अभिजीत बोले- मैं फिल्म नहीं, म्यूजिक इंडस्ट्री से, हीरो करते हैं नेतागीरी

मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे के सफाईगीरी समिट में अभि‍जीत भट्टाचार्य बोले बॉलीवुड में बहुत राजनीति है.

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अभि‍जीत भट्टाचार्य अभि‍जीत भट्टाचार्य

महेन्द्र गुप्ता

  • मुंबई,
  • 02 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 12:35 AM IST

मुंबई में इंडिया टुडे के सफाईगीरी समिट में सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य ने शिरकत की. इस सेशन को श्वेता सिंह ने मॉडरेट किया. अभिजीत ने 400 से ज्यादा फिल्मों में गाया हैं. वे अकसर अपने विवादित बयानों क लि‍ए चर्चा में रहे हैं.

मंच पर पहुंचते ही अभिजीत ने जो पहली बात कही वह यह कि उन्हें न्यूट्रल माना जाए. वे जो सही-गलत बयान देते हैं उनके पीछे राजनीति के प्रति उनका नजरिया है. उन्होंने कहा, "मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं, बल्क‍ि म्यूजिक इंडस्ट्री से आता हूं. फिल्म इंडस्ट्री में जितनी राजनीति है, उतनी कहीं नहीं. यहां अभिनेता ही नेता है.

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करीब 630 गाने गा लिए हैं फिल्म इंडस्ट्री का कहलाने में क्या दिक्कत है? इस सवाल के जवाब में अभिजीत ने कहा, "मुझे कोई दिक्कत नहीं है. फिल्मों के लिए नकली चीजों पर भरोसा करते हैं. आप अगर फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को रियलिटी में देखेंगे तो उनमें वो बात नहीं है. मैं वैसा नहीं हूं. फिल्मों में जितना आप देखते हैं. फिल्में ठीक हैं, लेकिन फिल्मों के बारे में ये सब चीजें ठीक नहीं होती."

आगे अभिजीत ने कहा कि 10 साल पहले मुंबई में इतनी गंदगी नहीं थी, लेकिन जो लोग बाहर से आए हैं, वो गंदगी ला रहे हैं. मुंबई वाले तो सफाई कर रहे हैं, लेकिन बाहर वाले नहीं कर रहे. मैं कानपुर में जन्मा हूं और मुंबई में रहता हूं.

कानपुर में फैली जबर्दस्त गंदगी के सवाल पर अभिजीत ने कहा  "पहले वहां बड़ी संख्या में इंडस्ट्री और चिमनियां होने के बावजूद इतनी गंदगी नहीं थी, जितनी की आज है. मैं पहले जैसा कानपुर देखना चाहता हूं, मैं नहीं चाहता कि कानपुर में कोई बदलाव हो गया. कानपुर का पेठा आगरा से बेहतर है."

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आगे अभ‍ि‍जीत ने कहा "'मैं रामकृष्ण मिशन का पढ़ा हूं, तब तक मुझे पता नहीं था असहिष्णुता क्या होती है. मैंने ये शब्द अभी-अभी सुनना शुरू किए हैं''.

पिछले सत्र में आयुष्मान खुराना ने कहा, ''मैं चंडीगढ़ से हूं, वहां लोग ट्रैफिक रूल्स को फॉलो करते हैं, लेकिन मुंबई में ऐसा नहीं है. मैं चाहूंगा कि पूरे देश में ट्रैफिक ना फॉलो करने की जो धारणा है उसे फ्लश किया जाना चाहिए.''

वहीं राधिका आप्टे ने कहा-  ''मेरी एक स्कूल फ्रेंड है वो एक NGO के साथ काम करती हैं. वे 10 साल के बच्चों को कचरे के प्रकार के बारे में पूछ रही थी. तभी एक बच्चे ने कहा कि वैचारिक कचरा. मैं देश से वैचारिक कचरे को फ्लश करना चाहूंगी.''

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