फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उमर खालिद, 'खुली अदालत' में सुनवाई की मांग

दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है. उन्होंने खुली अदालत में सुनवाई की मांग की है, जबकि नियमों के मुताबिक रिव्यू पेटीशन पर जज अपने चैंबर में विचार करते हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वो मामले पर विचार करने के बाद ही सुनवाई प्रक्रिया तय करेंगे.

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उमर खालिद की बेल याचिका पहले खारिज कर दी गई थी. (Photo: ITGD) उमर खालिद की बेल याचिका पहले खारिज कर दी गई थी. (Photo: ITGD)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपियों में से एक उमर खालिद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अब खालिद ने इस फैसले को चुनौती दे हुए एक पुनर्विचार याचिका दायर की है.

उमर खालिद ने अपनी इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से एक स्पेशल अपील की है. उन्होंने मांग की है कि इस पुनर्विचार याचिका पर 'ओपन कोर्ट' में सुनवाई की जाए.

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नियमों के मुताबिक, पुनर्विचार याचिकाओं पर जज अपने चैंबर में ही विचार करते हैं. लेकिन खालिद चाहते हैं कि उनकी दलीलों को खुली अदालत में सुना जाए.

15 अप्रैल को होगी सुनवाई

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने आज अदालत में उमर खालिद की इस रिव्यू पिटीशन का जिक्र किया. बेंच ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए बुधवार, 15 अप्रैल को सुनवाई करने का फैसला लिया है.

उमर खालिद के मामले को ओपन कोर्ट में रखने की अपील पर जस्टिस सूर्यकांत कहा कि वो सोचने के बाद इसका फैसला करेंगे. उन्होंने कहा, 'हम इसे देखेंगे और सुनने की प्रक्रिया तय करेंगे.'

5 जनवरी के फैसले को चुनौती

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को बेल देने से साफ इनकार कर दिया था. खालिद दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में लंबे समय से जेल में बंद हैं. उन पर दिल्ली दंगों की साजिश रचने और UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं. इससे पहले निचली अदालतों और हाई कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था. 

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यह भी पढ़ें: 'अब जेल ही मेरी जिंदगी है, दूसरों की रिहाई से खुश हूं...', जमानत नहीं मिलने पर बोले उमर खालिद

अब 15 अप्रैल की सुनवाई में यह तय होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए तैयार है या नहीं. इसके साथ ही, इस बात पर भी नजर रहेगी कि अदालत नियमों में ढील देते हुए इस याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई करती है या नहीं.

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