गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए बनाई गई स्पेशल कमिटी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है. इस रिपोर्ट में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचे का सुझाव दिया गया है.
रिपोर्ट में महिलाओं के समान अधिकारों और उनके संरक्षण को तरजीह दी गई है. समिति की अध्यक्ष, रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने बताया कि ये कानूनी ढांचा सभी धर्मों के लिए एक जैसा होगा.
रिपोर्ट में महिलाओं के समान अधिकारों और उनके संरक्षण को तरजीह दी गई है. समिति की अध्यक्ष, रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने बताया कि ये कानूनी ढांचा सभी धर्मों के लिए एक जैसा होगा. शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मुद्दों पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक जैसे कानून को मानना होगा.
बजट सत्र के दौरान पेश हो सकता है बिल
सूत्रों के मुताबिक, गुजरात सरकार चल रही इसी बजट सत्र के दौरान विधानसभा में यूसीसी पर ड्राफ्ट बिल पेश कर सकती है. 25 मार्च को बजट सत्र का आखिरी दिन है और हो सकता है कि सरकार इसी दिन इस बिल को सदन में पेश करें.
गुजरात के नेताओं से लिया गया फीडबैक
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समिति के गठन के समय कहा था कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश भर में यूसीसी लागू करने के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए समिति ने बड़े स्तर पर काम किया है. समिति के सदस्यों ने गुजरात के सभी जिलों का दौरा किया और राजनीतिक नेताओं और धार्मिक गुरुओं से फीडबैक लिया.
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समित ने एक विशेष वेबसाइट के जरिए यूसीसी को लेकर जनता की राय भी मांगी थी. इस दौरान समिति को लगभग 19 लाख सुझाव मिले.
अगस्त 2024 में सरकार ने बताया था कि पैनल ने यूसीसी पर राय समझने के लिए 38 मुस्लिम संगठनों के साथ भी बैठकें की थीं. हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध भी हुआ है. अप्रैल 2025 में अहमदाबाद और वडोदरा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया था.
कानूनी चुनौतियों पर हाईकोर्ट का रुख
पिछले साल दिसंबर में, गुजरात हाईकोर्ट ने यूसीसी समिति के गठन को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था. सूरत के अब्दुल वहाब सोपारीवाला की दायर इस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि वो संविधान के आर्टिकल 162 के तहत कार्यपालिका के कामों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
अब देखना ये है कि गुजरात सरकार का ये बिल सदन में कब पारित होता है और इसके पारित होने के बाद लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती है.
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