'अजित पवार के उत्तराधिकारी पर अभी चर्चा अमानवीय, यह शोक संवेदना का समय', बोले संजय राउत

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अजित पवार के निधन के तुरंत बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर चल रही चर्चाओं को अमानवीय बताया है. उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति या पद की बात करने का नहीं, बल्कि शोक व्यक्त करने का है.

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शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत. (File Photo: PTI) शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद उनके उत्तराधिकारी की बात करना अमानवीय है. राउत ने कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि शोक और संवेदना व्यक्त करने का है.

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'नेतृत्व के मुद्दे पर अभी बात करना अमानवीय है. अगर किसी ने यह सवाल उठाया है, चाहे वह मंत्री हो या विधायक, तो उसमें इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं है. एक महिला ने अपने पति को खोया है. सुनेत्रा पवार की आंखों में अब भी आंसू हैं, और लोग सत्ता और पद की बातें कर रहे हैं.' बता दें कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार (66) का 28 जनवरी की सुबह पुणे जिले के बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया. 

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यह भी पढ़ें: अजित पवार के बिना NCP विलय? बारामती की सबसे बड़ी पॉलिटिकल ‘सुलह‘ पर कई सवाल

इस हादसे ने न सिर्फ एनसीपी बल्कि पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. उनके निधन के अगले ही दिन पार्टी के भीतर से कुछ नेताओं की ओर से यह मांग उठी कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. कुछ नेताओं ने तो यह भी सुझाव दिया कि सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए. सुनेत्रा पवार 2024 का लोकसभा चुनाव बारामती से हार चुकी हैं और फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं. 

अजित पवार स्वयं बारामती विधानसभा सीट से विधायक थे और महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे. उनके आकस्मिक निधन से एनसीपी में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है और राज्य की राजनीति में अनिश्चितता बढ़ गई है. इसी बीच, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और एनसीपी के संभावित विलय को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं. हालांकि, संजय राउत ने स्पष्ट किया कि इस समय ऐसे किसी भी राजनीतिक विमर्श से बचना चाहिए और दिवंगत नेता को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि देना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.

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