नई दिल्ली में न्यायिक अधिकारी अमन शर्मा की आत्महत्या का मामला सुर्खियों में है. इस घटना के बाद अब वकीलों के एक संगठन ने इस केस में नई मांगें उठाई हैं. फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि जज अमन शर्मा ने अपनी पत्नी और रिश्तेदार के उत्पीड़न से तंग आकर यह कदम उठाया. वकीलों के संगठन ने मानसिक दबाव की समस्या का मुद्दा भी उठाया है.
इस मामले को लेकर वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को एक खुला पत्र लिखा है. पत्र में मांग की गई है कि जज की पत्नी स्वाति मलिक, जो खुद एक न्यायिक अधिकारी हैं, उनको जांच पूरी होने तक न्यायिक कार्य करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
हालांकि, पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, अब तक की शुरुआती जांच में जज अमन शर्मा और उनकी पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद की बातें सामने आई हैं.
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एफआईआर में जज की पत्नी स्वाति मलिक और उनकी चचेरी बहन निधि मलिक, जो एक आईएएस अधिकारी हैं, उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने इस मामले में संबंधित सभी लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वकीलों के संगठन ने न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठाया है. संगठन का कहना है कि जजों पर काम का दबाव, व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियां और सामाजिक अपेक्षाएं मिलकर गंभीर मानसिक तनाव पैदा कर सकती हैं. पत्र में वकीलों के संगठन ने मांग करते हुए कहा है कि न्यायिक अधिकारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जाना चाहिए.
बता दें कि नई दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में 2 मई को राजस्थान के अलवर के रहने वाले 30 वर्षीय जज अमन शर्मा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. घटना के बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि घरेलू विवाद इस घटना की वजह रहा, जिसमें उनकी पत्नी और उनकी साली की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए. परिवार का कहना था कि साली के दखल से पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ रहा था.
संजय शर्मा