J-K पंचायत चुनाव: आतंकी धमकियों का खौफ, खुफिया एजेंसियों ने जताई भारी हिंसा की आशंका

जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव होने हैं, लेकिन वहां पर आतंकियों के बढ़ते हरकतों से स्थानीय लोगों में बेहद खौफ है और कई नेता चुनाव से दूर रहने का मन बना रहे हैं.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

कमलजीत संधू / खुशदीप सहगल / सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 9:36 PM IST

'कोई भी म्युनिसिपल या पंचायत चुनाव में इस इलाके से खड़ा नहीं होगा. कोई भी गोली नहीं खाना चाहता.' ये कहते हुए शबीर अहमद कुल्ले की आवाज में डर साफ झलकता है. कुल्ले आतंकवाद से ग्रस्त शोपियां में नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से जुड़े नेता हैं.

कुल्ले का कहना है- 'शोपियां में जीरो फीसदी मतदान होगा. मैंने कार्यकर्ताओं से बात की है. आप चुनाव के लिए खुद की जान दांव पर नहीं लगा सकते. चुनाव में खड़े होने का मतलब है खुदकुशी.'

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स्थिति बेहद खराब

बता दें कि कुल्ले ने 2014 विधानसभा चुनाव नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था. कुल्ले उस चुनाव में पीडीपी उम्मीदवार से करीब 2,000 वोट से हार गए थे. उनका कहना है कि तब से हालात 99% ज्यादा खराब हो गए हैं.

कुल्ले का डर अकारण नहीं है. खुफिया एजेंसियों ने आगाह किया है कि अक्टूबर-नवंबर में शहरी निकाय और पंचायत चुनावों में भारी हिंसा हो सकती है.

हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिसकर्मियों के 10 रिश्तेदारों को बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया गया. हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन ऐसा कदम उठाकर आतंकवादियों ने संदेश दिया कि उनका नेटवर्क मजबूत है और जब चाहे प्रहार कर सकते हैं.

पुख्ता सुरक्षा नहीं तो चुनाव लड़ना खतरनाक

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक कहते हैं- 'अगर पुख्ता सुरक्षा नहीं दी जाती तो लड़ना खतरे से खाली नहीं है.' चुनाव के वक्त पर नाखुशी जताते नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने कहा कि पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों को हाल में अगवा किए जाने की घटना से चिंता बढ़ गई है. चुनाव के ऐलान से पहले अच्छी तरह हर पहलू पर सोच विचार किया जाना चाहिए था.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी बेशक धुर राजनीतिक विरोधी सही, लेकिन उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर दोनों की एक जैसी राय है. पीडीपी नेता रफी मीर कहते हैं- 'धमकियों को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया आसान नहीं होगी. हमें अभी उम्मीदवार तय करने हैं, लेकिन हम समझते हैं कि चुनाव का वक्त ठीक नहीं है.'

विचार-विमर्श नहीं करने का आरोप

म्युनिसिपल और पंचायत चुनाव कराने के फैसले की आलोचना करते हुए रफी मीर ने कहा, 'माननीय राज्यपाल सभी राजनीतिक दलों से पहले विचार-विमर्श कर उनकी राय लेते तो बेहतर रहता. ऐसा नहीं किया गया.' उन्होंने कहा, 'एक बार किसी उम्मीदवार का खड़ा होना तय हो जाता है तो पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. ये हमारी मुख्य मांगों में से एक है.'

बीते 4 साल में 16 सरपंच और पंचों की हत्या हुई है. इस वजह से भी लोग चुनाव में खड़े होने से कतरा सकते हैं. आतंकवादियों के खतरे को देखते हुए पंचायत चुनावों के लिए भी बहुत कम उम्मीदवार सामने आ सकते हैं.

सूत्रों का कहना है कि हर किसी उम्मीदवार को पुख्ता सुरक्षा देना बड़ी चुनौती है. सुरक्षा ग्रिड से जुड़े सूत्र हालांकि सकारात्मक रुख दिखाते कहते हैं कि कुछ हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फिर भी ऐसे कई होंगे जो खतरे के बावजूद चुनाव के लिए आगे आएंगे.

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सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती

शहरी निकाय और पंचायत चुनाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए निश्चित तौर पर बड़ी चुनौती है. हिज़्ब कमांडर रियाज नायकू ने बीते हफ्ते एक ऑडियो संदेश में धमकी दी थी कि जो भी चुनाव में खड़ा होने की सोच रहे हैं वो नामांकन पत्रों के साथ अपना कफ़न भी तैयार कर लें.

11 मिनट की क्लिप में नायकू ने कहा, 'हमने पहले से ही हाईड्रोक्लोराइड और सल्फ्यूरिक एसिड तैयार कर लिया है. उन्हें नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए.'

सूत्रों के मुताबिक दो महीने चली अमरनाथ यात्रा के दौरान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की जिन 237 कंपनियों को तैनात किया गया था, उन्हें कश्मीर घाटी में ही बने रहने के लिए कहा गया है.

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार का कहना है कि राज्य में सुरक्षा निश्चित रूप से बड़ी चुनौती है. विभिन्न जिलों के लिए हमारी सुरक्षा रणनीति है. आतंकी गुटों की धमकियों के बावजूद अधिकतर लोग इसे (चुनाव) चाहते हैं. हम अच्छे तत्वों, विभिन्न एनजीओ और सबसे अहम आम लोगों के सहयोग से सभी जरूरी बंदोबस्त करने की कोशिश कर रहे हैं.

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