लापरवाही से जो कोरोना मरीज मरे, उनके परिवारों को मुआवजे पर रुख साफ करे महाराष्ट्र सरकार: बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से उन परिवारों के मुआवजे के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है, जिन परिवारों के कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों की मौत सरकार/नागरिक निकायों के अस्पतालों में आपराधिक लापरवाही की वजह से हुई.

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बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका पर हुई सुनवाई (फाइल फोटो) बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका पर हुई सुनवाई (फाइल फोटो)

विद्या

  • मुंबई,
  • 05 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 9:15 PM IST
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार को दिए निर्देश
  • लापरवाही की वजह से हुई मौतों पर रुख स्पष्ट करने को कहा
  • बीजेपी विधायक आशीष शेलार की ओर से दायर की गई याचिका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से उन परिवारों के मुआवजे के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है, जिन परिवारों के कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों की मौत सरकार/नागरिक निकायों के अस्पतालों में आपराधिक लापरवाही की वजह से हुई.

अदालत के सामने 11 मामले हैं जिनका जिक्र बीजेपी विधायक आशीष शेलार की ओर से दायर याचिका में किया गया. हाई कोर्ट में शेलार की पैरवी करने वाले वकील अक्षय पई ने बताया, "अदालत ने राज्य से कहा कि वो आगे हलफनामा दाखिल करे जिसमें हमारी ओर से आरोपित सभी घटनाओं के बारे में बताए, क्योंकि उन्होंने सभी घटनाओं से डील नहीं किया है. साथ ही पूछा है कि राज्य की ओर से लापरवाही के कारण जिन पीड़ितों की मौत हुई है उनके परिवारों को मुआवजा देने के लिए राज्य की ओर से क्या व्यवस्था की जाएगी."

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अदालत ने ये भी कहा कि राज्य को भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कोविड मरीजों के शवों के प्रबंधन को लेकर 15 मार्च 2020 को जारी गाइडलाइंस को अमल में लाना चाहिए. साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से सितंबर में दिए फैसले में जो अन्य गाइडलाइंस सुझाई गई थीं, उन्हें भी राज्य अमल में लाए. कोर्ट ने शेलार को महाराष्ट्र राज्य में शवों के प्रबंधन के लिए अन्य गाइडलाइंस सुझाने की स्वतंत्रता भी दी.

शेलार ने अपनी याचिका में उस कथित खराब प्रबंधन को उजागर किया, जो खास तौर पर मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य ग्रामीण हिस्सों में नागरिक अस्पतालों में हो रहा था. शेलार ने अपनी याचिका में उस वायरल वीडियो की ओर इंगित किया जिसमें मुंबई के सायन में स्थित सिविक अस्पताल में शवों के बीच लोगों का इलाज होते दिख रहा था.

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शेलार के हलफनामे में दस अन्य मामलों में, मई 2020 के एक केस की ओर भी इंगित किया गया है, जिसमें एक महिला एंबुलेंस बुलाने के कड़ी मशक्कत करती रही और उसे शव को दफनाने के लिए ले जाने को 10 घंटे बाद ही एंबुलेंस मिल सकी. एक अन्य मामला जलगांव का है, जहां एक महिला 8 दिनों तक अस्पताल में बिना इलाज के रही लेकिन बाद में वॉशरूम में मृत पाई गई. इस घटना में अस्पताल के डीन और दो अन्य डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर एक और केस का याचिका में हवाला दिया गया. ये घटना 62 साल के एक मरीज को लेकर थी, जिसने अस्पताल में व्हीलचेयर पर इलाज का इंतज़ार करते करते दम तोड़ दिया. ऐसे और भी कई केसों का हवाला दिया गया है, जहां या तो मरीज गायब हो गए या कोविड-19 मरीजों के शव दूसरे ही परिवारों को सौंप दिए गए.

 

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