राज बब्बर के बयान पर बवाल, नक्सलियों को क्रांति से निकला बताया

नक्सलियों को क्रांति से निकला बताने वाला कहकर कांग्रेस नेता राज बब्बर ने छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार को टक्कर दे रही अपनी ही पार्टी को विवादों में ला खड़ा किया है.

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कांग्रेस नेता  राज बब्बर (फोटो: Twitter/@INCChhattisgarh) कांग्रेस नेता राज बब्बर (फोटो: Twitter/@INCChhattisgarh)

विवेक पाठक

  • रायपुर,
  • 04 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 12:22 PM IST

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक राज बब्बर के नक्सलियों को क्रांति से निकले लोग बताने वाले बयान ने पार्टी नेताओं को बैकफुट पर ला दिया है तो वहीं बीजेपी को एक बार फिर कांग्रेस पर राजनीतिक फायदे के लिए नक्सलियों के साथ खड़े होने का आरोप लगाने का मौका मिल गया.

दरअसल राजधानी रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपी कांग्रेस के प्रमुख राज बब्बर ने नक्सलवाद पर एक सवाल के जवाब में कहा कि गोलियों से मसले हल नहीं होते. उनके सवालों का उत्तर देना पड़ेगा, और उनको डरा कर या लालच देकर क्रांति के जो लोग निकले हुए हैं उनको रोका नहीं जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि वो लोग अभाव में है, जिनका अधिकार छीना गया है. वे लोग अपने अधिकार के लिए प्राणों की आहुति दे रहे हैं. वो हिंसा करके गलती कर रहे हैं, क्योंकि गोलियों से हल नहीं होता है. न इधर की बंदूक से हल निकलेगा न उधर की बंदूक से हल निकलेगा. अगर हल निकलेगा तो बातचीत से ही निकलेगा.

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राज बब्बर के इस  बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि राजनीतिक फायदे के लिए कांग्रेस पार्टी की हमेशा से माओवादियों के प्रति सहानुभूति रही है.

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता का यह बयान तब आया है जब हाल ही में दंतेवाड़ा के घने जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन पर निकले सुरक्षाबलों पर हुए माओवादी हमले में एक सब इंस्पेक्टर, एक कॉन्सेटबल और डीडी न्यूज के कैमरामैन अच्युतानंद साहु शहीद हो गए. इस नक्सली हिंसा में माओवादियों की गोलियों का शिकार पत्रकार साहू की खबर से पूरा देश में शोक की लहर मे डूब गया था और जगह-जगह नक्सल हिंसा की निंदा करते हुए कैंडल मार्च निकले थें.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में चुनावों से पहले नक्सली हिंसा बढ़ गई है. पिछले हफ्ते ही राज्य में दो नक्सली हमले हुए हैं, तो वहीं चुनाव में  हिस्सा न लेने के लिए नक्सलियों की धमकी की खबरे भी रोजाना आ रही हैं. हाल के महीनों में सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान में भी कई बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिसमें कई माओवादी या तो मार गिराए गए या तो उन्हें सरेंडर के लिए मजबूर होना पड़ा. 

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