प्राइवेट अस्पताल के बाद, मनमानी फीस वसूलने वाले प्राइवेट स्कूलों पर केजरीवाल सरकार की नज़र

बुधवार को दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की बैठक हुई है, जहां 7वें वेतन आयोग के नाम पर प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने की शिकायतों से निपटने का प्लान तैयार किया गया है.

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अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

पंकज जैन / दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्‍ली,
  • 13 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

दिल्ली में प्राइवेट अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए कदम उठाने जा रही है. बुधवार को दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की बैठक हुई है, जहां 7वें वेतन आयोग के नाम पर प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने की शिकायतों से निपटने का प्लान तैयार किया गया है.

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सीएम दफ़्तर के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों द्वारा 7वें वेतन आयोग के नाम पर मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने और एरियर वसूलने की शिकायतें सरकार को आई हैं. शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार ने गुरुवार को सभी विधायकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई है. इस बैठक में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे.

बैठक में सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने संबंधी शिकायतें लेकर आएंगे. आपको बता दें कि सरकार इससे पहले भी प्राइवेट स्कूलों को मनमानी फीस बसूलने के खिलाफ नोटिस भेज चुकी है. हाल ही में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री कार्यालय में भी लगातार शिकायतें मिलने के बाद, प्राइवेट स्कूलों से निपटने के लिए एक खास प्लान तैयार किया जाएगा.  

इसके अलावा दिल्ली सरकार ने बुधवार को 'फीस विसंगति कमेटी' की अधिसूचना जारी कर दी है. ये कमेटी जस्टिस दुग्गल कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर बनी हैं जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने गठित की थी. इन कमेटीज के नोटिफिकेशन के बाद अब किसी भी रिकगनाइज्ड अनऐडेड स्कूल के स्टूडेंट के पैरेंट्स या खुद गार्जियन या अन्य पैरेंट्स के साथ मिलकर, स्कूल की तरफ से और अन्य चार्जेस संबंधी शिकायतें कमेटीज से कर सकेंगे.

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ये शिकायत संबंधित जिले की कमेटी करनी होगी. ऐसी के लिए 100 रुपये की फीस देनी होगी. हर जिले में गठित होने वाली इस कमेटी में जिले के डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन इसके चेयरपर्सन और जोन के एजुकेशन ऑफिसर इसके सदस्य होंगे.

ये कमेटी शिकायत मिलने के 90 दिन के भीतर इस मामले की तहकीकात करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. इसके बाद विभाग इन पर उचित कार्रवाई करेगा. 

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