आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी पहले से ही दबाव में है. और अब राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को एक बार फिर सतह पर ला दिया है.
AAP ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर राघव चड्ढा को पद से हटा दिया है. उनकी जगह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है. इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक AAP ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र भी लिखा जिसमें चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिए जाने की बात कही गई.
पार्टी का क्या कहना है?
नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह पार्टी की एक सामान्य प्रोसेस है और इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि AAP एक लोकतांत्रिक पार्टी है और राघव चड्ढा को फ्यूचर में राज्यसभा में बोलने का समय दिया जाएगा. पंजाब चुनाव में चड्ढा का क्या रोल होगा यह पार्टी तय करेगी.
लेकिन असली सवाल यह है
जब किसी नेता को इस तरह अचानक हटाया जाए, बोलने का समय भी न दिया जाए और फिर ऊपर से कहा जाए कि "कोई खास वजह नहीं है". तो यह बात गले नहीं उतरती. राजनीति में इस तरह के कदम बिना वजह नहीं उठाए जाते.
राघव चड्ढा AAP के सबसे चमकदार और मीडिया-फ्रेंडली चेहरों में से एक रहे हैं. पंजाब से राज्यसभा पहुंचे, अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी की. पार्टी में उनकी छवि एक स्मार्ट और आक्रामक नेता की थी. ऐसे नेता को अचानक हाशिए पर धकेलना साफ बताता है कि पार्टी के अंदर कुछ तो चल रहा है.
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BJP में जाने की अफवाह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब मित्तल से पूछा गया कि क्या चड्ढा BJP में जा सकते हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. लेकिन राजनीति में जब किसी नेता का इस तरह अपमान होता है तो ऐसी अफवाहें हवा में नहीं आतीं. दिल्ली में हार के बाद AAP के कई नेता पहले से ही बेचैन हैं.
बड़ी तस्वीर क्या है?
दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की जबरदस्त हार के बाद पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है. अरविंद केजरीवाल की छवि को शराब घोटाले ने काफी नुकसान पहुंचाया है. ऊपर से अब पंजाब चुनाव की तैयारी करनी है जो पार्टी के पास बचा हुआ सबसे बड़ा किला है.
ऐसे में पार्टी के भीतर यह तय करने की कोशिश हो रही है कि आगे कौन से नेता को कितनी अहमियत दी जाए. राघव चड्ढा का हटाया जाना इसी बड़ी उठापटक का एक हिस्सा लगता है.
AAP फिलहाल इसे "सामान्य प्रोसेस" कह रही है. लेकिन राजनीति में जो दिखता है वो अक्सर असली नहीं होता और जो असली होता है वो दिखता नहीं. आने वाले दिनों में राघव चड्ढा का अगला कदम ही बताएगा कि यह वाकई सामान्य था या कुछ और.
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