एल्गार परिषद केस: मुबंई नहीं छोड़ सकते वरवर राव, बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्थायी मेडिकल बेल ठुकराई

वरवर राव ने अपने घर तेलंगाना जाने के लिए स्थायी बेल की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. हालांकि, कोर्ट ने आत्मसमर्पण का वक्त 3 महीने और बढ़ा दिया है.

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वरवर राव वरवर राव

विद्या

  • मुंबई,
  • 13 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST
  • राव ने कोर्ट से स्थायी जमानत की मांग की थी
  • जमानत लेकर अपने गृह राज्य तेलंगाना जाना चाहते हैं राव

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेलुगु कवि और एल्गार परिषद केस के आरोपी वरवर राव की स्थायी मेडिकल बेल की याचिका ठुकरा दी है. उनके मुंबई छोड़ने पर लगी रोक भी बरकरार रखी गई है. राव ने अपने घर तेलंगाना जाने के लिए कोर्ट से स्थायी जमानत की मांग की थी. बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एसबी शुक्रे और जीए संदीप की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की. हालांकि, बेंच ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए दिए गए समय को 3 महीने और बढ़ा दिया है. बता दें कि राव पर UAPA के तहत केस दर्ज है.

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पीठ ने कहा कि राव के मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए आत्मसमर्पण का समय बढ़ाया गया है. ये कहते हुए जस्टिस शुक्रे ने राव की चुटकी भी ली. उन्होंने कहा 'आप अपनी किस्मत आजमा सकते हैं और उच्च शक्ति के पास जा सकते हैं'.

दरअसल, एल्गार परिषद मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित हुए सम्मेलन में, कथित भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इसके अगले ही दिन, भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी. पुलिस के मुताबिक, यह सम्मेलन उन लोगों ने आयोजित किया था, जिनके माओवादियों से कथित तौर पर संबंध हैं.

2018 में पुलिस ने किया था गिरफ्तार

इस केस में राव को 2018 में पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में मामला एनआईए को सौंप दिया गया. एनआईए की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने कहा कि स्थायी जमानत और तेलंगाना जाने की छुट्टी के लिए राव का आवेदन पहले की बेंच खारिज कर चुकी है. उन्होंने तर्क दिया कि राव को सीधे हाईकोर्ट में आने से पहले सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए था. इसलिए स्थायी जमानत के लिए रिट याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है. 

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जेल में इलाज के लिए डॉक्टर उपलब्ध- SG

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राव की अंतरिम जमानत की अवधि 6 महीने पहले खत्म हो चुकी है. इसके बाद राव ने मेडिकल जमानत की अर्जी दी थी. तब मिला 6 महीने का समय भी बीत चुका है. उन्होंने बताया कि नानावटी अस्पताल के डॉक्टरों ने राव की जांच कर अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी थी. सिंह ने कहा कि अगर राव को इलाज की जरूरत पड़ती है, तो जेल अधिकारी उनकी देखभाल करने के लिए मौजूद हैं. जरूरत पड़ने पर मरीज को जेजे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाता है.

इकट्ठा की जाएगी महाराष्ट्र की जेलों की जानकारी 

पीठ ने कहा कि मुंबई की तलोजा जेल की स्थिति उनके संज्ञान में लाई गई. सत्यापन के बाद अदालत ने कहा कि उन्हें कुछ कमियां मिलीं. अदालत ने जेल महानिरीक्षक को तलोजा जेल और महाराष्ट्र भर की दूसरी जेलों से जानकारी इकट्ठा करने के निर्देश दिए. आईजी जेल को 30 अप्रैल तक रिपोर्ट जमा करनी है और अदालत केवल यह देखना चाहती है कि अब से जेलों में चिकित्सा के बुनियादी ढांचे की कमियों को जमानत याचिकाओं के आधार के रूप में ना गिनाया जाए.

आत्मसमर्पण की तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे राव

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84 साल के राव ने एक हस्तक्षेप आवेदन के अलावा हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं. जिसके द्वारा वह जेल में आत्मसमर्पण करने के समय को 6 महीने के लिए बढ़ाने की मांग कर रहे थे. उच्च न्यायालय में अधिवक्ता आर सत्यनारायणन के माध्यम से दायर उनकी दो याचिकाओं में कहा गया है कि उन्हें अपने गृह नगर हैदराबाद जाने की अनुमति दी जाए और उन्हें स्थायी चिकित्सा जमानत दी जाए.

राव की दलील, मुंबई में रहना खर्चीला

राव ने नई याचिका में कहा था कि मुंबई में रहना उन पर आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है और यहां तक कि चिकित्सा सुविधा भी उन्हें भारी पड़ रही है, जो हैदराबाद में उनके लिए सस्ती होगी. राव की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने तर्क दिया कि बीमारियों के साथ मुंबई में रहना महंगा है. उन्होंने कहा कि राव हर महीने लगभग 96,000 रुपये खर्च कर रहे हैं, जबकि उन्हें तेलंगाना राज्य से सिर्फ 50,000 रुपये पेंशन मिलती है.

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