NCR में कैब और डिलीवरी के लिए पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर रोक, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

हरियाणा सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के जिलों में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कैब एग्रीगेटर्स, ई-कॉमर्स और डिलीवरी प्रदाताओं के बेड़े में पेट्रोल-डीजल वाहनों को शामिल करने पर रोक लगा दी गई है

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अब NCR में कैब कंपनियों के सिर्फ CNG और इलेक्ट्रिक वाहन चलेंगे (Photo-ITG) अब NCR में कैब कंपनियों के सिर्फ CNG और इलेक्ट्रिक वाहन चलेंगे (Photo-ITG)

aajtak.in

  • चंडीगढ़,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में 'हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993' में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई. 

इसके तहत अब गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत एनसीआर के इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस देने वालों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में नई पेट्रोल या डीजल गाड़ियों को शामिल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

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आधिकारिक बयान के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुरूप, हरियाणा मोटर वाहन नियम, 1993 के तहत यह फैसला लिया गया है.

1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा नियम
एनसीआर जिलों में काम करने वाली कंपनियों के बेड़े में नए शामिल होने वाले सभी वाहन अनिवार्य रूप से केवल सीएनजी (CNG), इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी से चलने वाले वाहन (BOV) या किसी अन्य स्वच्छ ईंधन पर आधारित होने चाहिए. इसके साथ ही, मौजूदा बेड़े में नए तिपहिया ऑटो-रिक्शा भी सिर्फ सीएनजी या इलेक्ट्रिक ही जोड़े जा सकेंगे.

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बयान में कहा गया है, "संशोधित नियमों के तहत, 1 जनवरी, 2026 से NCR इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस देने वालों और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल की जाने वाली सभी गाड़ियां अनिवार्य रूप से CNG, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV), बैटरी से चलने वाली गाड़ियां (BOV) या किसी अन्य साफ़ ईंधन पर आधारित होंगी..."

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यात्रियों की सुरक्षा और इंश्योरेंस के कड़े नियम
कैबिनेट ने हरियाणा मोटर वाहन नियम के नियम 86A को प्रतिस्थापित कर ऐप-आधारित सेवाओं के लिए एक व्यापक रेगुलेटरी ढांचा तैयार किया है. इसके तहत कड़े सुरक्षा और कल्याणकारी नियम लागू किए गए हैं. एग्रीगेटर्स को यात्रियों के लिए न्यूनतम 5 लाख रुपये का बीमा, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और ऑनबोर्ड ड्राइवरों के लिए न्यूनतम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस सुनिश्चित करना होगा.

सभी वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (GPS), पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) लगाना अनिवार्य होगा. यात्रियों की सहायता और शिकायत निवारण के लिए कंपनियों को 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर स्थापित करने होंगे.

पारदर्शिता और जवाबदेही को मज़बूत करने के लिए ड्राइवरों और गाड़ियों के वेरिफिकेशन के लिए सरकार के 'वाहन' (VAHAN) और 'सारथी' (SARATHI) पोर्टल से डिजिटल वेरिफिकेशन करना होगा. एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस देने वालों को अपने साथ जुड़े ड्राइवरों और गाड़ियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा.

कैबिनेट को बताया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस देने वालों और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस देने का काम एक खास पोर्टल-cleanmobility.haryanatransport.gov.in के ज़रिए किया जाएगा.

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इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैक्स छूट की तैयारी
कैबिनेट बैठक से पहले हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने मीडिया से बात करते हुए एक और बड़ी घोषणा की. उन्होंने बताया कि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर हरियाणा में भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है.

वर्तमान में हरियाणा ईवी पंजीकरण शुल्क पर 20 प्रतिशत की छूट देता है. इसके अतिरिक्त, अनिल विज ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही 500 नई इलेक्ट्रिक बसें भी खरीदने जा रही है, जिससे सार्वजनिक परिवहन को भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके.

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