पश्चिम एशिया संकट पर सरकार अलर्ट! राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन में बुलाई हाई लेवल मीटिंग

पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सप्लाई जोखिमों को लेकर राजनाथ सिंह ने हाई लेवल बैठक की. सरकार ईंधन, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा पर नजर बनाए हुए है.

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कर्तव्य भवन में राजनाथ सिंह ने की हाई-लेवल मीटिंग (File Photo: ITG) कर्तव्य भवन में राजनाथ सिंह ने की हाई-लेवल मीटिंग (File Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कर्तव्य भवन में मंत्रियों के अनौपचारिक सशक्त समूह (IGoM) की हाई लेवल मीटिंग का नेतृत्व किया. यह बैठक पश्चिम एशिया संकट की निगरानी और भारत पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए आयोजित की गई. यह मीटिंग कर्तव्य भवन-2 में आयोजित की गई. 

इससे पहले 28 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को भी ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे के लचीलेपन पर चर्चा हुई थी. ताजा चर्चा हिंद महासागर क्षेत्र, होर्मुज स्ट्रेट और ईंधन आपूर्ति के जोखिमों पर केंद्रित रही.

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प्रधानमंत्री ने संसाधनों के संरक्षण की अपील की थी, जिसके बाद यह पहली बड़ी बैठक है. सरकार इस वक्त ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रही बाधाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है.

PM मोदी का 'आर्थिक आत्मरक्षा' का मंत्र

हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से वैश्विक तनाव के बीच आर्थिक लचीलेपन के लिए एक जन आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देने का नाम नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी से जीना भी राष्ट्र सेवा है. पीएम ने नागरिकों से ईंधन बचाने के लिए मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार-पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने की गुजारिश की. उन्होंने कोविड काल की तरह वर्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोग पर जोर दिया, जिससे ऊर्जा बिल कम किया जा सके. 

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प्रधानमंत्री ने देशवासियों से 'रुपये का संरक्षक' बनने की सीधी अपील की. उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए गैर-जरूरी विदेश यात्राओं, विदेशी छुट्टियों और विदेशों में होने वाली शादियों से बचने की गुजारिश की. इसके बजाय घरेलू पर्यटन और भारत में ही उत्सव मनाने को प्रोत्साहित किया. पीएम ने एक साल तक गैर-जरूरी सोना न खरीदने, विदेशी सामान के बजाय 'मेड इन इंडिया' प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने और खाद्य तेल के उपयोग में कमी लाने का भी अनुरोध किया. किसानों से भी रसायनों के उपयोग में 50% की कटौती कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की गई, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त हो सके.

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