Dhurandhar 2 Review: किलिंग मशीन हमजा ने कराची में मचाया कहर, 'धुरंधर 2' देख खड़े होंगे रोंगटे

Dhurandhar 2 Movie Review in Hindi: फिल्म ‘धुरंधर 2’ शुरू होते ही आप उसी कहानी में वापस पहुंच जाते हैं, जिसने दिसंबर में साढ़े तीन घंटे के लिए जनता को सीटों से चिपका कर रख दिया था. और ‘धुरंधर 2’ का माल-मसाला कैसा निकला, चलिए बताते हैं.

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'धुरंधर 2' में रणवीर सिंह ने किया कमाल (Photo: Instagram/@officialjiostudios) 'धुरंधर 2' में रणवीर सिंह ने किया कमाल (Photo: Instagram/@officialjiostudios)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:08 AM IST
फिल्म:धुरंधर 2
3.5/5
  • कलाकार : रणवीर सिंह, संजय दत्त, सारा अर्जुन, आर माधवन, अर्जुन रामपाल
  • निर्देशक :आदित्य धर

‘धुरंधर 2’ के लिए थिएटर में घुसने के साथ ही आपको कहानी के सारे किरदार, प्लॉट ट्विस्ट, डायलॉग, गाने याद आने लगेंगे. आदित्य धर की फिल्ममेकिंग ने ‘धुरंधर’ से ऐसा असर छोड़ा था कि हमज़ा की कहानी पूरी देखने के लिए पिछले तीन महीने से दिमाग कुलबुलाकर रह गया है. आदित्य ये कुलबुलाहट जानते हैं, वो अपने दर्शक को जानते हैं और भरोसा करते हैं. ‘धुरंधर 2’ शुरू होते ही आप उसी कहानी में वापस पहुंच जाते हैं जिसने दिसंबर में साढ़े तीन घंटे के लिए जनता को सीटों से चिपका कर रख दिया था. और ‘धुरंधर 2’ का माल-मसाला कैसा निकला, चलिए बताते हैं.

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रणवीर सिंह ने मचाया बवाल

धुरंधर 2’ ने सबसे पहले उन लोगों की शिकायत दूर की है जो पहली फिल्म में रणवीर सिंह के तगड़े धनाके का वेट कर रहे थे. लेकिन उन्हें वो धमाका सिर्फ एंड में दिखा. कहानी जसकीरत सिंह रांगी से शुरू होती है. उसकी लाइफ में ऐसा क्या था जिसने उसे किलिंग मशीन बना दिया, इसकी कहानी देखने के लिए कालेज थोड़ा मजबूत रखना होगा. जसकीरत की कहानी का सबसे बड़ा इमोशन बदला है. इस सीक्वेंस में रणवीर की एनर्जी देखकर पता चलता है कि उनकी कितनी मेहनत लगी है. हिंसा के लिए लगने वाली ताकत के साथ जो इमोशन खर्च होता है, उसे उतारने में भी रणवीर खरे साबित हुए हैं.

जसकीरत का बैकग्राउंड दिखाने के बाद फिल्म उसी ल्यारी में लौटती है, जहां आज वो हमज़ा बनकर राज करने निकला है. ये पोर्शन हमज़ा की टैक्टिकल प्लानिंग, उसके पॉलिटिकल दिमाग और जासूसी स्किल्स को चमकाता है. जमील जमाल, एसपी चौधरी, मेजर इकबाल और उजैर बलोच से हमज़ा कैसे खेल रहा है. वो फर्स्ट हाफ की हाईलाइट है. मगर इंटरवल से ठीक पहले कहानी में एक ट्विस्ट है. हमज़ा और जसकीरत के बीच का पर्दा हटाने वाला एक किरदार आ चुका है. माहौल सेट है, ‘धुरंधर 2’ उसी फॉर्म में है जो ‘धुरंधर’ का कमाल थी. सेकंड हाफ में फिल्म खुलते ही, माहौल बदलेगा.

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पंजाब में ड्रग्स की समस्या, अलगाववादी आंदोलनों को मिलती फंडिंग, नेपाल-यूपी के रास्ते देश में घुसती नकली करंसी... ये सब 'धुरंधर 2' के नैरेटिव को एंगेजिंग बनाती हैं. ये वो खबरें हैं जो आप अखबारों में पढ़ते आए हैं, लेकिन फिल्म इन्हें जिस तरह पाकिस्तान की जमीन पर उगे आतंकवाद से जोड़ती है, वो स्क्रीन पर सॉलिड कहानी बनता है. स्क्रीनप्ले आपको एक ऐसी कहानी देता है जिसके घटने की कल्पना आपने रियल घटनाओं को देखकर कभी की होगी, या सुनी होगी. मगर उस फिक्शन को 'धुरंधर 2' मजबूत विजुअल्स देती है.

कराची में हमज़ा का कहर

सेकंड हाफ में हमज़ा उर्फ जसकीरत को अजय सान्याल (आर माधवन) ने खुली छूट दे दी है कि अब वो सारी बेड़ियां तोड़ कर कराची में खुला कहर मचाए. पर असल में बेड़ियां तोड़ी हैं ‘धुरंधर 2’ ने सेकंड हाफ में ये फ़िल्म एक अलग ही चीज है. 

‘धुरंधर 2’ का सेकंड हाफ इस बात की कोई परवाह नहीं करता कि आप इस फिल्म को पॉलिटिकल होने के लिए कितना जज करेंगे. और न्यूट्रल कहलाने वाली लकीर के किस तरफ देखेंगे. लेकिन ‘असाधारण रियल घटनाओं’ पर आधारित होने का दावा करती ये कहानी खुले तौर पर पॉलिटिकल रेफरेंस गिराती चलती है. चाहे सरहद के उस पर पाकिस्तान की बात हो, या इस पर भारत की. 

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एक पूर्व नेता पर न्यूज चैनलों के सामने चली गोली का सीन. नोटबन्दी को पाकिस्तानी आतंकियों की साजिश नाकाम करने वाला फैसला बताने के सीक्वेंस. भारत से कई सालों पहले गायब हुए एक खूंखार गैंगस्टर को पाकिस्तान में दिखाना. ‘धुरंधर 2’ एक बार के लिए उन सारी घटनाओं को सच की तरह ट्रीट करती है, जिन्हें अभी तक वाइल्ड कॉन्सपिरेसी थ्योरीज माना जाता रहा है. फ़िल्म में एक सीक्वेंस तो ऐसा आता है जब पाकिस्तान में भारत के खिलाफ आतंकवाद का चेहरा रहे बड़े आतंकी थोक में मारे जा रहे हैं. यहां फ़िल्म रियल घटनाओं को फिक्शन से जितना ज्यादा मैंक करने की कोशिश करती है, इंगेजमेंट उतना ही कम होता है. लेकिन ये तय है कि इस फ़िल्म में दिखाई गई एक-एक घटना का सोशल मीडिया-मीडिया में खूब एक्स-रे होने वाला है.

मगर ऐसा करते हुए ‘धुरंधर 2’ फर्स्ट हाफ से लंबा सेकंड हाफ आपके सामने रखती है. इस हिस्से की पेसिंग कुछेक जगहों पर ड्रॉप होती है. लेकिन आदित्य धर अपने बस्ते से क्या नया निकालने वाले हैं ये दिलचस्पी कभी खत्म नहीं होती. रणवीर सिंह सेकंड हाफ में वो सबकुछ कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद पहले पार्ट का पहला टीजर देखते हुए आपने की होगी. उन्होंने धर के विजन के आगे खुद को पूरी तरह सरेंडर किया है. 

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संजय दत्त का एसपी चौधरी ‘धुरंधर 2’ में पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गया है. बल्कि संजय दत्त के लिए ‘धुरंधर 2’ वो फ़िल्म है, जो उनके लिए ‘KGF 2’ होती हुई लग रही थी. अर्जुन रामपाल का मेजर इकबाल इस बार वो विलेन बना है, जिसकी उम्मीद शायद लोगों को फर्स्ट पार्ट से थी. राकेश बेदी साहब का जमील जमाल ‘धुरंधर 2’ का असली हीरो है! फ़िल्म खत्म होने को आएगी तो आप उनके लिए तालियां-सीटियां निकाल सकते हैं. 

‘धुरंधर 2’ पहली फ़िल्म की कहानी को उसी रास्ते ले जाती है, जहां जाने की उम्मीद इसे थी. मगर ऐसा करने में इसके स्टाइल, नैरेटिव या एक्शन से कोई समझौता नहीं किया गया है. एक्शन, वायलेंस और गालियां तो पहली फ़िल्म से दोगुनी हैं. और तीनों चीजें पहली फ़िल्म से ज्यादा करारी भी हैं. मगर लंबाई एक छोटा सा मुद्दा तो है ही. कैमियोज के लिए जितनी एक्साइटमेन्ट थी, उतने दमदार नहीं हैं. पोस्ट क्रेडिट सीन है, इसलिए अंत तक बैठें जरूर. हालांकि, उस सीन से आप कितने खुश होंगे ये बाद की बात है! 

कुल मिलाकर ‘धुरंधर 2’ दमदार और सॉलिड सीक्वल है, जिसपर प्रोपेगेंडा होने या न होने के टेस्ट पहले से बि ज्यादा होंगे. सिर्फ एक फ़िल्म की तरह देखने वाले दर्शके के लिए ये थोड़ी लंबी जरूर है, मगर लगातार एक के बाद एक सिनेमैटिक मोमेंट्स डिलीवर करती है.

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