अजित पवार के आखिरी सात मिनट की मिस्ट्री... अब तीन एंगल पर टिकी प्लेन क्रैश की जांच

अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था. जिस शख्स ने ताउम्र वक्त की पाबंदी और अनुशासन को अपनी राजनीति का हथियार बनाया, नियति ने उनके शव की पहचान भी वक्त बताने वाली उसी घड़ी से कराई.

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अजित पवार के पार्थिव शरीर को बारामती लाया जा चुका है. (Photo- ITG) अजित पवार के पार्थिव शरीर को बारामती लाया जा चुका है. (Photo- ITG)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

महाराष्ट्र की राजनीति में 'वक्त' को अपनी मुट्ठी में रखने वाले अजित पवार की जीवन-घड़ी बुधवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर हमेशा के लिए ठहर गई. बारामती एयरपोर्ट के पास हुए एक भीषण विमान हादसे ने न केवल सूबे के डिप्टी सीएम, बल्कि उनके साथ सवार चार अन्य लोगों को भी मौत की आगोश में सुला दिया. यह हादसा महज एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी चूक या साजिश, इसे लेकर अब देश की सियासत और जांच एजेंसियां आमने-सामने हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्लेन में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी.

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बुधवार सुबह जब बारामती के पास विमान के मलबे से लपटें उठ रही थीं, तब पहचान करना भी मुश्किल था. प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था. जिस शख्स ने ताउम्र वक्त की पाबंदी और अनुशासन को अपनी राजनीति का हथियार बनाया, नियति ने उनके शव की पहचान भी वक्त बताने वाली उसी घड़ी से कराई.

अजित पवार के पार्थिव शरीर को बारामती लाया जा चुका है. अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले को अस्पताल के बाहर फूट-फूटकर रोते देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे. 

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आखिरी 7 मिनटों का पूरा घटनाक्रम

शुरुआती जांच में विमान को पूरी तरह एयरवर्थी बताया गया है, पायलट अनुभवी थे, कोई MAYDAY कॉल नहीं गया, फिर भी हादसा हुआ. ऐसे में हादसे की जांच अब उन अंतिम सात मिनटों पर सिमट गई है, जब विमान बारामती की एयरस्ट्रिप के ऊपर चक्कर लगा रहा था. दरअसल, 28 जनवरी को समय सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर मुंबई से बारामती के लिए ‘लीयरजेट-45’ विमान ने उड़ान भरी. अजित पवार जिला परिषद चुनाव की रैलियों के लिए रवाना हुए थे. उड़ान सामान्य थी, मौसम में कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी.

करीब 8:37 बजे विमान पहली बार रडार से गायब हुआ. दो मिनट बाद 8:39 बजे वह दोबारा रडार पर दिखाई दिया. फ्लाइटराडार-24 के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान विमान ने ‘गो-अराउंड मैन्यूवर’ किया यानी लैंडिंग को बीच में छोड़कर दोबारा ऊंचाई ली. 8 बजकर 38 मिनट 18 सेकंड पर पहली लैंडिंग की कोशिश हुई, लेकिन खराब दृश्यता के कारण विमान रनवे पर नहीं उतर पाया. 8 बजकर 38 सेकंड 45 सेकंड पर पायलट गो-अराउंड का फैसला लेते हैं. विमान उसी दिशा में लौटता है, जिस दिशा से पहले आया था.

फिर आता है निर्णायक क्षण. 8:42 AM: पायलटों ने एटीसी को सूचित किया कि कम दृश्यता के कारण रनवे दिखाई नहीं दे रहा है. 8 बजकर 43 मिनट 11 सेकंड पर विमान दूसरी बार रनवे की ओर अप्रोच करता है. पायलट कहते हैं- 'रनवे इन साइट'. एटीसी ने रनवे-11 पर लैंडिंग की क्लीयरेंस दी. 8 बजकर 44 मिनट पर विमान रनवे के थ्रेशोल्ड (शुरुआती बिंदु) के पास पहुंचा, लेकिन अचानक गोता लगाकर बगल की खाई में जा गिरा और धमाके के साथ आग के गोले में तब्दील हो गया.

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जांच के तीन अहम एंगल: क्या हुआ था गलत?

सिविल एविएशन मंत्रालय का कहना है कि उस समय दृश्यता लगभग 3,000 मीटर थी. लेकिन प्रत्यक्षदर्शी, पायलटों का एटीसी से संवाद और फ्लाइट डेटा यह संकेत देते हैं कि रनवे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. दरअसल, बारामती का रनवे एक 'टेबल-टॉप' रनवे है, जो पहाड़ी या ऊंची सतह पर स्थित होता है. ऐसे रनवे पर लैंडिंग के दौरान अक्सर पायलटों को ऊंचाई का भ्रम हो जाता है. चूंकि यहां बड़े हवाई अड्डों की तरह इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) नहीं है, इसलिए पायलटों को पूरी तरह अपनी आंखों पर निर्भर रहना पड़ता है. 

हादसे का शिकार हुआ 'लियरजेट 45' विमान दिल्ली की VSR वेंचर्स का था. दिलचस्प बात यह है कि यही विमान सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर भी लैंडिंग के दौरान फिसल गया था. हालांकि कंपनी के मालिक वी.के. सिंह का दावा है कि विमान पूरी तरह फिट था और डीजीसीए ने उसे क्लीयरेंस दी थी, लेकिन विपक्ष अब इस 'पुराने घाव' को लेकर सवाल उठा रहा है.

AAIB और DGCA ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी है. फॉरेंसिक टीमें मलबे के हर टुकड़े, एटीसी लॉग, फ्लाइट डेटा रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं.

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अब जांच एजेंसियां (AAIB और DGCA) फिलहाल तीन मुख्य बिंदुओं पर काम कर रही हैं. 

1. मौसम और दृश्यता: पहला और सबसे बड़ा एंगल मौसम का है. सवाल यह है कि अगर दृश्यता 3,000 मीटर थी, तो पायलटों ने रनवे न दिखने की बात क्यों कही? क्या ऊपरी हवा में दृश्यता कम थी? क्या धुंध या लो-लेवल क्लाउड ने आखिरी क्षणों में भ्रम पैदा किया? सीसीटीवी फुटेज में जमीन पर दृश्यता ठीक दिखती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हवा में दृश्यता और जमीन की दृश्यता अलग-अलग होती है.

2. तकनीकी पहलू: प्रारंभिक जांच में साफ किया गया है कि विमान 100 प्रतिशत एयरवर्थी था. एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट वैध था, कोई तकनीकी खराबी दर्ज नहीं की गई. पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर के पास 15,000 घंटे का अनुभव था, को-पायलट सांभवी पाठक के पास 1,500 घंटे का अनुभव. दोनों मेडिकल रूप से फिट थे.

फिर भी सवाल उठता है कि क्या आखिरी सेकंड में कोई सिस्टम फेल हुआ? क्या ऊंचाई या स्पीड का गलत अनुमान हुआ? या फिर टेबल-टॉप रनवे का भ्रम तकनीक पर भारी पड़ा?

3. मानवीय चूक: तीसरा एंगल सबसे संवेदनशील है मानवीय गलती. क्या पायलटों ने रनवे की दूरी का गलत आकलन किया? क्या गो-अराउंड के बाद दोबारा अप्रोच जल्दबाजी में की गई? क्या रनवे दिखाई देने का भ्रम हुआ? एटीसी रिकॉर्ड के मुताबिक, लैंडिंग क्लीयरेंस के बाद कोई रीडबैक नहीं मिला. और इसके कुछ ही पलों बाद एटीसी ने रनवे थ्रेशोल्ड के पास आग की लपटें देखीं. यह संकेत करता है कि घटनाक्रम बेहद तेज़ी से घटा.

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सियासी गलियारों में साजिश की गूंज

हादसे की खबर मिलते ही देश भर में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन जल्द ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर गहरा संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. अखिलेश यादव और शिवसेना (UBT) नेता सचिन अहीर ने भी सवाल उठाए हैं कि इतने महत्वपूर्ण वीवीआईपी के विमान के साथ इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन बयानों को 'ओछी राजनीति' करार दिया है.

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