EXCLUSIVE: कोरोना संकट में मरीजों को कैसे चूना लगा रहे एंबुलेंस ड्राइवर, स्टिंग ऑपरेशन

दिल्ली और नोएडा में किए गए इस स्टिंग ऑपरेशान में कई एंबुलेंस ड्राइवर से बात की गई है. उनसे जानने का प्रयास रहा कि वे एक मरीज को अस्पताल ले जाने के कितने पैसे लेंगे.

Advertisement
मरीजों को चूना लगाते एबुंलेंस ड्राइवर मरीजों को चूना लगाते एबुंलेंस ड्राइवर

नितिन जैन

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2021,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST
  • मरीजों को चूना लगा रहे एबुंलेंस ड्राइवर
  • जरूरत से ज्यादा कर रहे हैं चार्ज
  • कोर्ट ने दिखाई सख्ती, जमीन पर कोई असर नहीं

कोरोना संकट के बीच देश में हर स्तर पर कालाबाजारी काफी ज्यादा बढ़ गई है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब मरीज को एक एंबुलेंस मिलना भी मुश्किल साबित हो रहा है. हर तरफ से शिकायतें आ रही हैं कि एंबुलेंस वाले जरूरत से ज्यादा चार्ज कर रहे हैं, लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं. इन शिकायतों के बीच इंडिया टुडे की तरफ से एक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. उस पड़ताल से साफ हो गया कि मुश्किल सयम में कुछ लोग सिर्फ मुनाफे के लिए दूसरे को लूटने का काम कर रहे हैं.

Advertisement

मरीजों को चूना लगाते एबुंलेंस ड्राइवर

दिल्ली और नोएडा में किए गए इस स्टिंग ऑपरेशान में कई एंबुलेंस ड्राइवर से बात की गई है. उनसे जानने का प्रयास रहा कि वे एक मरीज को अस्पताल ले जाने के कितने पैसे लेंगे. हैरानी की बात ये रही कि कई एबुंलेंस ड्राइवर ने  साफ कह दिया कि वे 50 हजार रुपये तक चार्ज करने वाले हैं. किलोमीटर चाहे कम ही क्यों ना हों, लेकिन उनकी तरफ से दाम पहले से तैयार हैं. स्टिंग ऑपरेशन का ये हिस्सा समझिए-

रिपोर्टर: हमे गुरूग्राम के मेदांता अस्पताल के लिए एंबुलेंस चाहिए.

एबुंलेंस ड्राइवर: आपका मरीज कहां है.

रिपोर्टर: फॉर्मा अपार्टमेंट, ICU एंबुलेंस की जरूरत है.

एबुंलेंस ड्राइवर: 50 हजार रुपये लगेंगे और बिल भी आपको नहीं मिलेगा. पेमेंट हमें की जाएगी.

ज्यादा चार्ज करने पर क्या तर्क दिए जा रहे?

Advertisement

अब दिल्ली-एनसीआर में लोगों को चूना लगाने का ये काम बड़े स्तर पर चल रहा है. जगह बदल रही हैं, अस्पताल दूसरे होते हैं, लेकिन मरीजों की जेब में आग लगाने का काम जोरों पर जारी है. वैसे ड्राइवर द्वारा रेट भी एबुंलेंस के साइज को देख चार्ज किए जा रहे हैं. दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के बाहर खड़ी एक छोटी एंबुलेंस ने सीधे 25 हजार रुपये की मांग रखी. वहीं जब पूछा गया कि अगर बड़ी एबुंलेंस चाहिए तो उनकी तरफ से दाम सीधे 40 हजार बता दिए गए. वैसे ज्यादा चार्ज करने के जो तर्क दिए जा रहे हैं, वो और ज्यादा हैरान करने वाले हैं. पड़ताल में कुछ ऐसे ड्राइवर्स भी सामने आए जो पूछ रहे थे- एबुंलेंस में आपको डॉक्टर चाहिए या फिर नर्स. अब अगर डॉक्टर के साथ एबुंलेंस चाहिए तो मरीज के परिजन को 30 हजार रुपये देने पड़ेंगे, वहीं अगर नर्स के साथ भेजा जाता है तो 22 हजार रुपये की मांग है.

कोर्ट ने दिखाई सख्ती, जमीन पर कोई असर नहीं

एबुलेंस ड्राइवर की तरफ से ये डर दिखाने की कोशिश हो रही है कि कहीं भी एंबुलेंस नहीं मिलने जा रही है, ऐसे में जो दाम बताए गए हैं उतने में ही काम किया जाएगा. मजबूर मरीज के परिजन भी मुश्किल समय में एंबुलेंस ड्राइवरों की मनमानी के आगे झुकने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं और इस वजह से इन ड्राइवरों की हिम्मत भी काफी ज्यादा बढ़ गई है. देश के कई दूसरे राज्यों से भी ये खबर सामने आई है कि एंबुलेंस ड्राइवर जरूरत से ज्यादा चार्ज कर रहे हैं. कई मौकों पर कोर्ट द्वारा भी साफ कहा गया है कि एंबुलेंस सेवा के लिए दाम तय हो जाने चाहिए. लेकिन इन फैसलों के बावजूद जमीन पर स्थिति नहीं बदली है और लोगों को चूना लगाने का काम धड़ल्ले से जारी है.

Advertisement

जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सितंबर में भी ये मुद्दा काफी जोर-शोर से उठाया गया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर को दिए आदेश में साफ कहा था कि हर राज्य एंबुलेंस के दाम तय करे और वहीं लगातार रेट की समीक्षा भी होती रहे. कोर्ट की तरफ से जोर देकर कहा गया था कि किसी भी मरीज से ज्यादा पैसे नहीं लिए जाएं. लेकिन उस फैसले के बाद भी जमीन पर कोई असर नहीं दिखा और अब कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं.
 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »