत्याचार सहन नहीं करेंगे. इस संदेश के साथ हम रैली करेंगे."

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का दावा

इस घटनाक्रम ने देशभर में सामाजिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. भारत के अंदर और बाहर हिंदुओं की स्थिति पर बदलती राजनीतिक रणनीति एक अहम चर्चा का विषय बन गई है. बसपा की चिंताएं और बीजेपी की योजनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि ये मुद्दे अगले कुछ दिनों में और भी तूल पकड़ सकते हैं. मसलन, आने वाले समय में अन्य पार्टियों को भी अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की जा सकती है.

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