21 मौतों के बाद अब टूटी MCD की नींद! दिल्ली अग्निकांड पर इन सवालों के जवाब कौन देगा

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में 21 मौतों के बाद प्रशासन हरकत में आया है. फायर NOC, अवैध निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं.

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मालवीय नगर होटल में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है. (Photo: PTI) मालवीय नगर होटल में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है. (Photo: PTI)

सुशांत मेहरा / अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग ने 21 लोगों की जान ले ली. मरने वालों में 12 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद दिल्ली सरकार, एमसीडी, पुलिस और अन्य एजेंसियां एक्शन मोड में आ चुकी हैं. ज्वाइंट कमेटी बन गई है, अवैध संपत्तियों की पहचान हो चुकी है, सीलिंग की तैयारी है और होटलों के शटर गिरने लगे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई पहले नहीं हो सकती थी?

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प्रारंभिक जांच में मालवीय नगर इलाके की 18 प्रॉपर्टी को चिन्हित किया गया है. इन पर नियमों के उल्लंघन, अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के आरोप हैं. अधिकारियों का कहना है कि इन प्रॉपर्टी पर जल्द ही सख्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सीलिंग भी शामिल है.

हौज रानी और आसपास के इलाकों में अब कई होटलों के बाहर ताले लटक रहे हैं. कुछ जगहों पर होटलों के बोर्ड तक हटा दिए गए हैं. विदेशी पर्यटक सामान लेकर ठहरने की जगह तलाशते दिख रहे हैं. लेकिन फिजा में सवाल तैर रहे हैं कि जो होटल हादसे के अगले दिन बंद हो गए, क्या वे पहले से प्रशासन की नजर में नहीं थे?

(Photo: PTI)

फायर NOC की अनदेखी!

आजतक से बातचीत में दिल्ली फायर सर्विस के डिप्टी फायर चीफ ए.के. मलिक ने दावा किया कि इलाके के किसी भी होटल के पास फायर एनओसी नहीं थी. अगर ऐसा था, तो फिर ये होटल इतने लंबे वक्त से कैसे चल रहे थे? क्या किसी विभाग ने कभी जांच नहीं की? क्या फायर सेफ्टी सिर्फ कागजों में थी?

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हादसे के बाद अब एमसीडी ने जांच शुरू कर दी है. मेयर ने तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है. उपराज्यपाल ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं. दिल्ली पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है. लेकिन यह सब तब हो रहा है, जब 21 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

बड़े सवालों का साया...

  1. अगर इलाके के होटलों के पास फायर एनओसी नहीं थी, तो वे सालों से चल कैसे रहे थे? फायर विभाग, एमसीडी और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी आखिर कहां तय होगी?
  2. क्या होटलों के लाइसेंस और संचालन की नियमित जांच कभी हुई थी? अगर हुई थी तो खामियां क्यों नहीं पकड़ी गईं और अगर नहीं हुई तो क्यों नहीं?
  3. होटल के अंदर नियमों के खिलाफ बने कमरों और ढांचे पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इमारतों में बेसमेंट और अन्य हिस्सों का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा था.
  4. हादसे से पहले कितनी बार निरीक्षण किया गया और उसकी रिपोर्ट क्या कहती थी? क्या संबंधित विभागों के पास ऐसी कोई रिपोर्ट है, जिसमें सुरक्षा खामियों का जिक्र हो?
  5. क्या 21 लोगों की मौत के बाद शुरू हुई सीलिंग कार्रवाई महज 'डैमेज कंट्रोल' है?
  6. जिन 18 संपत्तियों की पहचान की गई है कि नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, उन पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  7. जिम्मेदारी सिर्फ होटल मालिक की है या निगरानी करने वाली एजेंसियों की भी? अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो उसे रोकने में सिस्टम क्यों नाकाम रहा?

यह भी पढ़ें: Ground Report: होटलों ने हटाए बोर्ड, लटकाए ताले...मालवीय नगर में MCD के एक्शन से पहले बदला नजारा

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हादसे के बाद जागा प्रशासन!

मालवीय नगर फ्लोरिश स्टे अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने डीएम, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और पावर डिपार्टमेंट के अधिकारियों की एक ज्वाइंट कमेटी बनाई है. यह कमेटी अब पूरी दिल्ली में अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों और लाइसेंस संबंधी उल्लंघनों की जांच करेगी. मालवीय नगर में ऐसी 18 संपत्तियों की पहचान भी की जा चुकी है, जिन पर जल्द कार्रवाई हो सकती है.

लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे कड़वा सच यही है कि कार्रवाई तब शुरू हुई, जब 21 लोगों की जान जा चुकी थी. अब जांच यह तय करेगी कि इस त्रासदी का जिम्मेदार सिर्फ एक होटल मालिक है या फिर वह पूरा सिस्टम, जो लगातार खामियों को नजरअंदाज करता रहा है.

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