पुणे में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से हड़कंप... 5 महीने में 21 केस, 9.21 करोड़ की ठगी, हाई-प्रोफाइल प्रोफेशनल्स बने शिकार

पुणे में जनवरी से मई 2025 के बीच 21 डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड केस सामने आए, जिनमें 9.21 करोड़ रुपये की ठगी हुई. पीड़ितों में शिक्षक, इंजीनियर, IT प्रोफेशनल तक शामिल हैं. आरोपी खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं. पुलिस ने साइबर टीम बनाई है और 1930 हेल्पलाइन शुरू की है.

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प्रतीकात्मक फोटो. प्रतीकात्मक फोटो.

ओमकार

  • पुणे,
  • 09 जून 2025,
  • अपडेटेड 8:31 PM IST

पुणे में एक बार फिर साइबर ठगों ने सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती दे दी है. जनवरी 2025 से मई 2025 के बीच 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' के 21 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुल मिलाकर 9.21 करोड़ रुपये की ठगी की गई है. इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुणे पुलिस ने एक विशेष साइबर टीम का गठन किया है. इस स्कैम में खास बात यह है कि आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर, प्रोफेसर और शिक्षकों जैसे पढ़े-लिखे लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं.

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क्या है 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम?

इस स्कैम में साइबर अपराधी खुद को CBI, पुलिस या अन्य एजेंसियों के अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन कॉल करते हैं. वे पीड़ित को बताते हैं कि उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, सिम कार्ड दुरुपयोग या अन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. डर और भ्रम की स्थिति में लोग घबरा कर उनकी बातों में आ जाते हैं. फिर उन्हें पैसों का ट्रांजेक्शन करने के लिए मजबूर किया जाता है.

यह भी पढ़ें: बुजुर्ग महिला, डिजिटल अरेस्ट और 2.89 करोड़ की ठगी... मुंबई पुलिस ने ऐसे वापस दिलाई इतनी रकम

हाई-प्रोफाइल ठगी के मामले

एक बड़ा मामला तब सामने आया जब मुंबई के एक व्यापारी से 6.3 करोड़ रुपये ठग लिए गए. ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर व्यापारी को डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया और मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसा दिया. जांच के बाद पुणे साइबर पुलिस ने 28 वर्षीय तुषार हरीशचंद्र वजानत्री को गिरफ्तार किया. वह म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाला बैंक खाता) संचालित कर रहा था. दिलचस्प बात यह है कि उसकी पत्नी उस गांव की चुनी हुई सरपंच है.

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पुलिस की प्रतिक्रिया और कदम

पुणे पुलिस ने जनता को जागरूक करने के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन जारी की है जो 24×7 काम करती है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त पंकज देशमुख के अनुसार, पहले कुछ घंटे (गोल्डन आवर्स) किसी भी साइबर क्राइम में महत्वपूर्ण होते हैं. उन्होंने बताया कि अब पुलिस अधिकारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे इन मामलों को बेहतर ढंग से सुलझा सकें.

देशमुख ने यह भी बताया कि ठग VPN और फर्जी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी लोकेशन और पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. लेकिन पुलिस अब इन म्यूल अकाउंट संचालकों को पकड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है.

बढ़ते आंकड़े और चिंताजनक स्थिति

पिछले वर्ष 2024 में पुणे में 81 डिजिटल अरेस्ट केस दर्ज किए गए थे, जिसमें 49.76 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी. जबकि 2022 में इस तरह का कोई मामला नहीं था. 2025 की शुरुआत में ही 21 केस सामने आ जाना यह दर्शाता है कि यह स्कैम तेजी से फैल रहा है. पीड़ितों में बुजुर्ग नागरिक, विशेषकर विमान नगर, बंड गार्डन, डेक्कन और सहकारनगर क्षेत्रों के लोग अधिक हैं. इन इलाकों में ठगों ने सबसे अधिक कॉल और ठगी की घटनाएं की हैं.

सियासी बयानबाजी

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इस स्कैम को लेकर विपक्ष ने भी सरकार और रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. राहुल गांधी, शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और राज ठाकरे ने इसे सरकार की विफलता और आम जनता की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बताया है.

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