पहले से खतरनाक हुआ कोरोना, बाबरी विध्वंस का आज आएगा फैसला, सुनें 'आज का दिन'

हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि देश की एक बड़ी आबादी अब भी कोरोना की ज़द में है. ये खुलासा दूसरी सीरो सर्वे रिपोर्ट में हुआ है. इससे पहले भी एक सीरो सर्वे कराया गया था लेकिन इस बार के नतीजे पहले से ज़्यादा चौंका रहे हैं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

कोरोना टला नहीं और जितने वक्त से हम इसके साथ हैं उसे कोरोना काल कहने लगे हैं. उम्मीद कर रहे हैं वैक्सीन आए.. ये दौर किसी तरह ख़त्म हो मगर आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि ये महामारी पहले से ज़्यादा ख़तरनाक हुई है. अब तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मान लिया है कि खतरा बरकरार है. हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि देश की एक बड़ी आबादी अब भी कोरोना की ज़द में है. ये खुलासा दूसरी सीरो सर्वे रिपोर्ट में हुआ है. इससे पहले भी एक सीरो सर्वे कराया गया था लेकिन इस बार के नतीजे पहले से ज़्यादा चौंका रहे हैं. तो क्या कह रहा है देश का दूसरा सीरो सर्वे, ये जाना हमने मिलन शर्मा से. मिलन हेल्थ से जुड़ी ख़बरें कवर करती हैं. कोरोना से जुड़ी स्टडी और रिसर्च पर नज़र भी रखती हैं.

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अयोध्या में मंदिर तो ज़ोरशोर से बन रहा है लेकिन बाबरी विध्वंस मामले में अब तक फैसला नहीं आया था. आज आ रहा है. सुबह ग्यारह बजे. 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ हुआ उस पर सीबीआई की विशेष अदालत ये फैसला सुनाने जा रही है. देशभर की नज़र होगी और इसलिए भी होगी क्योंकि देश के कई नामी नेता इस मुकदमे में फंसे हैं. पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, एमपी की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, बीजेपी के सीनियर नेता विनय कटियार समेत कुल 32 आरोपी हैं जिन्हें आज की तारीख का इंतज़ार था. अदालत बताएगी कि बाबरी गिरी थी तो उसे साज़िशन ढहाया गया था या फिर वो कारसेवकों का गुस्सा भर था. आप सोचिए कि मामला कितना लंबा खिंचा होगा कि उन 49 में से 17 लोगों का निधन हो चुका है जिन पर मुकदमा दर्ज हुआ था. तो मुकदमा कैसे यहां तक पहुंचा… कैसा रहा ये सफर बता रहे हैं हमारे सहयोगी संजय शर्मा. संजय अदालती मामलों पर नज़र रखते हैं.  

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मई से भारत-चीन की सीमा पर तनातनी है. ख़त्म होने की संभावना अब भी कम है. अब तो चीन के विदेश मंत्रालय ने बात ही ऐसी कह दी है. बोल रहे हैं कि बीजिंग एलएसी की अवधारणा के बारे में 1959 का रुख मानता है. इस पर भारत ने जवाब दिया है कि उसने कभी भी इस एकतरफा एलएसी को नहीं माना है. दूसरी तरफ पाकिस्तान है. उसने अलग मोर्चा खोल रखा है. खासतौर पर कश्मीर से धारा 370 हटी तब से वो भी कुछ कर दिखाने को बेताब है. फिलहाल तो वो मिड नवंबर में गिलगिट-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की कोशिश में है. इसके बाद वो इस इलाके को पूर्ण प्रांत बनाने की तरफ बढ़ेगा जो ज़ाहिर है भारत को मंज़ूर नहीं होगा क्योंकि इसे हम विवादित इलाका मानते हैं. भारत ने विरोध कर भी दिया है. कहा है कि इस्लामाबाद अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में परिवर्तन नहीं कर सकता है. इन दोनों ही मसलों को समझेंगे. समझा रही हैं इंडिया टुडे टीवी की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन. 

और ये भी जानिए कि 30 सितंबर की तारीख इतिहास के लिहाज़ से अहम क्यों है.. क्या घटनाएं इस दिन घटी थीं. अख़बारों का हाल भी पांच मिनटों में सुनिए और खुद को अप टू डेट कीजिए. इतना कुछ महज़ आधे घंटे के न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में नितिन ठाकुर के साथ.  

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