नोटबंदी के दो साल, 10 हजार सिक्के लेकर पहुंचा नामांकन करने, 5 लोगों ने डेढ़ घंटे में गिने

अधिकारी ने बताया कि पवार ने चुनावी जमानत की रकम तो भर दी है. लेकिन फिलहाल अपना पर्चा दाखिल नहीं किया है. प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिये पर्चा भरने की शुक्रवार को ही आखिरी तारीख है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

अजीत तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 09 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

मध्य प्रदेश के इंदौर में गुरुवार को एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए 10 हजार रुपये की जमानत राशि के लिए 1-1 रुपये के 10 हजार सिक्के लेकर पहुंचा. इस उम्मीदवार ने इंदौर के जिला निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के सामने 10 हजार सिक्कों का ढेर लगा दिया.

इन सिक्कों को गिनने में निर्वाचन कार्यालय के पांच अधिकारियों-कर्मचारियों को लगाया गया. इन्होंने डेढ़ घंटों में 10 हजार रुपये के सिक्के गिने.

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बता दें कि गुरुवार को ही नोटबंदी को दो साल पूरे हुए हैं. दो साल पहले यानी 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि 500 और 1000 रुपए के नोट नहीं चलेंगे.

निर्दलीय उम्मीदवार और पेशे से वकील दीपक पवार इंदौर के क्षेत्र क्रमांक-तीन से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. वह जमानत की रकम के रूप में 10,000 रुपये की रेजगारी साथ लेकर आये थे. यह रेजगारी एक-एक रुपये के सिक्कों की शक्ल में थी. करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के दौरान पांच लोगों ने सिक्के गिनकर उन्हें रसीद दी.

अधिकारी ने बताया कि पवार ने चुनावी जमानत की रकम तो भर दी है. लेकिन फिलहाल अपना पर्चा दाखिल नहीं किया है. प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिये पर्चा भरने की शुक्रवार को ही आखिरी तारीख है.

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इस बीच, पवार ने संवाददाताओं को बताया कि वह पेशे से वकील हैं और चुनावों में पहली बार किस्मत आजमाने जा रहे हैं.

जमानत की रकम के रूप में रेजगारी जमा करने का कारण पूछे जाने पर उन्होंने दावा किया कि बाजार में इन दिनों नकदी की खासी किल्लत है और लोगों ने उन्हें चुनावी चंदे के रूप में केवल सिक्के दिये थे.

खुद को स्वर्णिम भारत इंकलाब का नेता बताने वाले पवार ने कहा, 'चुनावी चंदे में नोट नहीं मिलने पर मुझे इन सिक्कों को ही जमानत की रकम के रूप में जमा कराना पड़ा.'

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