बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर्स में से एक राजकुमार राव अगर कोई डार्क कॉमेडी लेकर आएं तो उम्मीद यही की जाएगी कि वो कमाल का काम करेंगे. फिल्म 'टोस्टर' का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से फैंस को इसे देखने का इंतजार था. अब जब ये आ गई है तो इसपर बात कर ही लेते हैं.
'टोस्टर' कहानी है एक कंजूस-मक्खीचूस (राजकुमार राव) आदमी रमाकांत पारेख की. रमाकांत एक नंबर चिंदी आदमी है. और जैसा कि अक्सर होता है वो कंजूस के साथ-साथ लालची भी होता है. रमाकांत और उसकी पत्नी शिल्पा (सान्या मल्होत्रा) मिलकर एक बूढ़ों की कालोनी में किराए पर रहते हैं. ठंडी-धीमी जिंदगी वाली इस कालोनी में किराया कम है इसलिए रमाकांत यहां से जाना नहीं चाहता. यहां उसके पड़ोस में रहती हैं उसकी मकान मालकिन मिसेज डीसूजा (सीमा पाहवा), उनका गंजेड़ी बेटा ग्लेन (अभिषेक बनर्जी) और माला आंटी (अर्चना पूरन सिंह).
रमाकांत की पत्नी के मुताबिक, उसकी बीमारी बढ़ती जा रही है. वो टेलिकॉम कंपनी से कॉल करके गलती से कटे 6 रुपये तक कैश में मांग लेता है. उसकी जिंदगी का सबसे मुश्किल पल वही है जब उसकी पत्नी शिल्पा अपने गुरुजी की बेटी की शादी के लिए उससे 9 हजार का टोस्टर खरीदवा देती है. इसे खरीदने में मानों रमाकांत के प्राण बस निकल ही गए थे. लेकिन एक चीज जो वो भी नहीं जानता था, वो ये कि ये टोस्टर सही में उसकी जान का क्लेश बन जाएगा.
डार्क कॉमेडी है ठंडी
अब टोस्टर पर टिकी ये डार्क कॉमेडी कई बड़े ट्विट्स और टर्न्स लेती है. यहां मर्डर, मिस्ट्री, कॉमेडी के साथ-साथ आपको डरावनी अर्चना पूरन सिंह भी मिलेंगी. लेकिन फिर भी पिक्चर में कमी रह गई है. फिल्म की शुरुआत मजेदार होती है. पहले हाफ में आपको रमाकांत और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानने को मिलता है. कई बड़े मोड़ आते हैं और आपकी दिलचस्पी इसमें बढ़ती जाती है. मगर सेकेंड हाफ आपको कुछ नया सर्व नहीं करता. डायरेक्टर विवेक दासचौधरी की बनाई ये फिल्म आपको कुछ ही पलों में हंसा पाती है. इसके थोड़े बहुत मोमेंट और पंचलाइन अच्छे हैं. मगर ये फिल्म आपको याद रखने लायक कुछ भी नहीं देती. अक्षत घिल्डियाल, अनाघ मुखर्जी और परवीज शेख की लिखी कहानी शुरुआत में आपका ध्यान तो खींचती है, मगर अंत तक आते-आते बिखर जाती है. इसका क्लाइमैक्स भी अजीब है और आपको संतुष्टि नहीं देता.
परफॉरमेंस
परफॉरमेंस की बात करें तो पिक्चर के हीरो राजकुमार राव ने बढ़िया काम किया है. उनसे कम ही उम्मीद की भी नहीं जाती. मगर राजकुमार आपको कुछ नया नहीं देते. एक पल के बाद आपको उनकी पुरानी परफॉरमेंस और किरदार याद आने लगते हैं. शिल्पा के रोल में सान्या अच्छी हैं. दुख की बात ये है कि उनके पोटेंशियल के हिसाब से उन्हें कुछ बड़ा करने को नहीं दिया गया. वो बस इस फिल्म में हैं. अर्चना पूरन सिंह पिक्चर का सरप्राइज पैकेज है. क्रीपी मालिनी के रोल में उन्होंने अच्छा काम किया है. उनके अलावा फराह खान, उपेंद्र लिमये, सीमा पाहवा और अभिषेक बनर्जी भी बढ़िया हैं. फराह को किसी फिल्म में इतने वक्त बाद देखना सही में रिफ्रेशिंग था. कुल-मिलाकर अगर आपको 'टोस्टर' देखनी है तो बहुत ज्यादा उम्मीद लेकर इसे शुरू न करें.
पल्लवी