बीट रिपोर्ट: गुजरात बॉर्डर पहुंचे अमित शाह, घुसपैठ और तस्करी पर केंद्र सरकार का बड़ा मिशन शुरू

गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के हरामी नाला का दौरा किया. दरअसल केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक मिशन बॉर्डर रणनीति शुरू की है. सरकार अवैध निर्माण, घुसपैठ और साइबर अपराधों पर सख्त नियंत्रण के लिए नए कानून और तकनीकी उपाय लागू कर रही है.

Advertisement
केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए तेजी सें काम कर रही है. (Photo- ITGD) केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए तेजी सें काम कर रही है. (Photo- ITGD)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • अहमदाबाद,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार अब सिर्फ पारंपरिक सैन्य निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहती. देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर घुसपैठ, नार्को-तस्करी, अवैध निर्माण, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क, हवाला फंडिंग और साइबर अपराध जैसे खतरों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक व्यापक 'मिशन बॉर्डर' रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.

इसी अभियान के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान के बीकानेर बॉर्डर के बाद अब गुजरात के कच्छ क्षेत्र स्थित हरामी नाला पहुंचे हैं. ये दौरा सिर्फ सीमा चौकियों का निरीक्षण भर नहीं, बल्कि आने वाले समय में केंद्र सरकार की नई सीमा सुरक्षा नीति का संकेत माना जा रहा है.

Advertisement

गृह मंत्री का ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा, जनसंख्या परिवर्तन, अवैध कब्जों और घुसपैठ के मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जोड़कर देख रही है. 

हरामी नाला क्यों है इतना संवेदनशील?

गुजरात के भुज स्थित हरामी नाला का दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ये इलाका लंबे समय से पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ, समुद्री तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों का संवेदनशील मार्ग माना जाता रहा है. हरामी नाला गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित एक जटिल समुद्री और दलदली इलाका है. ये लगभग 22 किलोमीटर लंबा ज्वारीय चैनल है, जो अरब सागर और सर क्रीक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.

इस इलाके की सबसे बड़ी चुनौती इसकी भौगोलिक बनावट है. यहां पानी का बहाव, रास्ते और गहराई लगातार बदलते रहते हैं. ज्वार-भाटा के कारण कई बार सीमा की निगरानी बेहद मुश्किल हो जाती है, चारों ओर फैले दलदली मैदान, समुद्री कीचड़ और ऊंचे तापमान की वजह से ये क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा चुनौतियों से भरा रहा है. यही वजह है कि पाकिस्तान समर्थित तस्कर और घुसपैठिए इस इलाके का इस्तेमाल भारत में प्रवेश के लिए करने की कोशिश करते रहे हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता के खेत से मिला 2.24 करोड़ कैश और सोना, गिरफ्तार

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस रास्ते का इस्तेमाल कई बार हथियार, नशीले पदार्थ और संदिग्ध नेटवर्क सक्रिय करने के लिए किया गया. 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद भी समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में इस क्षेत्र की संवेदनशीलता पर खास ध्यान दिया गया था. सीमा सुरक्षा बल और समुद्री एजेंसियां यहां लगातार गश्त करती हैं, लेकिन इलाके की भौगोलिक कठिनाइयों के कारण निगरानी आसान नहीं मानी जाती.

हरामी नाला में अमित शाह का दौरा क्यों अहम?

गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों को देखें तो साफ होता है कि ये दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है. उनके कार्यक्रमों में नई सीमा चौकी का उद्घाटन, कंट्रोल रूम का निरीक्षण, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम की समीक्षा, जलयान से हरामी नाला क्षेत्र का दौरा और सीमा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर हाई-लेवल बैठक शामिल है. इस दौरान वो सीमा चौकी G-7 का उद्घाटन करेंगे और जवानों से संवाद भी करेंगे.

इसके अलावा ओपी टावर-1170 स्थित कंट्रोल रूम में आधुनिक निगरानी तंत्र की समीक्षा की जाएगी. सुरक्षा एजेंसियों ने इस इलाके में अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर और रडार आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की है, ताकि बदलते समुद्री रास्तों के बावजूद हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके. गृह मंत्री जलमार्ग से हरामी नाला क्षेत्र का निरीक्षण भी करेंगे. 

Advertisement

इससे साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार समुद्री सीमा सुरक्षा को अब नई प्राथमिकता दे रही है. हरामी नाला और सर क्रीक क्षेत्र लंबे समय से रणनीतिक नजरिए से बेहद संवेदनशील माने जाते रहे हैं.

बीकानेर बैठक में क्या बना नया सुरक्षा फॉर्मूला?

गुजरात दौरे से पहले अमित शाह ने राजस्थान के बीकानेर में भारत-पाकिस्तान सीमा से जुड़े जिलों की उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी. इस बैठक में मुख्यमंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सीमावर्ती जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए. बैठक का मुख्य फोकस '360 डिग्री बॉर्डर सिक्योरिटी मॉडल' था. यानी सीमा सुरक्षा अब सिर्फ बीएसएफ की जिम्मेदारी नहीं रहेगी, बल्कि इसमें राज्य सरकार, जिला प्रशासन, बैंकिंग सिस्टम, जांच एजेंसियां और स्थानीय नागरिकों की भूमिका भी तय की जाएगी.

बैठक में गृह मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस नीति' लागू करने के निर्देश दिए. ऐसे सभी निर्माणों की निशानदेही करके हटाने के आदेश दिए गए हैं. सरकार का मानना है कि कई बार सीमावर्ती इलाकों में अवैध ढांचे घुसपैठ, तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं.

इसके अलावा सीमा प्रबंधन में बीएसएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सीबीडीटी और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया. फर्जी कंपनियां, हवाला नेटवर्क, म्यूल अकाउंट, फर्जी आधार कार्ड और सीमा पार से होने वाले आर्थिक अपराधों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन को विशेष जिम्मेदारियां दी गई हैं.

सीमांचल से बंगाल तक, सरकार का बड़ा अभियान

केंद्र सरकार का ये अभियान सिर्फ पश्चिमी सीमा तक सीमित नहीं है. बिहार के सीमांचल क्षेत्र में भी गृह मंत्री पहले ऐसी बैठक कर चुके हैं. अब पश्चिम बंगाल, असम और बांग्लादेश सीमा से लगे अन्य इलाकों पर भी फोकस बढ़ाया जा रहा है. हाल ही में बंगाल राज्य सरकार ने बीएसएफ को फेंसिंग कार्य के लिए बड़ी मात्रा में जमीन मुहैया कराई है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: बंगाल की पूर्व CM ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज, सनातन धर्म पर टिप्पणी का आरोप

केंद्र सरकार का लक्ष्य बांग्लादेश सीमा पर लंबित फेंसिंग कार्य को तेज रफ्तार से पूरा करना है. खासतौर से चिकन नेक कॉरिडोर और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. घुसपैठ के मुद्दे पर भी सरकार का रुख पहले से ज्यादा सख्त दिखाई दे रहा है. अवैध रूप से देश में रहने वालों की पहचान, डिटेंशन सेंटर और दस्तावेज सत्यापन जैसे मुद्दे अब राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं.

'डेमोग्राफिक चेंज' पर सरकार की चिंता

केंद्र सरकार अब सिर्फ सीमा पार गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वो 'अप्राकृतिक जनसंख्या परिवर्तन' को भी सुरक्षा चुनौती के तौर पर देख रही है. इसी मकसद से सरकार ने 'हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज' का गठन किया है.इस समिति को देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों, उनके कारणों और संभावित प्रभावों की स्टडी करने की जिम्मेदारी दी गई है,

समिति ये भी जांच करेगी कि अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और सीमा पार नेटवर्क किस हद तक जनसंख्या पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो इस विषय पर नए कानूनों की भी सिफारिश की जा सकती है. समिति को एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.

सीमा सुरक्षा का नया मॉडल

गृह मंत्रालय की नई रणनीति को देखें तो अब सीमा सुरक्षा तारबंदी या चौकियों तक सीमित नहीं रहेगी. स्मार्ट बॉर्डर की नई नीति में कई स्तरों पर निगरानी और नियंत्रण की तैयारी की गई है. इसमें तकनीकी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, स्मार्ट फेंसिंग, साइबर ट्रैकिंग, वित्तीय निगरानी और स्थानीय प्रशासन की भागीदारी को जोड़ा जा रहा है. सीमावर्ती जिलों के डीएम और एसपी को अब सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं बल्कि आर्थिक और दस्तावेज आधारित संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी दी जा रही है,

Advertisement

साथ ही '1930' साइबर हेल्पलाइन के प्रभावी इस्तेमाल और नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया है. इसका मकसद सीमा पार संचालित साइबर फ्रॉड नेटवर्क और डिजिटल फंडिंग चैनलों पर रोक लगाना है.

हरामी नाला में क्या बदल सकता है?

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आने वाले समय में हरामी नाला क्षेत्र में निगरानी और सख्त की जा सकती है. यहां एडवांस फेंसिंग, सेंसर आधारित मूवमेंट डिटेक्शन, हाई-रेंज कैमरे और समुद्री पेट्रोलिंग को बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है. मुमकिन है कि समुद्री सीमा पर तकनीकी निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय मछुआरों और ग्रामीणों को भी सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाएगा. सरकार का फोकस ये सुनिश्चित करना है कि कोई भी घुसपैठिया या तस्कर दलदली और समुद्री रास्तों का फायदा न उठा सके.

बॉर्डर दौरे का रणनीतिक संदेश!

अमित शाह का लगातार सीमावर्ती इलाकों का दौरा प्रशासनिक कवायद से बढ़कर माना जा रहा है. इसके राजनीतिक और रणनीतिक दोनों संदेश हैं. एक तरफ केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी और प्रशासनिक दोनों एजेंडे के केंद्र में रख रही है, वहीं दूसरी ओर सीमा क्षेत्रों में कठोर निगरानी और नियंत्रण का संदेश भी दिया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: 'अगर वो बॉर्डर पर फेंसिंग में बाधा डालेंगे तो...', मिथुन चक्रवर्ती ने बांग्लादेश के जवानों को चेताया

हरामी नाला का दौरा इस बात का संकेत है कि सरकार अब उन इलाकों पर विशेष ध्यान दे रही है जिन्हें लंबे समय से 'कमजोर लिंक; माना जाता रहा है. चाहे वो समुद्री सीमा हो, दलदली क्रीक क्षेत्र हो या बांग्लादेश सीमा के घने आबादी वाले इलाके- केंद्र सरकार अब बहुस्तरीय सुरक्षा मॉडल लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »