क्या BJP झारखंड में कर सकती है खेल? इसलिए चट इस्तीफा, पट ताजपोशी चाहती है JMM

झारखंड में सियासी हलचल के बीच जेएमएम चाहती है कि चंपई सोरेन के नेतृत्व में जल्द नई सरकार का गठन हो जाए. वहीं, बीजेपी भी एक्टिव हो गई है और पार्टी के झारखंड प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी रांची पहुंच चुके हैं. क्या झारखंड में बीजेपी खेल कर सकती है और अगर हां, तो कैसे? समझिए.

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चंपई सोरेन और हेमंत सोरेन चंपई सोरेन और हेमंत सोरेन

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

 जमीन घोटाला केस में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों ने चंपई सोरेन को विधायक दल का नया नेता चुन लिया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी से पहले राजभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इधर हेमंत ने इस्तीफा दिया और उधर विधायक दल के नए नेता चंपई सोरेन ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की, सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. चंपई के साथ 43 विधायक भी राजभवन पहुंचे थे.

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जेएमएम नेता सुबोध कांत ने चंपई सोरेन को जल्द शपथ दिलाने की मांग करते हुए कहा कि नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त नहीं हुआ तो हम 24 घंटे राज्यपाल के दरवाजे पर बैठे रहेंगे. विधायक आलमगीर ने 47 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए कहा कि हमने 43 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा है. उन्होंने हमें जल्द समय देने की बात कही है. जेएमएम के कार्यकर्ता कई जगह सड़कों पर उतर आए. चर्चा इसे लेकर शुरू हो गई है कि हेमंत के चट इस्तीफे के बाद चंपई की पट ताजपोशी को लेकर जेएमएम इतनी बेचैन क्यों है? सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी झारखंड में भी खेल कर सकती है?

JMM में बेचैनी क्यों

चंपई की ताजपोशी से पहले जेएमएम में बेचैनी है तो उसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सक्रियता, पांच विधायकों का विधायक दल की बैठक से दूरी बना लेना और झारखंड विधानसभा का नंबर गेम. झारखंड में सियासी हलचल के बीच बीजेपी के प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी रांची पहुंच चुके हैं. झारखंड बीजेपी के प्रभारी जहां पार्टी नेताओं के साथ बैठक पर बैठक कर रहे हैं. वहीं, झारखंड बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने दावा किया है कि विधायक भ्रमित हैं और चंपई सोरेन का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं हैं.

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झारखंड में सियासी हलचल के बीच रांची पहुंचे लक्ष्मीकांत वाजपेयी (फाइल फोटो)

उन्होंने कई नेताओं के साथ बातचीत का दावा भी किया. बीजेपी की सक्रियता और दीपक प्रकाश के दावे ने जेएमएम की टेंशन बढ़ा दी है. इस टेंशन के पीछे एक वजह हेमंत सोरेन के रांची लौटने के बाद विधायक दल की बैठक से इंडिया गठबंधन के कुछ विधायकों की दूरी है ही, पार्टी और बीजेपी के बीच विधायकों की संख्या के लिहाज से मामूली अंतर भी है. बीजेपी की सक्रियता और जेएमएम की बेचैनी के पीछे क्या है? इसे समझने के लिए झारखंड विधानसभा के नंबर गेम की चर्चा जरूरी है.

झारखंड विधानसभा का नंबर गेम

झारखंड विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 81 है जिसमें एक सीट रिक्त है. गांडेय विधानसभा सीट से जेएमएम के विधायक ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. झारखंड विधानसभा के कुल 80 में से 48 विधायक इंडिया गठबंधन के हैं. जेएमएम के 29, कांग्रेस के 17 विधायक हैं और आरजेडी-सीपीएम के पास एक-एक सीटें हैं. लेकिन चंपई सोरेन ने राज्यपाल को विधायकों के समर्थन का जो पत्र सौंपा है उस पर 43 विधायकों के ही हस्ताक्षर हैं. विपक्ष की बात करें तो बीजेपी, जेएमएम से अधिक पीछे नहीं है. बीजेपी 26 विधायकों के साथ विधानसभा में दूसरी बड़ी पार्टी है. आजसू के तीन, एनसीपी (अजित पवार गुट) के एक और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी बीजेपी के साथ है.

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झारखंड में कैसे हो सकता है खेल

झारखंड विधानसभा की स्ट्रेंथ इस समय 80 है और इसमें सत्ताधारी गठबंधन के साथ 43 विधायकों का समर्थन है तो वहीं विपक्षी गठबंधन के पास 32. सत्ता पक्ष के पांच विधायकों को लेकर सस्पेंस है. बीजेपी के नेता तमाम नेताओं के संपर्क में होने के दावे कर रहे हैं. अब जेएमएम के चार विधायक अगर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दें तो फिर शिबू सोरेन की पार्टी की स्ट्रेंथ 25 रह जाएगी. ऐसी स्थिति में बीजेपी 26 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी और फिर राज्यपाल कमल निशान वाली पार्टी को सरकार बनाने का न्यौता भी दे सकते हैं.

कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने की थी बाबूलाल मरांडी की तारीफ (फाइल फोटोः पीटीआई)

हालांकि, तब भी विधानसभा की स्ट्रेंथ 76 विधायकों की होगी और बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 39 का होगा. यानी नंबर गेम तब भी जेएमएम के नेतृत्व वाले गठबंधन के ही पक्ष में होगा. विधानसभा की वर्तमान स्ट्रेंथ के हिसाब से बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत के आंकड़े से नौ पीछे है. अब कहा ये भी जा रहा है कि बीजेपी की नजर कांग्रेस के विधायकों पर है.

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हेमंत सोरेन की सरकार में वित्त मंत्री रहे कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव ने हाल ही में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के बतौर मुख्यमंत्री ढाई साल के कार्यकाल की जमकर तारीफ की थी जिससे इन कयासों को और हवा मिल गई है. बीजेपी को सत्ता तक पहुंचने के लिए कांग्रेस के 17 में से 12 विधायकों को करना होगा जो मुश्किल माना जा रहा है. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो इस स्थिति में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्ट्रेंथ 32 से 44 पर पहुंच जाएगी जो बहुमत के लिए जरूरी 41 से तीन अधिक होगा और विधायक भी दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की स्थिति से बच सकते हैं.

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तीसरी स्थिति यह है कि सत्ताधारी गठबंधन से 17 विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दें. ऐसी स्थिति में झारखंड विधानसभा की स्ट्रेंथ 63 रह जाएगी और बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा 32 पर आ जाएगा जितने विधायकों का समर्थन अभी बीजेपी के पास है.

जेएमएम विधायक सीता सोरेन (फाइल फोटो)

हालांकि, ये सब अगर-मगर का फेर है. झारखंड के समीकरण बीजेपी के मुफीद नहीं हैं. लेकिन बीजेपी ने मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और बिहार तक जिस तरह से विपरीत समीकरणों के बावजूद नंबर गेम अपने पक्ष में करने में करके दिखाया है, उसने जेएमएम से लेकर कांग्रेस तक को चिंता में जरूर डाल दिया होगा. शायद यही वजह है कि झारखंड की स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं के साथ बैठक की है.

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सरकार गठन की संभावनाओं पर क्या बोली बीजेपी

गोड्डा से बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने सरकार गठन की संभावनाओं को लेकर कहा है कि जेएमएम के हाथ भ्रष्टाचार से सने हुए हैं. बीजेपी भ्रष्टाचारियों के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएगी. हम हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहते हैं और चुनाव के लिए ही जाएंगे. उन्होंने कहा कि जेएमएम का समूल नाश कैसे हो, हम इसके लिए काम करते रहेंगे. निशिकांत दुबे ने जेएमएम के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास उपलब्ध संख्याबल पर भी संदेह जताया और कहा कि इनके पास 48-49 विधायक हैं लेकिन सिग्नेचर ये 42-43 का ही ले पाए हैं. उन्होंने कहा कि बसंत सोरेन खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो वहीं सीता सोरेन का भी सीएम की कुर्सी पर हक बनता है. सीता सोरेन, रामदास सोरेन समेत कांग्रेस के भी कई नेता बैठक में नहीं थे. निशिकांत दुबे ने कहा कि मुझे लगता है कि चंपई सोरेन के पास संख्याबल नहीं है. खेल अभी बाकी है.

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