पार्किंग दरों में वृद्धि से घाटे में आई MCD, फैसला वापस

एमसीडी की मानें तो 4 गुना पार्किंग शुल्क बढ़ा देने से उसे खासा नुकसान हुआ है. साउथ एमसीडी की पार्किंग साइटों पर जहां 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, वहीं नॉर्थ दिल्ली की पार्किंग साइटों पर भी 40 फीसदी के करीब गिरावट दर्ज की गई.

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साउथ एमसीडी ने वापस ली बढ़ी हुई पार्किंग दरें साउथ एमसीडी ने वापस ली बढ़ी हुई पार्किंग दरें

रवीश पाल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 16 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 6:23 AM IST

दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क को चार गुना बढ़ाने का भले ही वायु की गुणवत्ता पर कुछ खास असर न हुआ हो, लेकिन इससे पार्किंग ठेकेदार और एमसीडी को नुकसान जरूर हुआ है. एमसीडी की मानें तो इससे न केवल पार्किंग शुल्क के कलेक्शन में गिरावट आई है बल्कि झगड़े भी बढ़ गए. साउथ एमसीडी ने तो हो रहे घाटे के मद्देनजर पार्किंग शुल्क की बढ़ी हुई दरें वापस भी ले लीं.

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एमसीडी की जो पार्किंग साइटें 9 नवंबर को खचाखच भरी थीं, वो 14 नवंबर को आधे से ज्यादा खाली रहीं और इसकी सबसे बड़ी वजह रही पार्किंग शुल्क की दरों का 4 गुना वृद्धि. दरअसल एमसीडी की मानें तो 4 गुना पार्किंग शुल्क बढ़ा देने से उसे खासा नुकसान हुआ है. साउथ एमसीडी की पार्किंग साइटों पर जहां 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, वहीं नॉर्थ दिल्ली की पार्किंग साइटों पर भी 40 फीसदी के करीब गिरावट दर्ज की गई. साउथ एमसीडी में स्थाई समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने तो यहां तक कह दिया कि था.

भुपेंद्र गुप्ता के मुताबिक, "पार्किंग शुल्क बढ़ाने के इस फैसले से ऐसा तो नहीं हुआ कि लोग गाड़ियों में न आए हों, लेकिन इसका असर यह हुआ कि लोगों ने पार्किंग साइट छोड़ गाड़ियों को रोड पर खड़ा करना शुरू कर दिया. इससे निगम का रेवेन्यू भी कम हुआ है."

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भूपेंद्र गुप्ता के हिसाब से ये बहुत गलत फैसला था. निगम अब अधिकारियों से 9 नवंबर से लेकर 15 नवंबर के बीच जमा हुए पार्किंग शुल्क की जानकारी इकठ्ठा करवा रही है. इसके अलावा साउथ एमसीडी ने तो बढ़ी हुई पार्किंग की दरों को वापस ले लिया है. बुधवार देर शाम इस बाबत आदेश भी जारी कर दिया गया.

दिल्ली में बीते 2 दिनों से प्रदूषण के स्तर में कमी तो आई है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या इसको ध्यान में रखते हुए बाकी एजेंसियां भी बढ़ी हुई दरें वापस लेंगी, ताकि लोगों को तो राहत मिले वहीं एजेंसियों को हो रहा नुकसान भी कम हो.

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