हुर्रियत की धमकी- 35A के खिलाफ आया SC का फैसला तो होगी खुली बगावत

पीएम से मिलने के बाद सीएम महबूबा मुफ्ती ने बताया था कि हमारे एजेंडे में ये तय था कि आर्टिकल 370 के तहत राज्य को मिल रहे स्पेशल स्टेटस में कोई बदलाव नहीं होगा.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

कमलजीत संधू

  • श्रीनगर,
  • 29 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 3:06 AM IST

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अनुच्छेद 35A को लेकर गहमागहमी है. इस बीच सोमवार को इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. कोर्ट इस संबंध में कोई बड़ा फैसला दे सकता है. जिससे पहले ही घाटी से विरोध के स्वर उठने लगे हैं.

अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने इसे लेकर रविवार को खुली चेतावनी दी है. हुर्रियत ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनुच्छेद 35A के खिलाफ आता है, तो घाटी में इसके खिलाफ विद्रोह किया जाएगा.

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दरअसल, अनुच्छेद 35-ए जम्मू-कश्मीर को राज्य के रूप में विशेष अधिकार देता है. इसके तहत दिए गए अधिकार 'स्थाई निवासियों' से जुड़े हुए हैं. इस अनुच्छेद के कुछ विशेष प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. जिस पर कोर्ट में सुनवाई होनी है. जिस पर अलगाववादी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर अनुच्छेद 35ए खत्म किया जाता है तो घाटी में हालात बिगड़ जाएंगे.

विशेष प्रावधानों को दी गई चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कुछ विशेष प्रावधानों को चुनौती दी गई है. इनमें राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला को संपत्ति का अधिकार नहीं मिलना. दरअसल, अभी ये नियम है कि कश्मीर से बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करने वाली महिला का संपत्ति पर अधिकार समाप्त हो जाता है, इतना ही नहीं उसके बेटे को भी संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता है.

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क्या है अनुच्छेद 35-ए?

- संविधान का अनुच्छेद 35-ए जम्मू कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को पारभाषित कर सके.

- देश आजाद होने के बाद सन् 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा एक आदेश पारित करने संविधान में एक नया अनुच्छेद 35 A जोड़ा गया था. ये अधिकार अनुच्छेद 370 के तहत दिया गया है.

-यह अनुच्छेद राज्य विधायिका को यह अधिकार देता है कि वह कोई भी कानून बना सकती है और उन कानूनों को अन्य राज्यों के निवासियों के साथ समानता का अधिकार और संविधान द्वारा प्राप्त किसी भी अन्य अधिकार के उल्लंघन के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है.

- सन् 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.

यही वजह है कि कश्मीर की अावाम से लेकर वहां के सियासी लोग 35ए को चुनौती के विरोध में हैं. सूबे की मुख्यमंत्री और बीजेपी की सहयोगी पार्टी पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में मुलाकात की थी. पीएम से मिलने के बाद मुफ्ती ने बताया था कि हमारे एजेंडे में ये तय था कि आर्टिकल 370 के तहत राज्य को मिल रहे स्पेशल स्टेटस में कोई बदलाव नहीं होगा.

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यह अनुच्छेद संविधान के अधिकार क्षेत्र से बाहर है या इसमें कोई प्रक्रियागत खामी है, इसे लेकर तीन न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी और फिर इसे पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाएगा.

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