चाय, लड्डू और 1100 रुपये में हो गई शादी, नोटबंदी के दौर में कटिहार के जोड़े ने पेश की मिसाल

नोटबंदी के दौर में एक तरफ जहां गुजरात के सूरत में एक जोड़े ने 500 रूपय में ब्याह रचा लिया वहीं दूसरी तरफ बिहार के कटिहार में भी एक जोड़े ने मात्र ₹1100 में शादी की. यह अनोखी शादी पिछले हफ्ते हुई जहां किसी प्रकार की चमक दमक या तामझाम नहीं था बल्कि सादगी से यह जोड़ा परिणय सूत्र में बंधा.

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नोटबंदी से परेशान थे लड़की वाले, लड़के के परिवार ने दी अच्छी सलाह नोटबंदी से परेशान थे लड़की वाले, लड़के के परिवार ने दी अच्छी सलाह

मोनिका शर्मा / रोहित कुमार सिंह

  • कटिहार ,
  • 06 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 10:40 PM IST

नोटबंदी के दौर में एक तरफ जहां गुजरात के सूरत में एक जोड़े ने 500 रूपय में ब्याह रचा लिया वहीं दूसरी तरफ बिहार के कटिहार में भी एक जोड़े ने मात्र ₹1100 में शादी की. यह अनोखी शादी पिछले हफ्ते हुई जहां किसी प्रकार की चमक दमक या तामझाम नहीं था बल्कि सादगी से यह जोड़ा परिणय सूत्र में बंधा.

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जब धरे के धरे रह गए धूमधाम से शादी के सपने
योगेंद्र साहनी ने अपनी बेटी सरस्वती की शादी अपने ही गांव के रहने वाले मुंशी साहनी के बेटे राजाकुमार से तय की थी. हर पिता की तरह योगेंद्र साहनी ने भी अपनी बेटी की शादी को बड़ी धूमधाम से करने का मन बनाया था पर अचानक नोटबंदी की वजह से उनके सारे सपने धरे के धरे रह गए. नोट बंदी की वजह से हताश योगेंद्र साहनी की परेशानी का पता जब लड़के के पिता मुंशी साहनी को चला तो उन्होंने एक आदर्श मिसाल कायम करते हुए योगेंद्र साहनी को सलाह दी कि वह शादी पर कोई खर्च न करें और ऐसा करने पर उन्हें या उनके बेटे को कोई परेशानी नहीं होगी.

न कोई कोई व्यंजन न लेन-देन, बारातियों को मिले लड्डू और चाय
तय तिथि के अनुसार राजकुमार साहनी बारात लेकर सरस्वती के घर पहुंचे और बिना किसी तड़क-भड़क या तामझाम के दोनों ने शादी की. खास बात ये है कि इस शादी में न ही तरह-तरह के व्यंजन परोसे गए थे, न ही दहेज का लेन-देन हुआ बल्कि बारातियो को सिर्फ एक-एक कप चाय और लड्डू खिलाया गया जिस पर कुल मिलाकर खर्च 1100 रुपए आया.

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शादी में पंडित ने नहीं पड़े मंत्र
दुल्हन सरस्वती ने कहा, 'हमारी शादी पहले ही तय हो चुकी थी मगर ऐन मौके पर नोटबंदी की वजह से पिताजी को काफी समस्या हो रही थी. हम शादी को टाल नहीं सकते थे और इसलिए बारातीयों को सिर्फ एक कप चाय और एक लड्डू खिलाया गया.' गौरतलब है कि राजकुमार और सरस्वती के विवाह को किसी पंडित ने संपन्न नहीं कराया बल्कि दोनों ने खुद अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे से शादी कर ली.

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