मुश्किल 'घड़ी' की उत्तराधिकारी… जानें सुनेत्रा पवार का राजनीतिक सफर

पिछले दो साल सुनेत्रा पवार के लिए बड़े उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. 61 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखने, लोकसभा चुनाव हारने, राज्यसभा पहुंचने और अब महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने तक उनका सफर तेजी से बदला है.

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लो-प्रोफाइल सामाजिक कार्यकर्ता से सत्ता के केंद्र तक पहुंचीं सुनेत्रा पवार (Photo: PTI) लो-प्रोफाइल सामाजिक कार्यकर्ता से सत्ता के केंद्र तक पहुंचीं सुनेत्रा पवार (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST

महाराष्ट्र को पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिल गई है. शनिवार शाम को अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने लोकभवन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना पहले से तय नहीं था, पति अजित की प्लेन क्रैश में निधन के बाद ऐसी राजनीतिक परिस्थितियां बन गईं. दिवंगत अजित के न होने की वजह से यह पद खाली हो गया था. 

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पिछले दो साल सुनेत्रा पवार के जीवन और राजनीति में बड़े बदलाव लेकर आए हैं. 61 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखने वाली सुनेत्रा पवार अब महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन कर इतिहास रच दिया है.  

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक, लेकिन खुद रहीं दूर

सुनेत्रा पवार का जन्म 1963 में तत्कालीन उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में एक मराठा परिवार में हुआ. उनके पिता बजीराव पाटिल और भाई पद्मसिंह बाजीराव पाटिल राजनीति में सक्रिय रहे. पद्मसिंह पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और एनसीपी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे. 

सुनेत्रा लंबे समय तक प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रहीं, हालांकि वे बारामती में अजित पवार के प्रचार में कभी-कभी नजर आती थीं.

सामाजिक कार्यों से बनाई अलग पहचान

राजनीति के बजाय सुनेत्रा पवार ने सामाजिक कार्यों पर अपना ज्यादा फोकस रखा. बारामती के केटवाड़ी गांव में उन्होंने स्वच्छता अभियान चलाया और खुले में शौच की समस्या पर काम किया, जिससे गांव को राज्य का पहला ‘इको विलेज’ घोषित किया गया. यहां सोलर स्ट्रीट लाइट, बायोगैस यूनिट और जैविक खेती को बढ़ावा मिला. उन्होंने जल प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अभियानों में भी योगदान दिया. इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं के रोजगार के लिए बारामती में टेक्सटाइल पार्क शुरू किया और विद्या प्रतिष्ठान में सक्रिय रहीं.

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2019 में दिवंगत अजित पवार अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार के साथ मुंबई के विधान भवन में (Photo: PTI)

लोकसभा हार, राज्यसभा नामांकन और बड़ा मोड़

साल 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर एनसीपी को तोड़ा और बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के साथ सरकार बनाई, उसी समय सुनेत्रा पवार की राजनीति में एंट्री को लेकर चर्चाएं शुरू हुई थीं. तब उन्होंने साफ कहा था कि राजनीति में उनकी कोई रुचि नहीं है. लेकिन 2024 में उन्होंने बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा, जहां उन्हें सुप्रिया सुले से हार मिली. इसके बाद उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया. 

यह भी पढ़ें: सुनेत्रा पवार का राजतिलक... बनीं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, PM मोदी बोले- अजित दादा के सपनों को पूरा करेंगी

25 जून, 2024 को पत्नी सुनेत्रा पवार ने राज्यसभा के मेंबर के तौर पर शपथ ली थी (Photo: PTI)

अजित पवार के निधन के बाद सर्वसम्मति से चयन

अजित पवार के प्लेन क्रैश में निधन के बाद एनसीपी विधायक दल ने उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना. फिर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई. शपथग्रहण सादगीपूर्ण था, जिसमें बेटे जय पवार और अन्य परिवारजन उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति गठबंधन में एनसीपी के फैसले का समर्थन किया है.

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विवाद भी जुड़े रहे नाम के साथ

सुनेत्रा का नाम कुछ विवादों से जुड़ा. 2009 में भाई पद्मसिंह हत्या मामले के आरोपी बने, जो अदालत में लंबित है. महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक मामले में ईडी ने उनकी संपत्तियां अटकीं, लेकिन 2024 में मुंबई पुलिस ने क्लीन चिट दी.

नई भूमिका में बड़ी चुनौतियां

डिप्टी सीएम और एनसीपी विधायक दल की नेता के रूप में सुनेत्रा के सामने कई चुनौतियां हैं. पार्टी में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ संतुलन बनाना होगा. महायुति गठबंधन के बदलते समीकरणों और एनसीपी के दोनों गुटों (अजित गुट और शरद पवार गुट) के संभावित एकीकरण के बीच पार्टी को दिशा देनी होगी. राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर वे पूरी तरह से राज्य राजनीति में सक्रिय हो गई हैं.

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