गुजरात पिछले 30 से ज्यादा सालों से भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुका है, वैसे में स्थानीय निकाय चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती रहते हैं क्योंकि ग्रामीण इलाकों में कई बार परिणाम विपरीत आते हैं, पर शहरी इलाकों में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट हमेशा ज्यादा रहा है और सत्ता भी रही है.
पिछली बार हुए स्थानीय निकाय चुनाव में सभी 6 बड़े नगर निगमों में भाजपा की भव्य जीत हुई थी और करीब 90 प्रतिशत तक सीटें जीती थीं. शहरी इलाके भाजपा के लिए एकतरफा जीत के इलाके माने जाते हैं क्योंकि वहां पर कांग्रेस इतनी मजबूत नहीं है.
सिर्फ सूरत में पिछली बार आप) 28 सीटें जीती थीं, बाकी सभी जगह विपक्ष की हालत खस्ता थी. जिसे देखते हुए इस बार भाजपा ने इन सभी बड़े नगर निगमों में 60 से लेकर 85 प्रतिशत तक वर्तमान पार्षदों के टिकट काट दिए हैं.
सबसे ज्यादा अहमदाबाद में 159 में से 127 पार्षदों के टिकट काटे, जबकि सबसे कम सूरत में 93 पार्षदों में से 55 के टिकट कटे. इसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है पार्टी के नियम, जिसमें 60 साल से बड़े किसी को टिकट नहीं देना और 3 बार जीते पार्षदों के टिकट नहीं देना महत्वपूर्ण है, जिसकी वजह से ज्यादातर पार्षदों के टिकट कट चुके हैं. यह नियम पिछले अध्यक्ष सी.आर. पाटिल के कार्यकाल के दौरान बनाए गए थे, जिसे इस बार भी लागू किया गया है.
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ज्यादातर नगर निगमों में मेयर, डिप्टी मेयर, स्टैंडिंग चेयरमैन और दण्डक और पक्ष के नेता रहने वाले पार्षदों को इस बार टिकट भी नहीं मिला है, जो दिखाता है कि पार्टी अपने बनाए नियमों पर कितनी मजबूती से कायम है.
नगर निगम अनुसार नजर करें तो राज्य का सबसे बड़ा नगर निगम अहमदाबाद है, जहां पर कुल 192 सीटें हैं, जिसमें से 127 के टिकट पार्टी ने काट दिए हैं और सिर्फ 32 को रिपीट (20%) किया है.
इसके बाद सूरत नगर निगम है, जिसमें 120 सीटें हैं, वहां पर पार्टी ने 55 पार्षदों के टिकट काटे हैं, जबकि 38 को रिपीट (40%) किया है. वडोदरा नगर निगम की 76 सीटें हैं, वहां पर 15 को रिपीट (21%) किया है, जबकि 54 पार्षदों के टिकट कटे हैं. राजकोट नगर निगम की 72 सीटें हैं, जिसमें से 22 को रिपीट (32%) किया है, 46 पार्षदों के टिकट कटे हैं. जामनगर नगर निगम में 64 सीटें हैं, जिसमें से 14 रिपीट (28%) हुए हैं, 36 पार्षदों के टिकट कटे हैं. भावनगर नगर निगम में 52 सीटें हैं, जिसमें से सिर्फ 7 को रिपीट (15%) किया गया है, 36 पार्षदों को टिकट नहीं मिला है.
इन इलाकों में गुजरात की सबसे ज्यादा जनसंख्या रहती है, जिसकी वजह से यहां पर जीत के मायने गुजरात में बड़ी ताकत देते हैं. विधानसभा चुनावों में भी भाजपा की सबसे ज्यादा लीड इन नगर निगमों के मत क्षेत्रों में होती है. इसलिए पार्टी का ध्यान भी इन इलाकों में ज्यादा रहता है. साल 2021 के चुनावों में नगर निगमों में पार्टी को कितनी बड़ी जीत मिली थी, उसके आंकड़े देखें तो:
ब्रिजेश दोशी