दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लेकर कई बड़े फैसले किए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा था कि सभी को मिलकर देश के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए. इसे 'मेरा भारत मेरा योगदान' कहा गया है. दिल्ली सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है. दिल्ली सरकार ने सप्ताह में दो दिनों के लिए वर्क फ्रॉम होम का ऐलान किया है. सरकारी गाड़ियों का कम इस्तेमाल होगा. अगले 6 महीने तक कोई नई गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी. आधी मीटिंगें ऑनलाइन होंगी. सरकारी मंत्री एक साल तक विदेश नहीं जाएंगे. ये सब कदम खर्च को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए हैं.
'मेरा भारत मेरा योगदान' ये प्रधानमंत्री का एक अभियान है. इसका मतलब है कि हर नागरिक अपने देश के लिए कुछ न कुछ करे. छोटे-छोटे कदम उठाए जिससे देश को फायदा हो. ये कोई बड़ा काम नहीं होना चाहिए बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें जैसे पानी बचाना, बिजली बचाना, पर्यावरण को साफ रखना आदि.
दिल्ली सरकार ने क्या किया?
दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली में ये अभियान शुरू करने का फैसला किया है. सरकार खुद से शुरू कर रही है. मतलब सरकारी कर्मचारी और सरकारी विभाग सब मिलकर इस अभियान में शामिल होंगे.
हर हफ्ते 2 दिन घर से काम क्या है?
आमतौर पर सरकारी कर्मचारी हफ्ते में पांच दिन ऑफिस जाते हैं. लेकिन अब हर हफ्ते 2 दिन वो घर से काम कर सकते हैं. यानि हफ्ते में दो दिनों के लिए वर्क फ्रॉम होम होगा.
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वर्क फ्रॉम होम से क्या फायदा होगा?
पहला, कर्मचारियों को गाड़ियों में बैठकर ऑफिस जाना नहीं पड़ेगा. इससे ईंधन बचेगा. दूसरा, ट्रैफिक कम होगी क्योंकि कम लोग गाड़ियों में निकलेंगे. तीसरा, वायु प्रदूषण कम होगा. चौथा, गाड़ियों से निकलने वाली जहरीली गैसें कम होंगी.
सरकारी गाड़ियों का कम इस्तेमाल का मतलब?
दिल्ली सरकार कहती है कि अब सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल कम किया जाएगा. जब तक जरूरी न हो तब तक गाड़ी नहीं चलाई जाएगी. इससे भी ईंधन बचेगा और प्रदूषण कम होगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के काफिले में भी कटौती हुई है.
अगले 6 महीने तक कोई नई गाड़ी नहीं?
दिल्ली सरकार ने कहा है कि अगले 6 महीने तक वो कोई नई सरकारी गाड़ी नहीं खरीदेंगे. इससे सरकार का पैसा बचेगा. ये बचा हुआ पैसा कल्याणकारी कामों में लगाया जा सकता है.
29 कॉलोनी में 58 स्पेशल बस क्या है?
दिल्ली सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए 58 नई बसें चलाएगी. ये बसें 29 सरकारी कॉलोनियों से ऑफिस तक जाएंगी. इससे कर्मचारियों को अपनी गाड़ी से ऑफिस नहीं जाना पड़ेगा. बस में बैठकर वो ऑफिस चले जाएंगे.
आधी मीटिंगें ऑनलाइन होंगी?
सरकार ने कहा है कि अब 50 फीसदी मीटिंगें ऑनलाइन होंगी. मतलब आधी मीटिंगें कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप से होंगी. लोगों को मीटिंग हॉल में नहीं बैठना पड़ेगा.
इससे क्या होगा?
पहला, कर्मचारियों को ऑफिस नहीं जाना पड़ेगा. घर से भी मीटिंग में शामिल हो सकेंगे. दूसरा, समय की बचत होगी. तीसरा, बिजली का खर्च कम होगा क्योंकि मीटिंग हॉल की लाइट, एयर कंडीशनर नहीं चलेगा.
मंत्रियों को कोई विदेश यात्रा नहीं?
दिल्ली सरकार के कोई भी मंत्री अगले एक साल तक विदेश नहीं जाएंगे. विदेश जाने में बहुत पैसा खर्च होता है. विदेशी यात्रा के लिए हवाई जहाज, होटल, खाना सब पर बड़ा खर्च होता है. इस खर्च को रोककर सरकार पैसा बचा रही है.
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इन सब फैसलों का असल मकसद क्या है?
इन सब फैसलों का असल मकसद तीन चीजें हैं. पहला, सरकार का पैसा बचाना. जो पैसा बचेगा वो जनकल्याण के कामों में लगेगा. स्कूल, अस्पताल, सड़कें, बिजली, पानी सब चीजों में बेहतरी आएगी.
दूसरा, प्रदूषण को कम करना. कम गाड़ियां चलेंगी तो कम प्रदूषण होगा. दिल्ली की हवा ज्यादातर समय प्रदूषित रहती है. अगर प्रदूषण कम हो तो लोग स्वस्थ रहेंगे.
सुशांत मेहरा