महाराष्ट्र की राजनीति के धुरंधर अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं हैं. विमान हादसे ने महाराष्ट्र की सियासत के चमकते सितारे के सफर पर विराम लगा दिया. अजित पवार छह बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बने. उनके सियासी कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे महाराष्ट्र में सबसे लंबे वक्त तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले एकमात्र नेता रहे.
अजित पवार को दादा कहा जाता था, जो उनकी मजबूत सियासी पकड़ और लोगों में सम्मान के भाव को दर्शाता है. भले ही चाचा शरद पवार से अलग हुए, लेकिन अपने दम पर एक अलग सियासी जमीन तैयार करने में कामयाब रहे. अजित पवार का फलसफा यही रहा-राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन और स्थायी दोस्त नहीं होता.
इसमें कोई शक नहीं कि अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति का समीकरण बदल जाएगा. क्या अजित पवार के नेतृत्व के बिना एनसीपी संभल सकती है? क्या अजित गुट बड़े पवार की सुनेगा या फिर अपना अलग रास्ता चुनेगा? अगर एनसीपी अलग रास्ता चुनेगी तो पार्टी की कमान कौन संभालेगा? अजित पवार के देहांत ने उनकी पार्टी को इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां ये सवाल बड़ा है कि एनसीपी अब किधर जाएगी.
पत्नी संभालेंगी कमान?
चाचा शरद पवार से बगावत के बाद अजित पवार ने एनसीपी को अपनी मुट्ठी में कर लिया था. जब एनसीपी में दो फाड़ हुई तो बड़े पवार को छोड़कर ज्यादातर विधायकों को छोटे पवार ने अपने पाले में खींच लिया था. ऐसे में पार्टी के विधायक शरद पवार की तरफ लौटने की बजाय अलग रास्ता चुनते हैं तो उनका उत्तराधिकारी कौन होगा.
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क्या एनसीपी की बागडोर पत्नी सुनेत्रा संभालेंगी? क्या अजित पवार के सियासी वारिस बेटे पार्थ होंगे? क्या पार्टी के चाणक्य प्रफुल्ल पटेल संभालेंगे पार्टी? क्या दल के दूसरे कद्दावर नेता को मिलेगी कमान? अगर बात अजित पवार फैमिली की करें तो उनकी पत्नी सुनेत्रा राज्यसभा सांसद हैं. सुनेत्रा की सियासी पारी की शुरुआत साल 2024 में हुई, जब उन्होंने बारामती लोकसभा से सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा था.
भले ही वह चुनाव हार गईं, लेकिन चुनावी पारी ने उन्हें महाराष्ट्र के घर-घर तक पहुंचा दिया. माना जाता है कि चुनाव लड़कर सुनेत्रा ने अजित पवार की पत्नी की बजाय खुद को एक राजनीतिक चेहरे के तौर पर पेश किया था.
संभव है अजित पवार के निधन के बाद पत्नी सुनेत्रा पार्टी की कमान संभालें, लेकिन उनके पास न तो संगठन को चलाने का अनुभव है और न ही पार्टी कैडर और नेताओं के साथ सीधा कनेक्शन.वहीं अजित पवार जैसे करिश्माई नेतृत्व का भी अभाव है, लेकिन पार्टी की राज्यसभा सांसद हैं, लिहाजा अजित पवार के खालीपन को वह भर सकती हैं.
बेटे पार्थ को मिलेगा जिम्मा?
इस लिस्ट में दूसरा नाम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का है, जो पवार फैमिली की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं. साल 2019 में पार्थ की सियासी इनिंग शुरू हुई. उन्होंने मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. यह वही वक्त था जब शरद पवार ने चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया और पार्थ की सियासी लॉन्चिंग को परिवार के अंदर अजित पवार की तरफ से तीसरी पीढ़ी के हाथों में सियासी विरासत सौंपने की कोशिश से जोड़कर देखा गया. हालांकि पार्थ चुनाव नहीं जीत सके. पार्टी के अंदर नेताओं का एक बड़ा तबका है, जो पार्थ को अजित पवार के सियासी वारिस के तौर पर देखता है.
प्रफुल्ल पटेल भी अजित पवार के करीबी रहे
पवार फैमिली से बाहर एक तीसरा नाम प्रफुल्ल पटेल का है. अजित पवार के दोस्त, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी के रणनीतिकार. एनसीपी के अंदर अजित पवार के बाद नंबर-2 प्रफुल्ल पटेल को माना जाता है. पटेल एनसीपी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. कभी शरद पवार के करीबी रहे, फिर अजित पवार के लेफ्टिनेंट बन गए.
साल 2023 में जब एनसीपी बंटी तो प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार का दामन छोड़कर अजित पवार को चुना. प्रफुल्ल पटेल के अजित पवार के साथ आने से मजबूती मिली थी. बड़ी बात यह है कि प्रफुल्ल पटेल को पार्टी के संगठन को चलाने की गहरी समझ है. संकट के वक्त पार्टी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनका कोई मजबूत चुनावी आधार नहीं है. प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, लिहाजा अजित पवार की असमय विदाई के बाद उन्हें पूरी बागडोर सौंपी जा सकती है. फिलहाल एनसीपी अजित गुट के 40 विधायक हैं, जबकि शरद पवार गुट के पास सिर्फ 10 विधायक हैं.
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एकजुट होगा परिवार?
इन सबके इतर, पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में आ चुकी है. अजित पवार के बेटे पार्थ राजनीति में एक्टिव हैं. वहीं, शरद पवार के पोते और राजेंद्र पवार के बेटे रोहित पवार करजत विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक बने हैं. शरद पवार की इकलौती बेटी सुप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं. अभी तक पवार परिवार में राजनीतिक सिस्टम पूरी तरह से शरद पवार के हाथ में रहा है. लेकिन शरद पवार एलान कर चुके हैं कि राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राजनीति से संन्यास ले लेंगे. आपको बता दें कि इसी साल शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है.
अब सवाल यह है कि अगर पवार परिवार फिर से एक होता है, तो फिर राजनीतिक कमान किसे मिलेगी. आपको बता दें कि पार्टी में सुप्रिया सुले के बढ़ते कद की वजह से अजित पवार नाराज थे. तो क्या वह नाराजगी अब दूर हो चुकी है? अब अगर परिवार एक होता है तो क्या सुप्रिया सुले को ही पार्टी की कमान मिल जाएगी? फिलहाल अजित पवार के असमय निधन ने एनसीपी को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां आने वाले फैसले महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे.
आजतक ब्यूरो