क्या भारत को 3 साल के लिए उधार में मिल रहा है शिवाजी का 'वाघ नख'? इतिहासकार का दावा

इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने दवा किया है कि लंदन स्थित विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम से जिस वाघ नख को तीन साल के लिए 30 करोड़ रुपये के लोन एग्रीमेंट पर महाराष्ट्र लाया जा रहा है, वह असली नहीं है. उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस वाघ नख से अफजल खान को मारा था, वह सतारा में ही रखा है. हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने उनके इस दावे का खंडन किया है.

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छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख महाराष्ट्र सरकार लंदन के म्यूजियम से वापस ला रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर) छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख महाराष्ट्र सरकार लंदन के म्यूजियम से वापस ला रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 09 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के वाघ नख (बाघ के पंजे जैसा लोहे का हथियार) को लंदन से भारत वापस लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल विक्टोरिया एंड अल्बर्ट (V&A) म्यूजियम के साथ एक एमओयू साइन किया था. राज्य सरकार का दावा था कि यह वही 'वाघ नख' है, जिसकी मदद से छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1659 में अपने प्रतिद्वंद्वी बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान का वध किया था. 

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महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार और लंदन स्थित वीएंडए म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. ट्रिस्ट्रॉम हंट ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 'वाघ नख' को तीन वर्ष के लिए महाराष्ट्र सरकार को सौंपा गया. इसके बदले महाराष्ट्र सरकार वीएंडए म्यूजियम को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. अब इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने दावा किया है कि लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट में रखा 'वाघ नख' असली नहीं है. उनका कहना है कि महान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा इस्तेमाल किया गया 'वाघ नख' अब भी राज्य के सतारा में ही मौजूद है. 

'वाघ नख' छत्रपति शिवाजी महाराज की दृढ़ता और वीरता का प्रतीक है. इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने कोल्हापुर में मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा, 'वाघ नख को तीन साल के लिए 30 करोड़ रुपये के लोन एग्रीमेंट पर महाराष्ट्र लाया जा रहा है. मेरे पत्र के जवाब में, लंदन स्थित विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम ने कहा है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि यह वही वाघ नख है जिसका इस्तेमाल छत्रपति शिवाजी महाराज ने अफजल खान को मारने के लिए किया था.'

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इंद्रजीत सावंत ने दावा किया कि मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र की जो टीम लोन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने के लिए लंदन गई थी, विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम ने उनको यह जानकारी डिस्प्ले करने के लिए कहा है. असली वाघ नख सतारा में ही है. एक अन्य शोधकर्ता, पांडुरंग बालकावड़े ने एक मराठी टीवी चैनल को बताया कि प्रताप सिंह छत्रपति ने 1818 और 1823 के बीच जेम्स ग्रांट डफ (ब्रिटिश सैनिक और इतिहासकार) को अपने निजी संग्रह से 'वाघ नख' दिया था. उन्होंने कहा कि डफ के वंशजों ने इसे विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम को सौंप दिया था.

हालांकि, इंद्रजीत सावंत का दावा इसके उलट है. उनका कहना है कि ग्रांट डफ के भारत छोड़ने के बाद भी प्रताप सिंह छत्रपति ने कई लोगों को 'वाघ नख' दिखाया था. इस मुद्दे पर एकनाथ शिंदे सरकार में मंत्री शंभुराज देसाई ने कहा कि यह सर्वविदित है कि 'भवानी तलवार' और 'वाघ नख' लंदन में हैं. हमारी सरकार ने तथ्यों का सत्यापन करने के बाद ही एमओयू पर हस्ताक्षर किया है. यदि इतिहासकारों के पास कोई अन्य राय है, तो हम उनसे बातचीत करेंगे. महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार ने कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है कि छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी सभी कलाकृतियों और चीजों को संरक्षित, प्रचारित और प्रदर्शित किया जाएगा. इससे लोग प्रेरित होंगे. 

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