दिग्गज एक्टर और पहलवान दारा सिंह के बेटे विंदू दारा सिंह ने अपनी पहली शादी को लेकर बड़ी बात कही है. विंदू ने बताया कि जब उन्होंने एक्ट्रेस फराह नाज से शादी करने का फैसला किया था, तब उनके पिता दारा सिंह ने उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी थी कि इंटरफेथ यानी अलग-अलग धर्मों की शादी निभाना आसान नहीं होता.
हालांकि उस वक्त विंदू को लगा था कि उनके रिश्ते में कभी कोई परेशानी नहीं आएगी, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि उनके पिता की बात काफी हद तक सही साबित हुई.
जब पिता ने दी थी सलाह
'कड़क' को दिए इंटरव्यू में विंदू ने बताया कि उनके पिता हमेशा सभी धर्मों का सम्मान करते थे और कभी किसी धर्म के खिलाफ नहीं रहे. विंदू ने कहा- हमारे घर में हमेशा यही सिखाया गया कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई- सब भाई-भाई हैं. मेरे पिता हमेशा यही कहा करते थे. लेकिन जब उन्होंने फराह नाज से शादी की इच्छा जताई, तब दारा सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की.
विंदू ने बताया- पापा ने मुझसे कहा था- विंदू, हिंदू-मुस्लिम शादियां बहुत मुश्किल होती हैं. आखिर में जाकर चीजें बिगड़ जाती हैं. हालांकि उस समय प्यार में डूबे विंदू को यकीन था कि उनके साथ ऐसा कुछ नहीं होगा.
उन्होंने कहा- मैंने पापा से कहा था कि कुछ गलत नहीं होगा. लेकिन उन्होंने फिर कहा था कि सोच-समझकर फैसला लेना, क्योंकि आखिर में ये चीजें मुश्किल हो जाती हैं.
बेटे की वजह से नहीं है कोई पछतावा
अपनी शादी टूटने पर बात करते हुए विंदू ने साफ कहा कि उन्हें अपने फैसले का कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि इसी रिश्ते से उन्हें उनका बेटा फतेह मिला. उन्होंने कहा- मुझे कोई अफसोस नहीं है क्योंकि मेरे पास फतेह है. वो शानदार बेटा है और मैं उसे अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता हूं. लेकिन पापा जो कह रहे थे, वो काफी हद तक सही था.
धर्म बना रिश्ते में दरार की वजह?
जब विंदू से पूछा गया कि क्या धर्म उनके रिश्ते के टूटने की बड़ी वजह बना, तो उन्होंने बिना झिझक जवाब दिया- बिल्कुल... बिल्कुल. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि शादी के शुरुआती दिनों में धर्म कभी उनके बीच मुद्दा नहीं था. विंदू के मुताबिक- हमारे बीच धर्म को लेकर कभी कोई परेशानी नहीं थी. लेकिन बाद में अचानक फराह बहुत ज्यादा धार्मिक हो गईं.
उन्होंने कहा कि जब रिश्ते की शुरुआत किसी और तरीके से होती है और बाद में अचानक चीजें बदलने लगती हैं, तो कई तरह की मुश्किलें पैदा हो जाती हैं. विंदू ने इस पूरे अनुभव से एक बड़ी सीख भी साझा की. उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चे अपने माता-पिता की सलाह को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बाद में समझ आता है कि उनकी बातों में कितना अनुभव छिपा होता है.
उन्होंने कहा- मां-बाप हमें सलाह देते हैं, लेकिन हम सोचते हैं कि उन्हें क्या पता. जबकि सच यह है कि उन्हें हमसे ज्यादा अनुभव होता है. जब वो किसी चीज के लिए रोकते हैं या चेतावनी देते हैं, तो कई बार वो भगवान का इशारा होता है.
आखिरी वक्त तक एकता का संदेश देते रहे दारा सिंह
दिलचस्प बात यह है कि इंटरफेथ शादी को लेकर चेतावनी देने वाले दारा सिंह खुद धार्मिक एकता में गहरा विश्वास रखते थे. विंदू ने बताया कि निधन से पहले दारा सिंह ने एक कविता लिखी थी, जिसमें उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी को एक बताया था.
विंदू ने कहा- पापा हमेशा कहते थे कि रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल सबकी एक ही है. बात खत्म करते हुए विंदू ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से यही सीख ली है कि इंसानों को धर्म के आधार पर बांटना नहीं चाहिए.
उन्होंने कहा- हम सब एक हैं. जैसा मोदी जी कहते हैं- सबका साथ, सबका विकास. हमें कभी बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. हम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे.
बता दें कि विंदू दारा सिंह और फराह नाज ने साल 1996 में शादी की थी. बाद में दोनों अलग हो गए. इस रिश्ते से उनका एक बेटा फतेह रंधावा है. शादी भले ही ज्यादा लंबी नहीं चली, लेकिन विंदू आज भी इस रिश्ते और अपने बेटे के लिए खुद को खुशकिस्मत मानते हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क