दिल्ली के यमुना बाजार घाट के इलाके में शुरू होगी तोड़फोड़, 1100 लोग होंगे बेघर

यमुना ओ-जोन इलाके में अतिक्रमण को लेकर दिल्ली सरकार सख्त हो गई है. दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 26 नोटिस जारी कर लोगों को 15 दिनों के भीतर इलाका खाली करने का निर्देश दिया. वहीं, दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जमीन दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी की है और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है.

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डीडीए ने पिछले कुछ सालों में ओ-जोन क्षेत्र में कई अभियान चलाए हैं. (Photo: PTI) डीडीए ने पिछले कुछ सालों में ओ-जोन क्षेत्र में कई अभियान चलाए हैं. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:27 AM IST

उत्तर दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार ओ‑जोन (यमुना के बाढ़ क्षेत्र) इलाके में आता है, जहां किसी भी तरह के अतिक्रमण की अनुमति नहीं है. दिल्ली सरकार ने जानकारी दी है कि समय के साथ यहां घाटों पर लगातार अतिक्रमण होता रहा है. बता दें, यमुना बाजार क्षेत्र में 32 घाट हैं जहां लगभग 1,100 लोग रहते हैं और लगभग 310 रेजिडेंशियल स्ट्रक्चर्स मौजूद हैं.

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कुछ दिन पहले दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) ने 26 नोटिस जारी कर लोगों को 15 दिनों के भीतर इलाका खाली करने के लिए कहा है.
  
वहीं, दिल्ली सरकार ने एक बयान में कहा, यह जमीन दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) की है और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डीडीए को यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण के संबंध में जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डीडीए ने पिछले कुछ सालों में ओ-जोन क्षेत्र में कई अभियान चलाए हैं और रेजिडेंशियल और कमर्शियल उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भूमि को खाली कराया है.

सरकार ने यह भी बताया कि यमुना की बाढ़ के दौरान यह क्षेत्र लगभग हर साल जलमग्न हो जाता है, विशेष रूप से 2023 और 2025 की बाढ़ के दौरान ऐसा देखा गया है. ऐसी घटनाओं से मानव जीवन, पशुधन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है.

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बार-बार आने वाली बाढ़ के लिए आपातकालीन उपायों की भी जरूरत होती है, जिसमें जनशक्ति, संसाधन और सरकारी खर्च शामिल होते हैं.

ऐसी परिस्थितियों में रेवेन्यू डिपार्टमेंट को अस्थायी निकासी और पुनर्वास उपाय करने पड़ते हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

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