वीरेंद्र देव के वकील ने कोर्ट में औरतों को बताया नर्क का द्वार, हुआ हंगामा

सुनवाई के बाद कोर्ट परिसर के बाहर आश्रम के लोगों को आम लोगों ने घेर कर पूछा कि इस तरह की बात कोर्ट रूम मे क्यों कही गयी. इस पर आश्रम के लोग आम लोगों से भी बदतमीजी करते नजर आए.

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आध्यत्मिक यूनिवर्सिटी (आश्रम) आध्यत्मिक यूनिवर्सिटी (आश्रम)

पूनम शर्मा / अजीत तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

यौन शोषण के आरोपी वीरेंद्र देव दीक्षित के वकील ने महिलाओं को लेकर कोर्ट रूम में विवादित बात कही. सुनवाई के दौरान वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट में औरतों को नर्क का द्वार बताया.

इस टिप्पणी के बाद कोर्ट रूम में हंगामा हो गया जिसके बाद कोर्ट ने वीरेंद्र देव के वकील को कोर्ट से बाहर फेंकवा दिया. कोर्ट में मौजूद दिल्ली महिला अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी इस पर सख्त एतराज जताया. बात यही नहीं रुकी बल्कि कोर्ट की सुनवाई के बाद कोर्ट परिसर के बाहर आश्रम के लोगों को आम लोगों ने घेर कर पूछा कि इस तरह की बात कोर्ट रूम मे क्यों कही गयी. इस पर आश्रम के लोग आम लोगों से भी बदतमीजी करते नजर आए.

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वीरेंद्र देव के वकील ने कहा कि शकराचार्य ने कहा है कि नारी नर्क का द्वार है. जिस पर कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और पूछा कि आप किस युग मे जी रहे हैं. कोर्ट ने आश्रम के वकील और आश्रम से जुड़े सभी लोगों को बाहर निकलवा दिया. सुनवाई के बाद सीबीआई ने कहा कि बाबा वीरेंद्र देव के खिलाफ लुक आउट जारी किया. कोर्ट ने दो दिन में आश्रम के सभी साखाओं का पता बताने को कहा है.

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि रोहिणी का वीरेंद्र देव अभी भी जांच में किसी तरह का सहयोग नहीं कर रहा है. वो अंडरग्राउंड है, लेकिन उनके सभी आश्रम सर्विलांस पर हैं. कोर्ट की गठित की गई टीम ने कहा कि 55 गलत एड्रेस दिए गए हैं, जिससे बहुत मुश्किल हो रही है. इसके बाद कोर्ट ने टीम को कहा कि अलग-अलग राज्यों और जगहों पर आप कोर्ट से कानूनी आदेश लेने को स्वतंत्र हैं.

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कोर्ट ने आश्रम को आध्यत्मिक यूनिवर्सिटी कहने पर भी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि जब UGC की किसी तरह की मान्यता आश्रम के पास नहीं है तो आप कैसे इसे आध्यत्मिक यूनिवर्सिटी कह सकते हैं. ये पूरी तरह से गैरकानूनी है. दिल्ली हाइकोर्ट ने यूजीसी एक्ट 1956 के तहत कोई भी इंस्टीट्यूट बिना मान्यता के यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल नहीं कर सकता.

आश्रम के ने कहा कि हम अपने गुरु के कहने पर यूनिवर्सिटी शब्द का इस्तेमाल करते हैं. कोर्ट ने कहा कि क्या आपका गुरू कानून से ऊपर है, कोर्ट ने कहा कि मामले में अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी.

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